अलीगढ़ के बहुचिर्चत गुड्डू मास्टर हत्याकांड में आया फैसला:हत्या में दो दोषियों को उम्रकैद, दो को आर्म्स एक्ट में सुनाई सजा और साजिश के दोनों आरोपी बरी

Oct 03, 2026 - 19:35
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अलीगढ़ के बहुचिर्चत गुड्डू मास्टर हत्याकांड में आया फैसला:हत्या में दो दोषियों को उम्रकैद, दो को आर्म्स एक्ट में सुनाई सजा और साजिश के दोनों आरोपी बरी
प्रधानी के वर्चस्व की लड़ाई से शुरू हुई रंजिश में 19 दिसंबर 2016 को छर्रा अड्डा पुल पर दिनदहाड़े हुई शिक्षक नेता जितेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू मास्टर की हत्या में करीब 10 साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। अलीगढ़ की चर्चित रंजिशों में शामिल इस हत्याकांड में निशान्त उर्फ कुच्ची और संकेत उर्फ वेदू को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं मौके पर फायरिंग के आरोपी प्रमोद कुमार और रामू ठाकुर को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया, लेकिन आयुध अधिनियम में दोनों को पांच-पांच साल की सजा हुई है। जेल में रहते हुए हत्या की साजिश रचने के आरोपी बनाए गए नीर प्रकाश उर्फ नीरू टाइगर और मुकेश को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। यह फैसला एडीजे-2 तोष कुमार शर्मा की अदालत ने शनिवार को सुनाया। मुकदमे में छह आरोपी ट्रायल पर थे। अदालत के आदेश में संकेत और निशान्त को धारा 302 समेत 147, 148, 149 और 506 भादंसं तथा आयुध अधिनियम की धारा 25/27 के तहत सजा दी गई है। 2010 में अशोक पर चली गोली, यहीं से दोनों परिवारों की दुश्मनी गहरी हुई इस खूनी कहानी की जड़ वर्ष 2010 में जाती है। मूल रूप से अकराबाद के नगरिया पट्‌टी चाहरम निवासी संकेत और निशान्त के पिता अशोक कुमार सिंह पर बीदास कंपाउंड स्थित उनके घर पर गोली चली थी। पुलिस विवेचना के मुताबिक इस घटना के पीछे गांव की प्रधानी को लेकर चल रही रंजिश थी। इस मामले में शिक्षक जितेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू मास्टर और उनके एक साथी को आरोपी बनाया गया था। हालांकि बाद में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में गुड्डू मास्टर और उनके साथी को बरी कर दिया। लेकिन मुकदमा खत्म होने के बावजूद दोनों परिवारों के बीच रंजिश खत्म नहीं हुई। दोनों पक्षों की जड़ें गांव से जुड़ी थीं। गांव की प्रधानी को लेकर दोनों परिवारों में वर्चस्व की लड़ाई थी। उस समय गुड्डू मास्टर की पत्नी लगातार दो पंचवर्षीय कार्यकाल तक प्रधान रही थीं। 2015 में सीट SC हुई तो फिर आमने-सामने आए दोनों पक्ष वर्ष 2015 में ग्राम प्रधान की सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। इसके बाद दोनों पक्षों ने अपने-अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे। गुड्डू मास्टर पक्ष की ओर से हीरा सिंह को प्रत्याशी बनाया गया, जबकि नीर प्रकाश उर्फ नीरू पक्ष की ओर से अलग प्रत्याशी मैदान में था। पुलिस विवेचना के मुताबिक इसी दौरान नीर प्रकाश उर्फ नीरू ने गुड्डू मास्टर पक्ष के प्रत्याशी हीरा सिंह को चुनाव प्रचार से दूर रहने और चुनाव से हटने की कथित धमकी दी। इसके बाद पंचायत चुनाव के प्रचार के दौरान हीरा सिंह की हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड में नीरू और उसके पक्ष के लोगों को नामजद किया गया। पुलिस कार्रवाई के बाद वे जेल भी गए। हीरा सिंह के पैरोकार तोता राम की भी छर्रा अड्डे पर हत्या रंजिश यहीं नहीं रुकी। हीरा सिंह हत्याकांड में पैरोकार तोता राम की भी 2016 में हत्या कर दी गई। तोता राम न्यायालय में हीरा सिंह हत्याकांड की पैरवी करके न्यायालय से गांव लौट रहा था। आरोप के मुताबिक छर्रा अड्डा क्षेत्र में उसकी हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड में गुड्डू मास्टर और उसके साथियों को ही नामजद किया गया। गुड्डू मास्टर पक्ष ने तत्कालीन एसएसपी के सामने पेश होकर घटना के समय अपनी मौजूदगी दूसरी जगह होने की बात कही। पुलिस ने मामले की दोबारा बारीकी से जांच की। विवेचना में गुड्डू मास्टर और उनके साथियों के खिलाफ आरोप सही नहीं पाए गए और उनके नाम मुकदमे से निकाल दिए गए। पुलिस ने तोताराम हत्याकांड की दिशा नीरू टाइगर और उसके समर्थक पक्ष की ओर मोड़ी। उनके खिलाफ चार्जशीट दायर की। यहीं से दोनों पक्षों की दुश्मनी और गहरी हो गई। फिर आया 19 दिसंबर 2016 का दिन, पुल पर बरसाईं गोलियां 19 दिसंबर 2016, सुबह 10:25 बजे। मूल रूप से नगरिया पट्‌टी चाहरम व वर्तमान में एटा चुंगी पर रहने वाले जितेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू मास्टर डीएएस डिग्री कॉलेज के सामने स्थित बैंक से अपना बैंक संबंधी काम निपटाकर स्कूटी से घर लौट रहे थे। उनके पीछे उनके छोटे भाई विशाल सिंह और परिचित यशपाल सिंह बाइक से आ रहे थे। जैसे ही गुड्डू मास्टर छर्रा अड्डा पुल के ऊपर डीएवी इंटर कॉलेज के सामने पहुंचे, आरोप के मुताबिक हमलावरों ने उन्हें घेर लिया और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों से छलनी गुड्डू मास्टर वहीं गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर छह गोली लगने की पुष्टि हुई। चार सिर में, एक बाजू और एक कंधे में। घटना के बाद उनके छोटे भाई विशाल सिंह की तहरीर पर क्वार्सी थाने में संकेत, निशान्त और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने खोली साजिश की परतें, छह आरोपियों के खिलाफ पहुंची चार्जशीट शुरुआती एफआईआर में संकेत और निशान्त समेत तीन अज्ञात आरोपी थे। विवेचना आगे बढ़ी तो पुलिस ने हीरा सिंह हत्याकांड में जेल में बंद नीर प्रकाश उर्फ नीरू और मुकेश को भी मामले में शामिल किया। पुलिस के मुताबिक आरोप था कि जेल से हत्या की साजिश रची गई। घटनास्थल पर फायरिंग करने वालों में पुलिस ने बाद में रामू ठाकुर निवासी गंगचौली हाथरस और प्रमोद कुमार निवासी खिटौली विजयगढ़ को भी आरोपी बनाया। इस तरह कुल छह लोगों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में पहुंचा। विवेचना में पुलिस ने घटनास्थल से जुड़े CCTV फुटेज को अहम साक्ष्य बताया। पुलिस के मुताबिक फुटेज में शूटरों को गुड्डू मास्टर पर फायरिंग करते हुए देखा गया। यही फुटेज मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत में भी पेश किया गया। संकेत ने रखा हाईकोर्ट में होने का बचाव, लेकिन अदालत में साबित नहीं कर पाए मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने संकेत की घटना के समय मौके पर मौजूदगी से इनकार किया। अधिवक्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि घटना के समय संकेत हाईकोर्ट में था। वह जेल में बंद नीरप्रकाश और मुकेश की पैरवी के सिलसिले में हाईकोर्ट गया था। इसके समर्थन में हाईकोर्ट में प्रवेश का आईकार्ड और हाजिरी से संबंधित दस्तावेज होने की बात भी अदालत के सामने रखी गई। हालांकि अदालत के समक्ष यह बचाव अपने पक्ष में साबित नहीं हो सका। इसके बाद अदालत ने संकेत और निशान्त को हत्या समेत संबंधित धाराओं में दोषी माना। नीरू-मुकेश की साजिश नहीं साबित हुई, रामू-प्रमोद को हत्या से राहत नीर प्रकाश उर्फ नीरू और मुकेश के खिलाफ मुख्य आरोप हत्या की साजिश यानी धारा 120बी का था। दोनों के घटना के समय जेल में होने के कारण अभियोजन की कहानी में उनकी भूमिका साजिशकर्ता के रूप में बताई गई थी। लेकिन अदालत में हत्या की साजिश का आरोप साबित नहीं हो सका। दोनों को बरी कर दिया गया। रामू ठाकुर और प्रमोद कुमार पर मौके पर संकेत और निशान्त के साथ फायरिंग करने का आरोप था। अदालत ने हत्या के मामले में उन्हें दोषी नहीं माना। जेल में होने वाली शिनाख्त परेड संबंधी प्रक्रिया को लेकर अभियोजन की कमी भी सामने आई। दोनों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया, लेकिन आयुध अधिनियम की धारा 25 में दोषी मानते हुए पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई। कोर्ट का फैसला: दो को उम्रकैद, दो को पांच साल अदालत ने संकेत उर्फ वेदू और निशान्त उर्फ कुच्ची को धारा 302 भादंसं में आजीवन कारावास और 27-27 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया। प्रमोद कुमार और रामू ठाकुर को आयुध अधिनियम की धारा 25 में पांच-पांच साल का कारावास और तीन-तीन हजार रुपये जुर्माना हुआ। अदालत ने कुल 60 हजार रुपये के अधिरोपित जुर्माने में से आधी राशि मृतक की पत्नी पूनम को और आधी राज्य कोष में जमा करने का आदेश दिया है। दोनों पक्ष फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे वादी पक्ष की अधिवक्ता नीरज चौहान ने कहा कि अभियोजन ने सभी आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य अदालत में रखे थे। चार आरोपियों के बरी होने से वादी पक्ष फैसले से संतुष्ट नहीं है। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता असीम गुप्ता ने कहा कि अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। खासकर संकेत के घटना के समय हाईकोर्ट में होने से संबंधित दस्तावेज अदालत में रखे गए थे। फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात उन्होंने कही। इस तरह करीब एक दशक पहले छर्रा अड्डा पुल पर हुई शिक्षक नेता की हत्या से जुड़ी इस लंबी अदालती लड़ाई में छह आरोपियों में दो को हत्या में उम्रकैद, दो को हत्या के आरोप से राहत के साथ आर्म्स एक्ट में सजा और दो को साक्ष्य के अभाव में बरी किए जाने का फैसला सामने आया है। न्यायालय ने हत्या के मामले में दो को दोषी करार देकर सजा सुनाई है, वहीं दो को आर्म्स एक्ट में सजा सुनाई है और दो को बरी किया गया है।-कु.जीतू वाष्र्णेय एडीजीसी

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