अलीगढ़ के नगला तिकौना में नहीं हुई रामलीला:जमीन विवाद के कारण आयोजकों ने प्रोग्राम कराने से मना किया, 1990 में हुई थी शुरुआत

Oct 11, 2026 - 08:01
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अलीगढ़ के नगला तिकौना में नहीं हुई रामलीला:जमीन विवाद के कारण आयोजकों ने प्रोग्राम कराने से मना किया, 1990 में हुई थी शुरुआत
अलीगढ़ के नगला तिकौना में करीब 35 साल से हो रही रामलीला इस बार नहीं हुई। जमीन के विवाद और मुकदमे के बाद पुराने आयोजकों ने मंचन कराने से दूरी बना ली। उनका कहना है कि जिस रामलीला को स्थानीय लोगों ने चंदा जुटाकर और सहयोग से सालों तक कराया, उसी आयोजन को लेकर उन पर जमीन कब्जाने के आरोप लगाए गए। इससे आहत होकर उन्होंने इस बार रामलीला नहीं कराने का फैसला लिया। नगला तिकौना की रामलीला अलीगढ़ की पुरानी धार्मिक और सामाजिक परंपराओं में शामिल थी। शुरुआत में इसका मंचन चंदनिया में होता था। बाद में नगला तिकौना स्थित श्री राधा-कृष्ण जी महाराज मंदिर ट्रस्ट की जमीन पर रामलीला होने लगी। स्थानीय बुजुर्गों और लोगों ने मिलकर आयोजन की जिम्मेदारी संभाली। परिवारों से चंदा जुटाकर रामलीला कराई जाती थी। धीरे-धीरे यह आयोजन इलाके की पहचान बन गया। जमीन विवाद के बाद दर्ज हुआ मुकदमा आयोजकों के मुताबिक, पिछले साल रामलीला की जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ। एक नए ट्रस्ट ने जमीन पर अपना हक जताया। साथ ही रामलीला कराने वाले लोगों पर जमीन कब्जाने का आरोप लगाया गया। इस मामले में आयोजकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज कराया गया। आयोजकों का कहना है कि पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर मामले को खत्म कर दिया, लेकिन विवाद का असर रामलीला पर पड़ा। पिछले साल दशहरे पर रावण के पुतले का तय समय से पहले दहन किए जाने की घटना भी हुई थी। उस समय किसी तरह आयोजन पूरा हुआ, लेकिन विवाद नहीं सुलझा। इस बार पुराने आयोजकों ने रामलीला कराने से इनकार कर दिया। आयोजन की सूचना प्रशासन को नहीं दी गई और न ही मंचन की अनुमति लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इसके चलते इस बार रामलीला नहीं हो सकी। बाबा के समय से चली आ रही थी परंपरा रामलीला से जुड़े रहे बुजुर्ग हरि सिंह के बेटे प्रेम प्रताप सिंह ने बताया कि उनके बाबा के समय से आयोजन होता आ रहा था। बाद में उनके पिता हरि सिंह और दूसरे लोगों ने इसकी जिम्मेदारी संभाली। शुरुआत में चंदनिया में रामलीला होती थी। इसके बाद नगला तिकौना में मंदिर ट्रस्ट की जमीन पर मंचन शुरू हुआ। प्रेम प्रताप सिंह के मुताबिक, रामलीला कराने के पीछे किसी का निजी स्वार्थ नहीं था। लोग धार्मिक आस्था और आपसी सहयोग से चंदा जुटाकर आयोजन करते थे। लेकिन पिछले साल विवाद और मुकदमे के बाद आयोजक आहत हो गए। उनका कहना है कि इतने साल तक निस्वार्थ भाव से आयोजन कराने के बाद भी जमीन कब्जाने के आरोप लगे, इसलिए उन्होंने इस बार रामलीला नहीं कराने का फैसला किया। जमीन प्रशासन को सौंपने का प्रस्ताव रखेंगे प्रेम प्रताप सिंह ने बताया कि आयोजक जल्द ही जिला प्रशासन या नगर निगम के अधिकारियों से मिलेंगे। वे प्रस्ताव रखेंगे कि जिस जमीन पर रामलीला होती थी, उसे प्रशासन अपने अधीन लेकर सार्वजनिक, सामाजिक या सरकारी काम में इस्तेमाल करे। आयोजकों का कहना है कि वे नहीं चाहते कि जमीन के विवाद का असर धार्मिक आयोजन और आपसी संबंधों पर आगे भी पड़े। अलीगढ़ की प्रमुख रामलीलाओं में थी शामिल अलीगढ़ में अचल सरोवर स्थित अचल ताल और बरौला की रामलीला के साथ नगला तिकौना का आयोजन भी प्रमुख रामलीलाओं में गिना जाता था। आयोजकों के मुताबिक, इसका उल्लेख पुलिस-प्रशासन के रिकॉर्ड में भी था। आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के इंतजाम किए जाते थे। इस बार रामलीला नहीं होने से 35 साल से चली आ रही परंपरा टूट गई। जिन गलियों में हर साल रामलीला की तैयारियां शुरू होते ही चहल-पहल बढ़ जाती थी, वहां इस बार मंचन नहीं हुआ। जमीन का विवाद कानूनी रूप से चाहे जिस नतीजे पर पहुंचे, लेकिन इसका असर इलाके की पुरानी धार्मिक और सामाजिक परंपरा पर पड़ चुका है।

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