अलीगढ़ की आरती की सक्सेस स्टोरी:15 की उम्र में ट्यूशन पढ़ाया, 56 में PhD की; फिर लिखीं 3 किताबें
अलीगढ़ की आरती मित्तल ने 15 साल की उम्र में ट्यूशन पढ़ाने से अपने सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद नौकरी, परिवार की जिम्मेदारियां और कई उतार-चढ़ाव आए। कई बार नौकरी छोड़नी पड़ी, लेकिन सीखने और कुछ नया करने का सिलसिला नहीं रुका। 56 साल की उम्र में उन्होंने पर्यावरण शिक्षा में पीएचडी पूरी की। आरती ने शिक्षा को अपना काम बनाया, पर्यावरण संरक्षण को मिशन और लेखन-संगीत को अपनी रचनात्मकता का जरिया। वर्ष 2000 में उन्होंने एक छोटे से प्ले स्कूल से शुरुआत की थी। आज यही स्कूल सीबीएसई से संबद्ध कक्षा 12 तक के Mothers Touch Senior Secondary School के रूप में संचालित हो रहा है। 2000 में देखा स्कूल का सपना, उसी साल शुरू किया प्ले स्कूल आरती ने 17 जुलाई 2000 को स्कूल शुरू करने का सपना देखा और महज तीन महीने बाद 20 अक्टूबर को Mothers Touch Exclusive Playschool की शुरुआत कर दी। शुरुआत छोटी थी, लेकिन लगातार मेहनत से स्कूल का विस्तार होता गया। आरती के लिए स्कूल सिर्फ बच्चों को पढ़ाने की जगह नहीं रहा। उन्होंने इसे पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े कामों का केंद्र भी बनाया। 4 हजार प्लास्टिक बोतलों से बनाया गार्ड रूम पर्यावरण संरक्षण में आरती ने कई प्रयोग किए। स्कूल को Zero Waste School बनाने की दिशा में काम किया और Pipe Composting व Vermicomposting जैसी तकनीकें अपनाईं। करीब 4 हजार प्लास्टिक बोतलों का इस्तेमाल कर गार्ड रूम तैयार कराया। एक बार इस्तेमाल होने वाले सामान की खपत कम करने के लिए Free Crockery Bank शुरू किया। धार्मिक कचरे के सही तरीके से निस्तारण की पहल भी की। इन कामों के चलते उन्हें अलीगढ़ नगर निगम के स्वच्छ भारत मिशन का ब्रांड एंबेसडर बनने का मौका मिला। पर्यावरण शिक्षा के क्षेत्र में अपने अनुभव को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने 56 साल की उम्र में Environment Education में पीएचडी पूरी की। 52 की उम्र में गीत-भजन लिखना शुरू किया आरती ने 52 साल की उम्र में गीत और भजन लिखना शुरू किया। इसके बाद उन्हें स्वर देने और वीडियो बनाने का काम भी किया। अब तक उनके 37 से ज्यादा स्वरचित गीत उपलब्ध हैं। कोविड के दौरान उन्होंने Motivational Storyteller के तौर पर काम किया और ‘अनमोल रिश्ते’ नाम की किताब लिखी। इसका विमोचन डॉ. किरण बेदी ने किया। गीता के अध्ययन के बाद उन्होंने बच्चों और युवाओं के लिए सरल भाषा में ‘Geeta for Young Minds’ नाम से ऑडियो सीरीज तैयार की। इसके ऑडियो यूट्यूब पर उपलब्ध हैं। इसी नाम से उनकी किताब भी प्रकाशन की प्रक्रिया में है। पर्यावरण से जुड़े अनुभवों पर उन्होंने ‘मैं हूं कचरा, धरती की पीर’ किताब लिखी है, जो प्रकाशन के अंतिम चरण में है। वहीं ‘सनातन धर्म, आस्था से विज्ञान तक’ किताब का विमोचन पूज्य नृत्य गोपाल दास ने किया। पिता से अनुशासन और मां से मिली मेहनत की सीख आरती मूल रूप से अलीगढ़ की रहने वाली हैं। उनके पिता स्वर्गीय योगेंद्र पाल मैंगी लॉक और हार्डवेयर की फैक्ट्री चलाते थे। वह अनुशासन और सिद्धांतों को बहुत महत्व देते थे। जीवन के अंतिम समय में उन्होंने देहदान का संकल्प लिया था। उनकी मां त्रिप्ता मैंगी गृहिणी थीं। घर संभालने के साथ वह फैक्ट्री के काम में भी पति का हाथ बंटाती थीं। आरती का कहना है कि पिता से उन्हें अनुशासन और मां से मेहनत करने की सीख मिली। आरती की शुरुआती पढ़ाई Lady Fatima School, Blue Bird School और Abdullah Girls College में हुई। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से स्नातक और B.Ed. किया। शादी के बाद D.S. Degree College, Aligarh से M.Sc. की। पढ़ाई जारी रखने की इच्छा ने उन्हें 56 साल की उम्र में पीएचडी तक पहुंचाया। परिवार भी अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय आरती का विवाह इंजीनियर समर्थ मित्तल से हुआ। उनके ससुराल परिवार में भी स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक मूल्यों की विरासत रही है। उनके पति के दादा स्वतंत्रता सेनानी थे। उनकी बेटी आश्ना मित्तल ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में आर्किटेक्ट हैं, जबकि बेटा सक्षम मित्तल अपना व्यवसाय संभाल रहे हैं। आरती का मानना- उम्र सीखने में बाधा नहीं आरती के लिए कोई उपलब्धि सफर का अंतिम पड़ाव नहीं है। उन्हें पेंटिंग, अलग-अलग कला रूपों को सीखना, यात्रा करना और दूसरी संस्कृतियों को समझना पसंद है। फिलहाल वह Tarot Card Reading भी सीख रही हैं। उनकी जीवन-दृष्टि चार शब्दों पर टिकी है- Devotion, Dedication, Discipline और Determination। उनका मानना है कि उम्र सीखने की राह में बाधा नहीं है। अनुभव के साथ इंसान खुद को नई दिशा दे सकता है। उनके लिए पढ़ना पूजा है, कर्म धर्म है और लगातार सीखते रहना, कुछ नया रचना और समाज के लिए काम करना ही जीवन का उद्देश्य है।
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