अलीगढ़ में सामूहिक दुष्कर्म में चार दोषियों को उम्रकैद:12 वर्ष पुराने सनसनीखेज अपराध में कोर्ट का फैसला, 2.52 लाख रुपये अर्थदंड भी तय किया

Sep 28, 2026 - 19:37
0
अलीगढ़ में सामूहिक दुष्कर्म में चार दोषियों को उम्रकैद:12 वर्ष पुराने सनसनीखेज अपराध में कोर्ट का फैसला, 2.52 लाख रुपये अर्थदंड भी तय किया
अलीगढ़ में सामूहिक दुष्कर्म में चार दोषियों को उम्रकैद: SC/ST कोर्ट ने सुनाई सजा, कुल 2.52 लाख रुपए जुर्माना अलीगढ़ के पालीमुकीमपुर थाना क्षेत्र में करीब 12 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने के मामले में एससी/एसटी एक्ट की विशेष अदालत ने चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए शेष प्राकृतिक जीवन तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने चारों दोषियों पर अलग-अलग धाराओं में कुल 2.52 लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि पीड़िता को नियमानुसार दिलाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष न्यायाधीश प्रतिभा सक्सेना-II ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। दोषी ठहराए गए आरोपियों में मनीष कुमार, सचिन, अंजू और विजय शामिल हैं। कब्रिस्तान के पास कंडे पाथने गई थी पीड़िता, चारों पर जबरन ले जाने का आरोप अभियोजन पक्ष से विशेष अभियोजन अधिकारी सत्यानंद सिंह के अनुसार, 15 नवंबर 2014 की शाम करीब पांच बजे पीड़िता गांव के बाहर कब्रिस्तान के पास कंडे पाथने गई थी। आरोप था कि वहां मनीष, सचिन, अंजू और विजय उसे जबरन कब्रिस्तान की ओर ले गए। पीड़िता के बयान के मुताबिक, वहां विजय ने उसके साथ दुष्कर्म किया, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका भी घटना में बताई गई। जातिसूचक शब्द कहने और घटना किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था। शुरुआत में मुकदमा मारपीट, गाली-गलौज, छेड़खानी और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में दर्ज हुआ था। विवेचना के दौरान दुष्कर्म की धारा भी जोड़ी गई और चारों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय भेजे गए। न्यायालय में अगस्त 2015 में चारों आरोपियों पर आरोप तय किए गए। मामले में वादी, पीड़िता, एफआईआर लेखक, चिकित्सक, विवेचक और एक तथ्य साक्षी समेत छह गवाहों के बयान दर्ज किए गए। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को दोषसिद्ध कर दिया। कोर्ट ने कहा- अपराध की गंभीरता के आगे पारिवारिक परिस्थितियां पर्याप्त नहीं सजा पर सुनवाई के दौरान चारों आरोपियों की ओर से उनकी उम्र, परिवार की जिम्मेदारियां, आर्थिक स्थिति और पूर्व आपराधिक इतिहास न होने का हवाला देते हुए कम से कम सजा देने की मांग की गई। अभियोजन ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम दंड की मांग की। अदालत ने कहा कि दोषियों की व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियां दंड निर्धारण में विचारणीय हैं, लेकिन उन्हें अपराध की प्रकृति, गंभीरता और पीड़िता के विरुद्ध किए गए कृत्य से अलग करके नहीं देखा जा सकता। अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म को गंभीर अपराध मानते हुए चारों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का औचित्य नहीं माना। चारों को किन धाराओं में कितनी सजा कोर्ट ने दुष्कर्म में शेष प्राकृतिक जीवन तक सश्रम आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं अन्य आरोपों में सजा के साथ-साथ 13-13 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। इस तरह चारों पर कुल 2.52 लाख रुपये अर्थदंड तय किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग धाराओं में दी गई कैद की सजाएं अर्थदंड को छोड़कर साथ-साथ चलेंगी। पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। अर्थदंड जमा नहीं करने पर अलग से अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने दोषियों का सजायाबी वारंट तैयार कर जिला कारागार भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निर्णय की प्रति जिला मजिस्ट्रेट, अलीगढ़ को भेजने और अर्थदंड की राशि पीड़िता को नियमानुसार उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User