अलीगढ़ में टिकट की सियासत शुरू:गठबंधन बदल सकता है 4 सीटों का गणित; खैर-इगलास पर रालोद, शहर-कोल पर कांग्रेस की नजर

Sep 15, 2026 - 16:07
0
अलीगढ़ में टिकट की सियासत शुरू:गठबंधन बदल सकता है 4 सीटों का गणित; खैर-इगलास पर रालोद, शहर-कोल पर कांग्रेस की नजर
विधानसभा चुनाव की रणभेरी अभी दूर है, लेकिन अलीगढ़ में टिकट की सियासत शुरू हो गई है। भाजपा-रालोद और सपा-कांग्रेस में सीटों का बंटवारा अभी तय नहीं हुआ, मगर संभावित दावेदारों ने अपनी-अपनी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। जिले की सातों सीटें फिलहाल भाजपा के पास हैं, लेकिन गठबंधन का गणित इनमें से चार सीटों पर सियासी तस्वीर बदल सकता है। अलीगढ़ का जाटलैंड कहे जाने वाले खैर और इगलास पर रालोद की नजर है। 2012 में दोनों सीटों पर रालोद का कब्जा रहा था। यही पुराना प्रदर्शन पार्टी के दावे का सबसे बड़ा आधार है। गठबंधन में रालोद इन दोनों सीटों को अपने खाते में लेने की कोशिश कर सकती है। दोनों सीटें मिलेंगी या एक पर होगा समझौता? रालोद की दावेदारी मजबूत है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा दोनों सीटें छोड़ेगी या सिर्फ एक पर समझौता होगा? यदि एक सीट पर सहमति बनती है तो दूसरी सीट के लिए भाजपा के दावेदारों की दौड़ तेज होगी। यही वजह है कि दोनों दलों के संभावित प्रत्याशी अभी से सक्रिय हैं। शहर-कोल: कांग्रेस की नजर, सपा का पुराना रिकॉर्ड सपा-कांग्रेस गठबंधन में शहर और कोल सीट चर्चा के केंद्र में हैं। कांग्रेस इन दोनों में अपनी हिस्सेदारी चाहती है। कांग्रेस के लिए शहर का पुराना रिकॉर्ड भी उम्मीद बढ़ाता है। 2002 में शहर सीट कांग्रेस के कब्जे में थी। वहीं 2012 में सपा ने शहर और कोल दोनों सीटें जीती थीं। इतिहास बनाम मौजूदा सियासी जमीन सीट बंटवारे में सिर्फ पुराने चुनावी नतीजे ही निर्णायक नहीं होंगे। जातीय समीकरण, संगठन की ताकत, पिछले चुनाव का प्रदर्शन और स्थानीय दावेदारों की स्वीकार्यता भी बातचीत की मेज पर अहम होगी। यही कारण है कि संभावित प्रत्याशी अभी से अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। चार सीटों पर सस्पेंस, फैसला गठबंधन की चौखट पर अलीगढ़ में फिलहाल सबसे ज्यादा उत्सुकता खैर-इगलास और शहर-कोल को लेकर है। भाजपा-रालोद में कौन सी सीट किसके हिस्से आएगी और सपा-कांग्रेस में किस दल को बढ़त मिलेगी, इस पर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग गणित लगाए जा रहे हैं। यानी अभी टिकट बंटे नहीं हैं, लेकिन टिकट की दौड़ शुरू हो चुकी है। गठबंधन की सीट शेयरिंग जैसे ही सामने आएगी, अलीगढ़ की इन चार सीटों पर कई दावेदारों की उम्मीदें बनेंगी और कई समीकरण उसी वक्त धराशायी भी होंगे। 5 पॉइंट्स में अलीगढ़ का सियासी समीकरण 1. सातों सीट भाजपा के पास, फिर भी गठबंधन से बदलेगा गणित अलीगढ़ की सभी 7 विधानसभा सीटें फिलहाल भाजपा के कब्जे में हैं। ऐसे में भाजपा-रालोद गठबंधन में सीटों का बंटवारा जिले की मौजूदा तस्वीर को बदल सकता है। 2. खैर-इगलास पर रालोद की नजर जाट बहुल बेल्ट मानी जाने वाली खैर और इगलास पर रालोद का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है। 2012 में दोनों सीटें रालोद के पास थीं, इसलिए पार्टी पुराने प्रदर्शन को आधार बना रही है। 3. असली पेच—रालोद को दोनों सीटें या सिर्फ एक? राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा रालोद को खैर-इगलास दोनों सीटें देगी या इनमें से किसी एक पर ही समझौता होगा। दोनों सीटों पर रालोद और भाजपा के संभावित दावेदार अपनी तैयारी में जुटे हैं। 4. शहर-कोल में सपा-कांग्रेस के बीच सीट की खींचतान सपा-कांग्रेस गठबंधन में शहर और कोल सीट पर कांग्रेस की दावेदारी चर्चा में है। 2002 में शहर कांग्रेस के पास थी, जबकि 2012 में शहर और कोल दोनों सीटें सपा ने जीती थीं। इसलिए पुराने नतीजे दोनों दल अपने-अपने पक्ष में रख रहे हैं। 5. टिकट से पहले दावेदारों की दौड़ शुरू गठबंधन और सीटों का बंटवारा अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन संभावित प्रत्याशियों ने जनसंपर्क और राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। अब अलीगढ़ में नजर इस पर है कि भाजपा-रालोद में खैर-इगलास का फार्मूला क्या बनता है और सपा-कांग्रेस में शहर-कोल की बाजी किसके हाथ आती है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User