AMU में छात्रसंघ चुनाव की बिसात तैयार:5 लॉबियों में दावेदारों की तलाश, गठजोड़ से तय होंगे समीकरण

Oct 12, 2026 - 12:18
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AMU में छात्रसंघ चुनाव की बिसात तैयार:5 लॉबियों में दावेदारों की तलाश, गठजोड़ से तय होंगे समीकरण
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में छात्रसंघ चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अभी प्रत्याशियों के नाम सामने नहीं आए हैं, लेकिन कैंपस में अलग-अलग क्षेत्रीय लॉबियों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। अध्यक्ष, सचिव और उपाध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की तलाश चल रही है। किसे टिकट मिलेगा और किस लॉबी का किसे समर्थन रहेगा, इस पर अंदरखाने बातचीत शुरू हो गई है। चुनाव में प्रत्याशी की क्षेत्रीय पहचान के साथ उसकी फैकल्टी और छात्रावासों में पकड़ भी अहम मानी जाती है। कई बार दो लॉबियां आपस में समझौता कर अलग-अलग पदों पर अपने प्रत्याशी उतारती हैं। एक लॉबी अध्यक्ष पद पर दूसरे का समर्थन कर सकती है तो दूसरी सचिव पद पर उसके प्रत्याशी के साथ खड़ी हो सकती है। चुनावी जानकारों के मुताबिक 15-16 अक्टूबर तक संभावित प्रत्याशियों के नाम सामने आने शुरू हो सकते हैं। फिलहाल अध्यक्ष पद के लिए 4-5 और सचिव व उपाध्यक्ष पद के लिए 3-4 दावेदारों की चर्चा है। 5 प्रमुख लॉबियों के बीच मुकाबला AMU की छात्र राजनीति में पश्चिमी यूपी, आजमगढ़, GBS, बिहार-बंगाल और अलीगढ़ की स्थानीय लॉबी को प्रमुख माना जाता है। पश्चिमी यूपी लॉबी में सहारनपुर, मुरादाबाद, संभल और आसपास के जिलों के छात्र शामिल माने जाते हैं। आजमगढ़ लॉबी में आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर क्षेत्र के छात्रों का प्रभाव बताया जाता है। गोंडा, बस्ती और सिद्धार्थनगर क्षेत्र से जुड़े छात्रों के समूह को GBS लॉबी कहा जाता है। इसके अलावा बिहार-बंगाल और अलीगढ़ के स्थानीय छात्रों के समूह भी चुनाव में सक्रिय रहते हैं। AMU छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष सैयद माजिन जैदी के अनुसार पुराने चुनावों में अध्यक्ष पद पर बिहार, सचिव पद पर आजमगढ़ और उपाध्यक्ष पद पर पश्चिमी यूपी के समूह की दावेदारी का रुझान रहा है। हालांकि यह कोई तय नियम नहीं है। हर चुनाव में प्रत्याशी और गठबंधन बदल सकते हैं। इंजीनियरिंग फैकल्टी के वोट अहम चुनाव में फैकल्टी के वोटों का गणित भी महत्वपूर्ण रहेगा। इंजीनियरिंग फैकल्टी में सबसे ज्यादा वोटर होने की बात कही जाती है। इसलिए लॉबियां यहां से मजबूत प्रत्याशी तलाशने पर जोर देती हैं। मेडिकल और आर्ट्स फैकल्टी के वोट भी अहम माने जाते हैं। लॉबियों की कोशिश रहती है कि उनका प्रत्याशी सिर्फ क्षेत्रीय समर्थन के भरोसे न रहे, बल्कि अलग-अलग फैकल्टी के छात्रों के बीच भी उसकी पकड़ हो। अध्यक्ष बिहार से तो सचिव आजमगढ़ से? चुनाव में पदवार समझौते की भी संभावना रहती है। उदाहरण के तौर पर अगर अध्यक्ष पद पर बिहार लॉबी का प्रत्याशी है और सचिव पद पर आजमगढ़ लॉबी का उम्मीदवार है तो दोनों समूह एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं। ऐसे समझौते में अध्यक्ष पद के लिए एक समूह और सचिव पद के लिए दूसरा समूह अपने समर्थकों से वोट की अपील कर सकता है। हालांकि ये समझौते हमेशा सार्वजनिक नहीं होते और उम्मीदवारों की स्थिति के हिसाब से आखिरी समय में समीकरण बदल सकते हैं। छात्राओं की दावेदारी भी चर्चा में इस बार छात्राओं की मुख्य छात्रसंघ चुनाव में दावेदारी भी चर्चा में है। कुछ छात्राओं का कहना है कि जब AMU की कुलपति महिला हो सकती हैं तो छात्रसंघ के प्रमुख पदों पर छात्राओं को भी चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए। वीमेंस कॉलेज की अपनी छात्रसंघ व्यवस्था है। अब कुछ छात्राएं मुख्य छात्रसंघ में भी चुनाव लड़ने की बात कर रही हैं। फिलहाल उनके नाम और उम्मीदवारी साफ नहीं हैं। अगर छात्राएं मैदान में उतरती हैं तो चुनाव में महिला भागीदारी भी बड़ा मुद्दा बन सकती है। पुलिस की भी रहेगी नजर छात्रसंघ बहाली और चुनाव की मांग को लेकर हाल में कैंपस में प्रदर्शन हुए थे। इस दौरान विवाद और मारपीट से जुड़े मामलों में एफआईआर भी दर्ज हुई हैं। अब चुनावी गतिविधियां बढ़ने के साथ पुलिस की निगरानी भी बढ़ सकती है। कैंपस के प्रमुख गेट और आसपास के रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के साथ देर शाम की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कौन-सी लॉबी किस पद पर प्रत्याशी उतारती है और किसके साथ चुनावी समझौता करती है। संभावित प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद AMU छात्रसंघ चुनाव की तस्वीर और साफ होगी।

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