अनिरुद्धाचार्य बोले- किसी की मौत के लिए संत जिम्मेदार नहीं:कोई खुद जज न बने, प्रेमानंद महाराज के शिष्य ने चौथी मंजिल से कूदकर जान दी थी
संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत के मामले में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज का बयान सामने आया है। व्यास पीठ से उन्होंने मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि संत प्रेमानंद महाराज कितने बड़े संत और भगवत भक्त हैं, यह सभी जानते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग टीआरपी के लिए बिना पूरी जानकारी के बातें करते हैं और खुद ही आरोपी तय कर न्याय करने लगते हैं। अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि कुछ लोग मामले के बारे में जानते और समझते कुछ नहीं, लेकिन जज बनकर न्याय करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज रोज प्रवचन करते हैं और करोड़ों लोगों को भक्ति से जोड़ चुके हैं। इसके बावजूद उनके बारे में उल्टी-सीधी बातें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि समाज में संतों को लेकर बेवजह की बातें नहीं होनी चाहिए। रसिक दुलारी शरण के कूदने की CCTV देखिए- ‘कांटों के बीच ही गुलाब को रहना है’ अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि संतों को भी इसी समाज के बीच रहना है। उन्होंने प्रेमानंद महाराज का जिक्र करते हुए कहा कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद वह लोगों से मिलते हैं और उनकी बातें सुनते हैं। उन्होंने कहा कि संत चाहें तो एकांत में रह सकते हैं, लेकिन लोगों के सुख के लिए उनसे मिलते हैं और उन्हें भगवान की भक्ति से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा, ‘कांटों के बीच ही गुलाब को रहना है।’ ‘किसी की मृत्यु हुई तो इसमें संतों का क्या दोष?’ रसिक दुलारी शरण की मौत का जिक्र करते हुए अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के लिए संतों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मृत्यु इस संसार का सत्य है और हर व्यक्ति को एक दिन जाना है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति भगवान का नाम लेता है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह अमर हो गया। ‘दोषी है तो दोषी कहो, निर्दोष है तो क्यों दोषी बता रहे’ अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ ठोस तथ्य हैं तो उसे दोषी बताया जाना चाहिए, लेकिन बिना जानकारी किसी को दोषी ठहराना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि मीडिया को किसी मामले में खुद जज बनकर फैसला नहीं करना चाहिए। उन्होंने लोगों से संतों के प्रति श्रद्धा रखने और बिना वजह किसी को परेशान नहीं करने की अपील की। ‘भक्ति करने का मतलब अमर होना नहीं’ उन्होंने कहा कि लोग यह सवाल कर रहे हैं कि जब रसिक दुलारी शरण भगवान का नाम लेते थे तो उनकी मृत्यु कैसे हुई। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह धरती मृत्यु लोक है और यहां हर व्यक्ति को आना-जाना है। उन्होंने कहा कि वह खुद भी भगवान का नाम लेते हैं और संत भी भगवान का नाम लेते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि कोई अमर हो जाता है। सभी को एक दिन मृत्यु का सामना करना पड़ता है। …………………………………… संबंधित ये खबर भी पढ़ें मां बोलीं- 2 साल से बेटे का चेहरा नहीं देखा:मथुरा में रसिक दुलारी की मौत; भाई बोला- सेना में जाना चाहता था, भक्ति की राह पर चला गया संत प्रेमानंद महाराज के साधक रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के मामले में परिवार ने कई सवाल उठाए हैं। परिवार का कहना है कि दीपक आत्महत्या नहीं कर सकता था। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पूरी खबर पढ़ें
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