अंतिम-विदाई से पिंडदान तक; काशी के कबीर ने निभाया साथ:अमन ने पंचगंगा घाट पर किया 52 लावारिसों का तीर्थ श्राद्ध, विदेशी भी शामिल

Oct 07, 2026 - 17:00
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अंतिम-विदाई से पिंडदान तक; काशी के कबीर ने निभाया साथ:अमन ने पंचगंगा घाट पर किया 52 लावारिसों का तीर्थ श्राद्ध, विदेशी भी शामिल
वाराणसी में इस समय लोग अपने पितरों का श्राद्ध करने के ले उमड़ रहे हैं। इसी क्रम में काशी के पंचगंगा तीर्थ पर काशी के कबीर; अमन ने लावारिसों का श्राद्ध कराया। काशी में लावारिसों के लिए हर समय मौजूद रहने वाले अमन कबीर ने एक साल में 52 लावारिसों की अंतिम क्रिया कराई थी। और आज उन सभी का तीर्थ श्राद्ध और पिंडदान किया। ये वही लोग थे, जिनका सालभर पहले अंतिम संस्कार तो हुआ, लेकिन अंतिम समय में अपना कहने वाला कोई साथ खड़ा नहीं था। अमन कबीर सेवा न्यास ने परिवार की भूमिका निभाते हुए उनके अंतिम संस्कार से लेकर पिंडदान तक की जिम्मेदारी निभाई। देखें तस्वीरें… 52 मृत आत्माओं का हुआ श्राद्ध इस संबंध में अमन कबीर ने बताया - बुधवार को अमन कबीर सेवा न्यास के नेतृत्व में पितृपक्ष के दौरान पंचगंगा घाट किनारे 52 दिवंगत आत्माओं के लिए श्राद्ध और पिंडदान कराया गया। पूरे वर्ष न्यास की ओर से जिन ज्ञात-अज्ञात, लावारिस, अनाथ और दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों का अंतिम संस्कार किया गया था, उनके लिए यह धार्मिक कर्मकांड संपन्न कराया गया। श्राद्ध कर्म पंडित वेद आशीष महाराज ने हिंदू परंपरा के अनुसार विधि-विधान से कराया। कराया पिंडदान अमन कबीर ने कहा कि जिन लोगों के अंतिम समय में कोई अपना उनके साथ खड़ा नहीं हुआ, उनके लिए काशी में कोई तो अपना होना चाहिए। उनका प्रयास है कि मृत्यु के बाद भी किसी व्यक्ति को लावारिस न कहलाना पड़े। इसी भावना के साथ न्यास ऐसे दिवंगतों का अंतिम संस्कार करने के बाद पितृपक्ष में उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान भी करता है। पिंडदान और तर्पण को माना गया महत्वपूर्ण अमन कबीर ने बताया - धार्मिक मान्यता में मृत आत्माओं की शांति के लिए पिंड कर्म और तर्पण को महत्वपूर्ण माना गया है। पितृपक्ष को दिवंगतों के इन धार्मिक संस्कारों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त पखवाड़ा माना जाता है। उनका कहना है कि मान्यता के अनुसार जिन लोगों की अकाल या कठिन परिस्थितियों में मृत्यु होती है अथवा मृत्यु के बाद जिनका पिंड कर्म और तर्पण नहीं हो पाता, उनकी आत्मा की शांति के लिए इन संस्कारों का महत्व माना गया है। इसी मान्यता के तहत न्यास इन दिवंगतों के लिए तर्पण और पिंड कर्म करता है।

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