अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी वर्ष का शुभारंभ:मिर्जापुर विहिप कार्यालय पर सुंदरकांड पाठ, कार्यकर्ताओं ने लिया संकल्प
मिर्जापुर। विश्व हिंदू परिषद की ओर से रविवार को नगर के इमलहा नाथ महादेव मंदिर, दक्षिण फाटक लालडिग्गी स्थित कार्यालय में सुंदरकांड पाठ के साथ अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी वर्ष कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र सत्संग प्रमुख दिवाकर ने कहा कि अशोक सिंघल के पावन सानिध्य में दो दशक तक रहने और उनके वैचारिक कार्यों में सहयोगी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। उनके व्यक्तित्व का समग्र मूल्यांकन किसी एक संगठन, संस्था अथवा आंदोलन की सीमा में संभव नहीं है। हिंदू जीवन मूल्यों, सनातन आदर्शों और आध्यात्मिक चेतना की व्यापक परिधि में उनका व्यक्तित्व सागर की तरह गहरा और विस्तृत था।
उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल संस्था, संगठन, जाति अथवा वर्ग के भेद से ऊपर उठकर समाज के हर वर्ग के सुख-दुःख में खड़े रहते थे। किसी संत-महात्मा या हिंदू समाज के किसी भी वर्ग की समस्या को वह अपनी समस्या मानकर उसके समाधान के लिए तत्पर रहते थे। उनका यह भाव भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि विदेशों में रहने वाले संतों और हिंदू समाज के लोगों के प्रति भी वे समान रूप से संवेदनशील रहे। दिवाकर ने कहा कि अशोक सिंघल के व्यक्तित्व में आध्यात्मिक साधना और सहज लोक व्यवहार का अद्भुत संगम था। वे विद्वानों से लेकर सामान्य जन तक उनकी समझ के अनुरूप संवाद स्थापित करते थे। उनकी जनमानस की गहरी समझ ने उन्हें राष्ट्रव्यापी आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला नेतृत्व प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने हिंदू समाज में स्वाभिमान और गौरव की भावना को मजबूत करने तथा समाज को एक सूत्र में जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। वैचारिक मतभेदों के बावजूद विभिन्न वर्गों में उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा रही। कार्यक्रम में नगर अध्यक्ष राज माहेश्वरी मुख्य यजमान रहे। सुंदरकांड पाठ के दौरान कार्यकर्ताओं ने श्रद्धेय अशोक सिंघल को स्मरण करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और मातृ शक्ति के प्रांत, विभाग, जिला व प्रखंड स्तर के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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