अयोध्या के रावत मंदिर में गद्दी को लेकर विवाद:दो संतों ने महंत बालक दास पर लगाए आरोप, पुलिस कार्रवाई पर सवाल

Oct 11, 2026 - 13:01
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अयोध्या के रावत मंदिर में गद्दी को लेकर विवाद:दो संतों ने महंत बालक दास पर लगाए आरोप, पुलिस कार्रवाई पर सवाल
अयोध्या के रामघाट स्थित रावत मंदिर में पूर्व महंत राममिलन दास के निधन के बाद मंदिर की गद्दी को लेकर विवाद सामने आया है। मंदिर में रहने वाले पवन कुमार दास और उप महंत अमन अयोध्या दास ने महंत बालक दास पर कई आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मंदिर के उत्तराधिकार को लेकर विवाद हुआ और 6 अक्टूबर 2026 को पुलिस बुलाकर उन्हें मंदिर से बाहर निकलवा दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। महंत बालक दास और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। 2022 में वसीयतनामा तैयार कराने का आरोप पवन कुमार दास का कहना है कि वह वर्ष 2012 से मंदिर में रह रहे हैं। पवन कुमार दास और अमन अयोध्या दास का आरोप है कि बालक दास वर्ष 2022 में मंदिर आए थे। इसके बाद उन्होंने पूर्व महंत राममिलन दास को गुमराह कर वसीयतनामा तैयार कराया। हालांकि, वसीयतनामे की वास्तविकता और उसकी वैधता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मंदिर की गद्दी पर किसका अधिकार है, यह दस्तावेजों और संबंधित तथ्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुराने आदेश के बाद कार्रवाई पर सवाल मामले में 16 अक्टूबर 2025 को RM अयोध्या की ओर से जारी आदेश का भी जिक्र किया गया है। बताया गया है कि आदेश में मंदिर पर बालक दास, पवन कुमार दास और अन्य संबंधित लोगों का वास्तविक कब्जा होने की बात कही गई थी। साथ ही, उनके बीच विवाद नहीं होने के आधार पर कुर्की का आदेश वापस ले लिया गया था। पवन कुमार दास और अमन अयोध्या दास का आरोप है कि 6 अक्टूबर 2026 को बालक दास ने पुलिस बुलाकर उन्हें मंदिर से बाहर निकलवा दिया। उनका सवाल है कि यह कार्रवाई किस आदेश के आधार पर की गई। इस संबंध में किसी नए आदेश, नोटिस या सुनवाई का मौका दिए जाने की जानकारी स्पष्ट नहीं है। पुलिस कार्रवाई के बाद कोतवाली ले जाने का आरोप दोनों संतों का कहना है कि मंदिर से बाहर निकाले जाने के बाद उन्हें कोतवाली ले जाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ शांति भंग की आशंका में कार्रवाई की गई। शिकायत में पुराने कानून की धारा 151 के तहत चालान किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, संबंधित पुलिस रिकॉर्ड के बिना कार्रवाई की कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है। अमन अयोध्या दास ने आरोप लगाया कि जब वह स्कूल से लौटे तो उनकी गाड़ी की चाबी छीन ली गई। उनका सामान बाहर फेंक दिया गया और उन्हें रायगंज चौकी ले जाया गया। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच से स्पष्ट होगी मंदिर की गद्दी की स्थिति इस विवाद में अब कई सवाल उठ रहे हैं। कथित वसीयतनामा कब और किन परिस्थितियों में तैयार किया गया? क्या उसकी वैधता की जांच होगी? 6 अक्टूबर को मंदिर से लोगों को बाहर निकालने के लिए कोई नया आदेश जारी हुआ था या नहीं? क्या संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया गया? इन सवालों के जवाब संबंधित दस्तावेजों, प्रशासनिक आदेशों और पुलिस रिकॉर्ड की जांच से ही मिल सकेंगे। फिलहाल महंत बालक दास और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।

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