अयोध्या में नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा:मंदिरों और पंडालों में गूंजे जयकारे, त्याग, संयम और साधना की प्रतीक हैं

Oct 12, 2026 - 12:01
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अयोध्या में नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा:मंदिरों और पंडालों में गूंजे जयकारे, त्याग, संयम और साधना की प्रतीक हैं
शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन सोमवार को अयोध्या में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही देवी मंदिरों में भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई। मंदिरों और दुर्गा पूजा पंडालों में विधि-विधान से मां के दूसरे स्वरूप की पूजा की गई। घंटा-घड़ियाल की ध्वनि और माता रानी के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। रुदौली क्षेत्र के कामाख्या धाम, आदिशक्ति माता दुर्गा मंदिर और उसरहन भवानी मंदिर समेत विभिन्न देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। इसके अलावा कुमारगंज, अमरगंज, पूरबगांव, सिधौना, सिधारी बाजार, खंडासा, रमेशनगर, धरमगंज, पलिया चौराहा, शुकुलपुर, सैदपुर, मवई, बाबा बाजार, पटरंगा, रुदौली, सोहावल और पंडितपुर समेत अन्य क्षेत्रों में भी मंदिरों और पूजा पंडालों में मां की आराधना की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में नवरात्र को लेकर विशेष उत्साह नजर आया। भक्तों ने पूजा सामग्री, पुष्प और प्रसाद अर्पित कर माता रानी से आशीर्वाद मांगा। तप, त्याग और संयम की प्रतीक हैं मां ब्रह्मचारिणी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, त्याग, संयम और साधना का प्रतीक है। माता का स्वरूप अत्यंत शांत, निर्मल और दिव्य माना जाता है। वह श्वेत वस्त्र धारण किए रहती हैं। उनके एक हाथ में जल से भरा कमंडल और दूसरे हाथ में रुद्राक्ष की माला सुशोभित होती है। उनका यह स्वरूप भक्तों को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने और अपने कर्तव्य पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी के ध्यान और मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक उनकी आराधना करने से व्यक्ति में ज्ञान, आत्मबल, संयम और वैराग्य की भावना विकसित होती है। मां की उपासना भक्तों को जीवन में आने वाली कठिनाइयों का धैर्यपूर्वक सामना करने तथा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश देती है। इसी आस्था और विश्वास के साथ अयोध्या के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालु मां ब्रह्मचारिणी की आराधना में लीन रहे।

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