बैच नंबर मिटाकर बाजार में खपाते थे कोडीन सिरप:प्रयागराज में पकड़े गए तीन लोगों से पूछताछ में खुलासा, 95 खाली बोरियों संग 2 ग्राइंडर भी मिले
प्रयागराज में करीब एक करोड़ की कोडीनयुक्त कफ सिरप की बरामदगी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि पकड़ा गया मुख्य आरोपी आशुतोष तिवारी उर्फ प्रवेश तिवारी दिल्ली में बनाई गई अपनी फर्म के जरिए कोडीन सिरप मंगाता था। इसके बाद किराये के मकान में सिरप की बोतलों के बैच नंबर ग्राइंडर मशीन से मिटाए जाते थे। बैच नंबर मिटाने के बाद बोतलों को सफेद बोरियों में भरकर मेडिकल स्टोरों तक सप्लाई किया जाता था।
एसटीएफ ने 27 सितंबर की रात एयरपोर्ट क्षेत्र के कटहुला गौसपुर स्थित मकान से आशुतोष तिवारी उर्फ प्रवेश तिवारी, अंकेश कुमार प्रजापति और अमित कुमार प्रजापति को गिरफ्तार किया था। मौके से ONEREX कोडीन कफ सिरप की 19,388 बोतलें, 61,600 अलग-अलग नाम की जेनरिक टैबलेट, 95 खाली बोरियां, दो DIE GRINDER मशीन और टाटा नेक्सन कार बरामद हुई थी।
दिल्ली की फर्म के नाम पर मंगाता था सिरप
पुलिस के अनुसार, आशुतोष ने पूछताछ में बताया कि उसने दिल्ली में जतिन मिश्रा उर्फ शिवम मिश्रा के साथ NOVOTRIX LIFESCIENCES नाम से फर्म बनाई थी। इसी फर्म के नाम पर हिमाचल प्रदेश की कंपनी से कोडीनयुक्त कफ सिरप मंगाया जाता था। पुलिस का दावा है कि प्रयागराज और वाराणसी की फर्मों के नाम पर फर्जी कागज और बिल्टी तैयार कर ट्रांसपोर्ट के जरिए सिरप मंगाने की बात भी सामने आई है।
सिरप आने के बाद उसे प्रयागराज के कटहुला गौसपुर स्थित किराये के मकान में डंप किया जाता था। पूछताछ में आशुतोष ने मकान का किराया 12 हजार रुपये महीना बताया है।
सोर्स न पता चल सके, इसलिए करते थे खेल
पूरे मामले में सबसे अहम बात सिरप की बोतलों के बैच नंबर मिटाने की सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, मकान में आशुतोष के साथ रहने वाले अंकेश और अमित गत्तों से सिरप की बोतलें निकालते थे। इसके बाद ग्राइंडर मशीन से बोतलों पर दर्ज बैच नंबर मिटाया जाता था।
बैच नंबर मिटाने के बाद बोतलों को दूसरी बोरियों में भर दिया जाता था। पूछताछ में आशुतोष ने पुलिस को बताया कि बैच नंबर इसलिए मिटाया जाता था, ताकि सिरप के स्रोत का पता न चल सके। मौके से इसी काम में इस्तेमाल होने वाली दो DIE GRINDER मशीन और 95 खाली बोरियां भी मिली हैं।
12 हजार में खरीद, 18 हजार में बिक्री
पुलिस के मुताबिक, आशुतोष ने पूछताछ में बताया कि एक गत्ते में 120 बोतल सिरप आती थीं। उसे थोक में करीब 12 हजार रुपये में खरीदकर करीब 18 हजार रुपये में बाजार में बेचने की बात उसने स्वीकार की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक कितनी मात्रा में सिरप बाजार में पहुंचाया गया।
लीडर रोड के दो थोक कारोबारियों के नाम भी बताए
पूछताछ में आशुतोष ने प्रयागराज के लीडर रोड के दो थोक कारोबारियों शनि जायसवाल और आशु जायसवाल के नाम भी बताए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने इनके जरिए भी सिरप की सप्लाई होने की बात कही है। अब जांच टीम इन दोनों की भूमिका और आरोपी के बताए नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
दिल्ली से हिमाचल और फिर प्रयागराज तक कड़ी
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, अब तक कि जांच में सामने आए ब्योरे के मुताबिक, सिरप की कड़ी हिमाचल प्रदेश के बद्दी से शुरू होकर दिल्ली और फिर प्रयागराज तक पहुंचती थी। पुलिस के अनुसार, ONEREX सिरप WINGS BIOTECH LLP, बद्दी, हिमाचल प्रदेश का है। इसे NOVOTRIX LIFESCIENCES के नाम से मंगाकर प्रयागराज में डंप किया जाता था।
61,600 टैबलेट भी मिलीं
सिरप के साथ मौके से अलग-अलग नाम की 61,600 जेनरिक टैबलेट भी बरामद हुईं। इनमें ACECLO FAST-P, NIMUWIN PLUS, MONTEZONE-LC और MOXYWINGS-CV-625 शामिल हैं। औषधि निरीक्षकों ने अलग-अलग दवाओं के नमूने भी लिए हैं।
औषधि निरीक्षकों के मुताबिक, जिस मकान में दवाएं रखी गई थीं, वह दवाओं के भंडारण या बिक्री के लिए अधिकृत नहीं था। इसलिए सिरप और टैबलेट के वहां रखे होने के उद्देश्य और उनके संभावित अवैध डायवर्जन की भी जांच की जा रही है।
कार से मेडिकल स्टोरों तक सप्लाई का दावा
पुलिस ने मौके से सफेद टाटा नेक्सन भी कब्जे में ली है। पूछताछ में आशुतोष ने इसी कार से मेडिकल स्टोरों तक सिरप पहुंचाने की बात कही है। वाहन उसकी पत्नी के नाम पंजीकृत बताया गया है।
पुलिस को देखते ही तोड़ दिए मोबाइल फोन
छापेमारी के दौरान तीन टूटे मोबाइल फोन भी बरामद हुए। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने टीम को देखकर मोबाइल तोड़ दिए थे। इसके अलावा एक चालू मोबाइल फोन भी मिला है। जांच टीम अब इन मोबाइलों से नेटवर्क से जुड़े संपर्क और डिजिटल साक्ष्य जुटाने की कोशिश कर रही है।
फरार साथियों तक पहुंचेगी जांच
एसटीएफ के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर सप्लाई नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। खासतौर पर दिल्ली की फर्म, हिमाचल से सिरप की खरीद, प्रयागराज में किराये के मकान और मेडिकल स्टोरों तक सप्लाई के बीच की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।
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