भाजपा सरकार ने लगाया युवाओं के भविष्य पर ग्रहण:कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से पूछे सवाल, बार–बार परीक्षाएं विवादों में क्यों हैं
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने प्रदेश के नौजवानों का भविष्य बोली लगा-लगाकर बेचा है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, भर्ती माफिया और लंबित भर्तियों ने युवाओं के भविष्य पर ग्रहण लगा दिया है और यह दाग भाजपा सरकार की रवानगी के साथ ही जाएगा। मिश्रा ने कहा कि प्रदेश के करोड़ों युवा अपने और उत्तर प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के लिए वर्षों तक भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन उन्हें परिणाम की जगह पेपर लीक, परीक्षा निरस्त होने, भर्ती में वर्षों की देरी और चहेतों को भर्ती कराने के आरोपों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने दो ताजा मामलों का जिक्र किया। उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2025 में 15 लाख 75 हजार 706 आवेदन मिले थे और लिखित परीक्षा में करीब 10.77 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। प्रक्रिया के बाद 12,733 अभ्यर्थियों को अगले चरण के लिए सफल घोषित किया गया और 14 जुलाई को अंतिम परिणाम जारी किया गया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रोविजनल और फाइनल आंसर-की में कई प्रश्नों के उत्तर बदल दिए गए। प्रत्येक प्रश्न 2.5 अंक का होने से उत्तर बदलने पर कई अभ्यर्थियों के नतीजे प्रभावित हुए। आपत्तियों के निस्तारण को लेकर असंतोष जताते हुए अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने 1 अक्टूबर को नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगाई और अगली सुनवाई तय की। समाचार रिपोर्टों के अनुसार यह रोक 4,543 पदों की नियुक्ति प्रक्रिया पर है और आंसर-की विवाद से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। दूसरी ओर, यूपीएसएसएससी की अवर अभियंता भर्ती के अभ्यर्थी भी आंदोलनरत हैं। विज्ञापन संख्या 08/2024 के तहत यह प्रक्रिया 7 मार्च 2024 को शुरू हुई थी। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती लंबी खिंचने से उनका भविष्य अधर में है और वे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन तथा अगले चरण की तारीख का इंतजार कर रहे हैं। सोमवार को वे लखनऊ के पिकप भवन पर धरना देकर प्रक्रिया जल्द पूरी करने और संबंधित तारीख घोषित करने की मांग कर रहे थे। मिश्रा ने कहा कि यह सिर्फ दो भर्तियों की कहानी नहीं है। उनके अनुसार यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती में 60,244 पदों के लिए करीब 48 लाख से अधिक आवेदन आए थे, लेकिन फरवरी 2024 की परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद निरस्त करनी पड़ी। आरओ/एआरओ परीक्षा में करीब 10.76 लाख अभ्यर्थी पंजीकृत थे और पेपर लीक के बाद सरकार ने परीक्षा निरस्त कर दी। उन्होंने एसआई, पुलिस कांस्टेबल, आरओ/एआरओ और शिक्षक भर्ती जैसी कई परीक्षाओं को घोटाले की भेंट चढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने आदित्यनाथ सरकार से सवाल उठाए कि भर्ती कैलेंडर समय पर क्यों नहीं चलता, पेपर लीक क्यों होते हैं, परीक्षाएँ बार-बार विवादों में क्यों आती हैं और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए वर्षों तक इंतजार क्यों करना पड़ता है। मिश्रा ने कहा कि युवा सिर्फ परीक्षा नहीं देते, वे अपने जीवन के कई वर्ष इस उम्मीद में लगाते हैं कि मेहनत का परिणाम मिलेगा। जब परीक्षा प्रणाली ही सवालों के घेरे में आ जाए तो नुकसान केवल एक अभ्यर्थी का नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार और प्रदेश की युवा पीढ़ी का होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार और भर्ती माफिया की कथित मिलीभगत ने उत्तर प्रदेश के युवाओं के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है और अब प्रदेश का युवा जवाब मांग रहा है।
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