भाकियू टिकैत का प्रदर्शन, CEC के इस्तीफे की मांग:हाउस अरेस्ट के बावजूद किसान पहुंचे कलेक्ट्रेट, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
संभल के जिला मुख्यालय बहजोई में शनिवार को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित वोट चोरी के विरोध में प्रदर्शन किया। किसान नेताओं ने करीब एक किलोमीटर पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट पहुंचने की कोशिश की। शनिवार दोपहर 1:25 बजे संगठन ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित आठ सूत्रीय ज्ञापन डीएम के नाम सीओ बहजोई स्तुति सिंह को सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनके इस्तीफे और कार्रवाई की मांग की। संगठन के नेताओं के मुताबिक, दिल्ली में चल रहे आंदोलन के समर्थन में यह प्रदर्शन किया गया। किसान नेताओं का दावा है कि उन्हें शुक्रवार से ही हाउस अरेस्ट कर दिल्ली जाने से रोका जा रहा था। प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट के गेटों पर बैरिकेडिंग की गई। सुरक्षा के लिए बहजोई, धनारी और चंदौसी थाने की पुलिस के साथ पीएसी भी तैनात रही। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं और इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत है। हाउस अरेस्ट के बाद भी कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान भाकियू टिकैत के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र सिंह यादव ने कहा कि संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया गया है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस-प्रशासन ने शुक्रवार से ही उन्हें दिल्ली जाने से रोकने के लिए हाउस अरेस्ट कर रखा था। इसके बावजूद किसानों ने बहजोई में पैदल मार्च निकालकर ज्ञापन सौंपा। पुलिस द्वारा रोके जाने के सवाल पर विजेंद्र सिंह यादव ने कहा कि जब राजा तानाशाह हो जाता है तो उसे विरोध भी बुरा लगने लगता है। उन्होंने कहा कि किसान नेताओं ने प्रशासन को पहले ही ज्ञापन देने की जानकारी दे दी थी। उनके मुताबिक, प्रदर्शन का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाना था। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग विजेंद्र सिंह यादव ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम नागरिक के लिए बार-बार अपनी पात्रता साबित करना मुश्किल हो सकता है। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारे लगाए। किसान नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि कोई पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। ये आरोप संगठन की ओर से लगाए गए हैं। राष्ट्रपति के नाम आठ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा किसानों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सीओ बहजोई स्तुति सिंह को सौंपा। इसमें एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और अपनाई गई प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई। संगठन ने गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने और राज्य, जिला तथा विधानसभा क्षेत्रवार हटाए गए नामों का सत्यापित विवरण सार्वजनिक करने की मांग रखी। ज्ञापन में प्रभावित मतदाताओं को नाम हटाने का कारण बताने, आपत्ति और अपील का सरल अवसर देने तथा किसान, मजदूर, दलित, आदिवासी, पिछड़े और कमजोर वर्गों के पात्र मतदाताओं को विशेष सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है। इसके अलावा, अनियमितता या लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण और निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की गई। बैरिकेडिंग के बीच पुलिस और पीएसी तैनात प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट में प्रदर्शनकारियों के प्रवेश को रोकने के लिए गेटों पर बैरिकेडिंग की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत बहजोई, धनारी और चंदौसी थाने की पुलिस के साथ पीएसी के जवान तैनात रहे। किसानों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष मनपाल सिंह यादव, देवन यादव, विक्रम सिंह, मुर्शिद खान, फिरोज नबी, बृजेश यादव, चंद्रपाल सिंह, गायत्री यादव, मोहम्मद हनीफ, संजीव यादव, विकास, मोहम्मद जैद, नरेश कुमार, रामवीर सिंह, रामखिलाड़ी सिंह, महावीर सिंह, राजू यादव, शिशुपाल सिंह, तेजपाल सिंह, पुष्पेंद्र सिंह यादव, अमरपाल सिंह, सद्दाम, विपिन यादव और राजपाल सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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