भदोही में अमित सिंह प्रिंस का चुनाव लड़ने का ऐलान:बोले- टिकट मिले या न मिले, हर हाल में लड़ेंगे चुनाव; सियासी हलचल तेज
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भदोही की सियासत में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। जिला पंचायत सदस्य, बड़े व्यवसायी और समाजसेवी अमित सिंह प्रिंस ने भदोही सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। प्रिंस ने साफ लहजे में कहा है कि पार्टी टिकट दे या न दे, वह हर हाल में चुनाव मैदान में उतरेंगे। औराई में प्रेस वार्ता के दौरान जब उनसे पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह के बेटे की दावेदारी पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सामने कोई भी हो, वह पीछे नहीं हटने वाले। युवाओं के बीच जबरदस्त पैठ रखने वाले अमित सिंह प्रिंस इस वक्त लग्जरी गाड़ियों के बड़े काफिले के साथ गांव-गांव जनसंपर्क कर रहे हैं। किसी दल का नाम नहीं लिया, लेकिन तीन बड़े दिग्गजों का गणित बिगाड़ा फिलहाल अमित सिंह प्रिंस ने किस पार्टी के निशान पर चुनाव लड़ेंगे, इस पर सस्पेंस बना रखा है। हालांकि, उनके इस फैसले से भदोही सीट का त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय समीकरण पूरी तरह गड़बड़ा गया है: समाजवादी पार्टी: मौजूदा विधायक जाहिद बेग अखिलेश यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं। मुस्लिम बाहुल्य सीट होने के कारण सपा फिर उन पर दांव लगा सकती है। भाजपा: पूर्व विधायक रविंद्र नाथ त्रिपाठी एक बार फिर मजबूती से दावेदारी ठोक रहे हैं। बसपा: पूर्व प्रत्याशी हरिशंकर उर्फ दादा चौहान भी लगातार सक्रिय हैं। अब प्रिंस के 'हर हाल में चुनाव लड़ने' के रुख ने इन तीनों स्थापित चेहरों के सामने नए सियासी समीकरणों की चुनौती खड़ी कर दी है। 'मैं किसी को प्रतिद्वंद्वी नहीं मानता, मेरी लड़ाई खुद से है' अपनी दावेदारी को लेकर अमित सिंह प्रिंस ने कहा, "मैं किसी दूसरे नेता को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं मानता। मेरी लड़ाई रोज खुद से होती है। अगर भदोही के पुराने जनप्रतिनिधियों ने ईमानदारी से काम किया होता, तो आज इस क्षेत्र की यह दुर्दशा न होती। मैं राजनीति करने नहीं, भदोही की तस्वीर बदलने आया हूं।" निजी जेब से कराएंगे बुजुर्गों को हज और तीर्थयात्रा अपनी दावेदारी के साथ ही प्रिंस ने एक लंबा-चौड़ा 'संकल्प-पत्र' (मेनिफेस्टो) भी जारी किया है। इसमें सरकारी दावों से अलग, कई काम अपने निजी खर्च पर करने का ऐलान किया है: फ्री एजुकेशन: गरीब, अनाथ और होनहार बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च खुद उठाएंगे। वृद्धाश्रम: बेघर और निराश्रित बुजुर्गों के लिए अपने निजी बजट से वृद्धाश्रम बनवाएंगे। स्किल हब व महिला सेंटर: युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए स्किल सेंटर और महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई व कंप्यूटर ट्रेनिंग हब खोलेंगे। मोबाइल अस्पताल: सरकारी अस्पतालों के लचर रवैये को देखते हुए 'वन कॉल' डॉक्टर सर्विस और दवाइयों के लिए मोबाइल अस्पताल लाएंगे। लाइब्रेरी और खेल मैदान: हर ब्लॉक में अपने खर्च से मॉडर्न लाइब्रेरी और खेल मैदान तैयार कराएंगे। धार्मिक यात्राएं (मास्टरस्ट्रोक): मुस्लिम बुजुर्गों के लिए हज-उमरा और सनातन धर्म के बुजुर्गों के लिए हर साल तीर्थयात्रा का पूरा खर्च खुद उठाएंगे। मदरसे व गुरुकुल: भदोही के मदरसों और गुरुकुलों में पढ़ने वाले जरूरतमंद बच्चों को फ्री खाना, कपड़े और दवाइयां देंगे। गरीब बेटियों की शादी: बिना किसी जाति-धर्म के भेदभाव के अनाथ और गरीब बेटियों का विवाह अपने निजी बजट से कराएंगे।
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