BHU में 10 जगहों पर हुआ कुलपति का पुतला दहन:14 दिनों से चल रहा है आंदोलन, कल से शुरू होगा अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के चीफ प्रॉक्टर हटाओ’ आंदोलन के 14 वें दिन बीएचयू परिसर में 10 अलग-अलग स्थानों पर कुलपति का पुलता दहन किया गया। संगठन का कहना है कि करीब दो महीने पहले मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया था। हमने प्रशासन से अपने मांगों को लेकर हर संभव संवाद करने की कोशिश की पर कोई समाधान नहीं निकल रहा है। छात्रों का कहना है कि अब जब तक हमारी मांग नहीं पूरी होती है तब तक हम भूख हड़ताल पर बैठेंगे। कल यानी 8 अक्टूबर से हमारा भूख हड़ताल शुरू होगा। जो भी छात्र स्वेच्छा से हमारे साथ बैठना चाहे वो आ सकता है। देखे तस्वीरें… इन जगहों पर हुआ पुतला दहन मंगलवार को बीएचयू परिसर में अलग-अलग इकाइयों ने कई स्थानों पर कुलपति का पुतला दहन किया गया । इनमें दालमियां चौराहा, बिरला चौराहा, हॉस्टल के सामने, एमएमवी चौराहा, सेंट्रल ऑफिस, आईटी के सामने और लॉ फैकल्टी के सामने समेत अन्य स्थान शामिल रहे। संगठन के मुताबिक कुल 10 स्थानों पर यह प्रदर्शन किया गया। 14 दिन से केंद्रीय कार्यालय पर धरना अभाविप नेता पुनीत मिश्रा ने कहा कि छात्रों ने करीब दो महीने पहले अपनी मांगों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन दिया था। इसके बाद कई बार संवाद का प्रयास किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भी प्रशासन को 10 दिन का समय दिया गया। इसके बाद छात्र केंद्रीय कार्यालय पहुंचे और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि 14 दिन से छात्र अपनी मांगों को लेकर केंद्रीय कार्यालय पर धरना दे रहे हैं। विश्वविद्यालय के सक्षम अधिकारी बातचीत तो कर रहे हैं, लेकिन बातचीत से अब तक कोई सार्थक समाधान सामने नहीं आया है। स्ट्रीट लाइट, CCTV और सुरक्षा का मुद्दा पुनीत मिश्रा ने कहा कि छात्रों की मांगें सामान्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हैं। इनमें छात्रावासों के बाहर स्ट्रीट लाइट और सीसीटीवी, कैंपस की खराब सड़कों की समस्या, छात्राओं की सुरक्षा और पेट्रोलिंग जैसे मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने परिसर में होने वाली घटनाओं और तेज रफ्तार वाहनों को लेकर भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की। 12 सितंबर की घटना की जांच की मांग अभाविप ने 12 सितंबर को हुए एक कार्यक्रम को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि कार्यक्रम के लिए सभागार आवंटन की तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। पुनीत मिश्रा ने कहा कि विश्वविद्यालय में सभागार आवंटन के लिए डीन, विभागाध्यक्ष और संबंधित कमेटी से प्रक्रिया पूरी होती है और शुल्क भी जमा किया जाता है। उनका आरोप है कि इस मामले में चीफ प्रॉक्टर ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए कार्यक्रम के लिए सभागार आवंटित किया। संगठन ने इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। छात्रों पर कार्रवाई और निलंबन का भी विरोध पुनीत मिश्रा ने छात्रों के खिलाफ कमेटियां बनाकर निलंबन, निष्कासन और कार्रवाई किए जाने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि इससे छात्रों पर मानसिक और शैक्षणिक दबाव पड़ता है। संगठन ने छात्रों पर दर्ज मुकदमों और दंडात्मक कार्रवाई की समीक्षा की मांग की है।
“छात्रा से इस तरह बात करेंगे तो आप चीफ प्रॉक्टर रहने के लायक नहीं” एमए प्रथम वर्ष समाजशास्त्र के छात्र रोहन पांडेय ने कहा कि आज पूरे देश में नारी शक्ति की बात हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएचयू में एमएमवी की एक छात्रा के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। रोहन के मुताबिक, छात्रा वाटर कूलर से पानी भर रही थी। उसी दौरान उसके साथ वहां मौजूद व्यक्ति ने “हट-हट” कहकर बात की। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी छात्रा से इस तरह बात की जाएगी तो यह ठीक नहीं है। रोहन ने कहा कि ऐसे व्यवहार के बाद संबंधित व्यक्ति को चीफ प्रॉक्टर के पद पर रहने का अधिकार नहीं है। “हम छात्र हित की लड़ाई लड़ रहे हैं तो विश्वविद्यालय की गरिमा कैसे ठेस पहुंचा रहे?” रोहन ने कहा कि जब छात्र तीसरे दिन धरने पर बैठे थे, तब डीएसडब्ल्यू उनके पास आए और धरना समाप्त करने को कहा। रोहन के मुताबिक, उनसे कहा गया कि धरने पर बैठकर वे विश्वविद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। इस पर रोहन ने सवाल उठाया कि अगर छात्र छात्रहित की समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं और इससे विश्वविद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंच रही है, तो छात्रों की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर छात्र गंभीर आरोप लगा रहे हैं, उनके रहते विश्वविद्यालय की गरिमा को लेकर भी सवाल उठना चाहिए। “संवाद हो रहा है, लेकिन समाधान नहीं निकल रहा” पुनीत मिश्रा ने कहा, “हम पिछले 14 दिनों से धरने पर बैठे हैं। प्रशासन के सक्षम अधिकारी बातचीत तो कर रहे हैं, लेकिन बातचीत के साथ कोई सार्थक समाधान निकलकर सामने नहीं आ रहा है। हमारी मांगें छात्रों की मूलभूत समस्याओं से जुड़ी हैं। अगर इन पर समय रहते निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन आगे और तेज होगा।” 8 अक्टूबर से भूख हड़ताल की चेतावनी अभाविप बीएचयू ने कहा है कि यदि मांगों पर तत्काल ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो 8 अक्टूबर से छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे। संगठन का कहना है कि मांगों पर निर्णायक कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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