बंदी सुसाइड मामला, पिता बोले- झूठे केस में फंसाया:पॉक्सो लगाने वालों ने 3 लाख रुपए मांगे थे, हम 300 रोज कमाते हैं, कहां से देते
शाहजहांपुर में शुक्रवार को कचहरी परिसर के शौचालय में बंदी दीपक उर्फ टाइमपाश का शव फंदे से लटका मिला। वह पॉक्सो एक्ट के एक मामले में जेल में बंद था। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। अधिवक्ता ने बंदियों की सुरक्षा बढ़ाने और उसके साथ तैनात पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। दीपक के पिता ने आरोप लगाया कि बेटे के खिलाफ दो बार मुकदमा दर्ज कराया गया और जेल भेजने से पहले तीन लाख रुपए मांगे गए थे। उनका कहना है कि वह राजस्थान में भट्ठे पर मजदूरी करते हैं और रोजाना करीब 300 रुपए कमाते हैं। पिता की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, रुपए मांगने और झूठा मुकदमा दर्ज कराने के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पिता बोले- पैसे होते तो बेटा आज जिंदा होता दीपक के पिता ने शुक्रवार रात करीब 9 बजे आरोप लगाया कि महिला और उसके परिवार ने बेटे को जेल भेजने से पहले तीन लाख रुपए मांगे थे। उन्होंने कहा कि उनके पास न खेती है और न ही इतनी बड़ी रकम देने की हैसियत। वह राजस्थान में मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। पिता के मुताबिक, आरोपियों ने रुपए देने पर लड़की को उनके बेटे को सौंपने की बात कही थी और पैसे नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी दी थी। पिता ने बताया कि वह शनिवार को जेल में बेटे से मिलने जाने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही उसकी मौत की खबर मिल गई। उनका कहना है कि करीब डेढ़ महीने पहले ही दीपक जमानत पर बाहर आया था। इसके बाद 6 अक्टूबर को दोबारा एफआईआर दर्ज होने पर उसे जेल भेज दिया गया। पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है। दूसरी बार चार लोग नामजद पुवायां थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने 13 मार्च 2026 को दीपक उर्फ टाइमपाश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि दीपक पेपर देने आई उसकी 16 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया। पुलिस ने 13 अप्रैल को उसे जेल भेज दिया था। इसके बाद 13 अगस्त को उसे जमानत मिल गई थी। महिला ने 6 अक्टूबर को फिर एफआईआर दर्ज कराई। इस बार दीपक समेत चार लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ। आरोप था कि 5 अक्टूबर को दीपक उसकी बेटी को शादी के उद्देश्य से बहला-फुसलाकर ले गया। महिला ने अन्य तीन लोगों पर भी इस काम में सहयोग करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने उसी दिन दीपक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वह तभी से जेल में बंद था। इन आरोपों और पिता की ओर से लगाए गए प्रत्यारोपों की जांच की जा रही है। अधिवक्ता बोले- बंदियों की सुरक्षा बढ़ाई जाए अधिवक्ता राजेश अवस्थी ने बताया कि कचहरी परिसर में बंदियों के लिए शौचालय बना हुआ है। उनके मुताबिक, परिसर में इस तरह की यह पहली घटना है। उन्होंने सवाल उठाया कि बंदी ने शौचालय में फांसी कैसे लगा ली और उस समय उसकी निगरानी की क्या व्यवस्था थी। उन्होंने बंदी के साथ तैनात पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने और कचहरी परिसर में सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। अधिवक्ता ने कहा कि वह इस मामले में पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और न्यायाधीश से भी मिलेंगे। उनका कहना है कि कचहरी परिसर में इस तरह की घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए। दीपक मूल रूप से पीलीभीत जिले का रहने वाला था और करीब 15 साल से पुवायां थाना क्षेत्र के बितौनी गांव में परिवार के साथ रह रहा था। उसके पिता राजस्थान में भट्ठे पर काम करते हैं। परिवार में उसके दो भाई राममिलन और संजय तथा बहन किरन हैं।
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