भारत मंडपम पहुंचे मोदी-पुतिन, अब होगी बड़ी बैठक!
नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत मंडपम पहुंच चुके हैं और दोनों के बीच द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। बैठक में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और विमान सौदों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी भारत पहुंच चुके हैं, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात तय है।
दि राइजिंग न्यूज | नई दिल्ली | 11 सितंबर 2026
भारत की राजधानी नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर दुनिया की नजरें टिक गई हैं। सम्मेलन की शुरुआत ब्रिक्स व्यापार मंच के साथ हो चुकी है और विभिन्न देशों के प्रमुख नेता तथा प्रतिनिधि भारत पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी भारत मंडपम पहुंच चुके हैं, जहां दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता होने वाली है।
भारत मंडपम पहुंचे नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सितंबर को भारत मंडपम पहुंच चुके हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात को भारत-रूस संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और कारोबार से जुड़े कई विषयों पर बातचीत होने की संभावना जताई गई है। इस द्विपक्षीय बैठक में रक्षा क्षेत्र से जुड़े संभावित समझौतों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। स्रोत के अनुसार रूस के लड़ाकू विमान से जुड़ा संभावित सौदा भी बैठक के दौरान चर्चा में आ सकता है। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं की गई है।
भारत-रूस संबंधों पर होगी अहम बातचीत
भारत और रूस के बीच होने वाली बातचीत में हथियारों और विमानों से जुड़े समझौतों के अलावा व्यापार और ऊर्जा के मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रक्षा और रणनीतिक सहयोग के संबंध रहे हैं। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान होने वाली यह बैठक द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। व्यापार और तकनीकी सहयोग भी दोनों देशों के एजेंडे में शामिल रह सकता है। रूस की ओर से भारत में विमान क्षेत्र से जुड़े बड़े सहयोग की योजना का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारत-रूस सहयोग के तहत तकनीक पर मिलकर काम करने और संयुक्त उत्पादों की उम्मीद जताई गई है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी पहुंचे भारत
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा बताई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेजेशकियान के बीच भी द्विपक्षीय बैठक होने वाली है, जिसमें दोनों देशों के संबंधों और व्यापार को मजबूत करने पर बातचीत की संभावना है। ईरान के राष्ट्रपति की यात्रा को भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार और आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने के मुद्दे बैठक में प्रमुखता से उठ सकते हैं। स्रोत के अनुसार पेजेशकियान शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
शी जिनपिंग से भी प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय मुलाकात तय होने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध सामग्री के अनुसार दोनों नेताओं के बीच मुलाकात को लेकर पुष्टि की गई है। यह बैठक भारत और चीन के संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शी जिनपिंग 12 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचने वाले हैं। वह राजधानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में उनकी मौजूदगी से भारत-चीन संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की संभावना बढ़ गई है।
दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया समेत कई देशों के नेता पहुंचे
ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा भी भारत पहुंच चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स का सदस्य देश है और उनकी यात्रा सम्मेलन की महत्वपूर्ण भागीदारी में शामिल है। इसके अलावा नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति काशिम शेट्टीमा भी नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। नाइजीरिया की विदेश मंत्री बियांका ओडुमेग्वु-ओजुकु भी सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंचीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नाइजीरिया को ब्रिक्स के साझेदार देश का दर्जा प्राप्त है। बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम भी साझेदार देशों की सूची में शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी दिल्ली पहुंचे
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी नई दिल्ली पहुंच गए हैं। दिल्ली पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने उनका स्वागत किया। उनकी मौजूदगी से सम्मेलन का अंतरराष्ट्रीय महत्व और बढ़ गया है। इसके अलावा उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन भी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों के पहुंचने के साथ ही राजधानी में सम्मेलन से जुड़ी गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं।
ब्रिक्स व्यापार मंच से सम्मेलन की शुरुआत
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले व्यापार मंच के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसमें हिस्सा लिया और कहा कि ब्रिक्स के संस्थागत सहयोग के 20 वर्ष पूरे होना एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने बदलती वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था के बीच ब्रिक्स सहयोग के महत्व पर जोर दिया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी व्यापार मंच को संबोधित किया। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच मिलकर काम करने की जरूरत बताई और कहा कि सहयोग के जरिए रोजगार, संपदा और समृद्धि के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। उनके अनुसार ब्रिक्स देश दुनिया की बड़ी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।
नई दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देखते हुए नई दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा किया गया है। भारत मंडपम और उसके आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। सम्मेलन में कई देशों के शीर्ष नेताओं के पहुंचने के कारण राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं। सम्मेलन से जुड़े कार्यक्रमों और विदेशी मेहमानों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भारत मंडपम के आसपास सुरक्षा घेरा मजबूत किया गया है। राजधानी में आने वाले प्रमुख नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों के कार्यक्रमों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था संचालित की जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व कल्याण की कामना की
ब्रिक्स सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके महत्व को लेकर संदेश दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन में विश्व कल्याण की भावना के साथ विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन की मेजबानी नई दिल्ली में की जा रही है। ब्रिक्स के मंच पर इस बार व्यापार, आर्थिक सहयोग, वैश्विक व्यवस्था और सदस्य देशों के बीच सहयोग जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बैठक के तौर पर देखा जा रहा है।
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