मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात, 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य पर नजर

नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय बैठक शुरू हुई। दोनों नेताओं के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और औद्योगिक सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है। वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी बातचीत का अहम विषय हो सकता है।

Sep 11, 2026 - 16:40
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मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात, 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य पर नजर

दि राइजिंग न्यूज | नई दिल्ली | 11 सितंबर 2026

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के तहत नई दिल्ली में शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक शुरू हुई। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। बैठक में दोनों देशों के बीच सहयोग के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर बातचीत होने की संभावना है।

मोदी-पुतिन की मुलाकात में किन मुद्दों पर होगी चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बैठक को भारत-रूस संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का मुद्दा भी बातचीत का हिस्सा हो सकता है। इसके अलावा दोनों देश आने वाले वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के रास्तों पर चर्चा कर सकते हैं।

भारत-रूस व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य

बैठक में वर्ष 2030 तक भारत और रूस के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर बातचीत होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच पहले से ही ऊर्जा, रक्षा और व्यापार के क्षेत्र में मजबूत संबंध हैं। अब औद्योगिक सहयोग का विस्तार करके आर्थिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने पर जोर दिया जा सकता है। रूस में भारतीय कुशल श्रमिकों की संख्या बढ़ाने और दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के मुद्दे पर भी चर्चा संभावित है।

रक्षा क्षेत्र में बड़ी घोषणा की उम्मीद

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक से पहले ही रक्षा क्षेत्र को लेकर चर्चाएं तेज थीं। बैठक में रूस के सुखोई-57 लड़ाकू विमान से संबंधित संभावित समझौते को लेकर भी उम्मीद जताई गई थी। इसके अलावा दोनों देशों के बीच हथियारों और विमानों से जुड़े सहयोग पर बातचीत हो सकती है। हालांकि उपलब्ध सामग्री में किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं की गई है, इसलिए इसे संभावित चर्चा के रूप में ही देखा जा रहा है।

पुतिन को प्रधानमंत्री मोदी ने भेंट की तिरुक्कुरल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत मंडपम में गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उन्हें तमिल कवि तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी संस्करण भेंट किया। तिरुक्कुरल तमिल भाषा की प्राचीन काव्य रचनाओं में शामिल है और इसमें जीवन के विभिन्न पहलुओं से जुड़े विचार मिलते हैं। इस भेंट को भारत की सांस्कृतिक विरासत और भारत-रूस मैत्री के प्रतीक के तौर पर भी देखा जा रहा है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी पहुंचे नई दिल्ली

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। उनके भारत पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक को लेकर भी ध्यान केंद्रित हो गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच शाम को मुलाकात होनी है। भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने तथा दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने से जुड़े विषयों पर बातचीत होने की संभावना है।

शी जिनपिंग से भी प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भी द्विपक्षीय मुलाकात प्रस्तावित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों नेताओं की मुलाकात तय होने की बात सामने आई है। यह बैठक भारत और चीन के संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि उपलब्ध सामग्री में इस बैठक के विस्तृत एजेंडे की जानकारी नहीं दी गई है।

कई देशों के नेता और प्रतिनिधि दिल्ली पहुंचे

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए कई देशों के वरिष्ठ नेता और प्रतिनिधि नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति सीनेटर काशिम शेट्टीमा भारत पहुंचे, जबकि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन भी सम्मेलन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे हैं। इससे सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।

ब्रिक्स व्यापार मंच से सम्मेलन की शुरुआत

नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले शुक्रवार सुबह ब्रिक्स व्यापार मंच के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया। जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स के संस्थागत सहयोग के 20 वर्ष पूरे होना इस वर्ष को विशेष बनाता है। उन्होंने बदलती वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था के बीच सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

आर्थिक सहयोग और रोजगार पर भी जोर

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों के बीच मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सहयोग को आम लोगों के लिए रोजगार और सदस्य देशों के लिए समृद्धि में बदलने की आवश्यकता है। उनके अनुसार ब्रिक्स देश दुनिया की बड़ी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में सम्मेलन को महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।

रूस ने मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक सहयोग की बात कही

ब्रिक्स व्यापार मंच में रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेटनिकोव ने मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने और आर्थिक बदलाव को गति देने पर जोर दिया। उन्होंने ब्रिक्स देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया। उनके अनुसार सदस्य देशों के बाजारों में मौजूद संभावनाओं का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इससे संकेत मिलता है कि सम्मेलन में राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ आर्थिक सहयोग भी प्रमुख विषय बना हुआ है।

12 और 13 सितंबर को होगा मुख्य सम्मेलन

भारत ने नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियां पूरी कर ली हैं। उपलब्ध सामग्री के अनुसार मुख्य सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को आयोजित किया जाना है। इससे पहले ही विभिन्न देशों के नेता और वरिष्ठ प्रतिनिधि भारत पहुंचने लगे हैं। सम्मेलन के दौरान वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा और सदस्य देशों के बीच सहयोग से जुड़े कई विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मेलन

भारत की अध्यक्षता में हो रहा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वैश्विक स्तर पर भारत की कूटनीतिक और आर्थिक भूमिका को मजबूत करने का अवसर माना जा रहा है। सम्मेलन में भारत को रूस, ईरान, चीन, दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर सीधे बातचीत का अवसर मिल रहा है। ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे विषय भारत की दीर्घकालिक जरूरतों से जुड़े हैं। ऐसे में नई दिल्ली में हो रही बैठकों के परिणाम आने वाले समय में भारत की विदेश और आर्थिक नीति के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

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