बुलंदशहर में बहन की हत्या के दोषी भाई को उम्रकैद:शव ठिकाने लगाने में मदद करने वाले दूसरे भाई को 5 साल की सजा
बुलंदशहर में सगी बहन की हत्या के मामले में अदालत ने दो भाइयों को सजा सुनाई है। शनिवार शाम 6 बजे एडीजे-01 कोर्ट ने मुख्य आरोपी त्रिभुवन प्रताप सिंह को उम्रकैद की सजा दी। उसके छोटे भाई मोनिन्दर कुमार को साक्ष्य छिपाने और अपराध में मदद करने के मामले में 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। दोनों पर कुल 90 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। हत्या के बाद शव काली नदी में फेंका था मामला वर्ष 2024 में छतारी थाना क्षेत्र के बीकूपुर रामनगर गांव का है। पुलिस के अनुसार, त्रिभुवन प्रताप सिंह ने अपनी सगी बहन की हत्या कर दी थी। उसके छोटे भाई मोनिन्दर कुमार ने भी इस अपराध में साथ दिया था। आरोप है कि दोनों ने मिलकर शव काली नदी में फेंक दिया था। इस संबंध में 22 अगस्त 2024 को छतारी थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। 18 नवंबर 2024 को दाखिल हुआ था आरोप पत्र पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 18 नवंबर 2024 को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत मामले को चिह्नित किया गया। बुलंदशहर पुलिस की मॉनिटरिंग सेल ने अदालत में प्रभावी पैरवी की। इसके बाद एडीजे-01 न्यायालय के न्यायाधीश धीरेंद्र कुमार ने फैसला सुनाया। मुख्य आरोपी पर 70 हजार रुपए का जुर्माना अदालत ने दोष सिद्ध होने पर त्रिभुवन प्रताप सिंह को आजीवन कारावास और 70 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, शव को ठिकाने लगाने और अपराध में मदद करने वाले मोनिन्दर कुमार को 5 साल के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया। पुलिस की पैरवी से मिली सजा इस मामले में अभियोजक राजीव मलिक, मॉनिटरिंग सेल प्रभारी निरीक्षक पंकज राय, पैरोकार कांस्टेबल दीपक टेकवानी और कोर्ट मोहर्रिर महिला हेड कांस्टेबल सुनीता सिंह की भूमिका रही। पुलिस ने इसे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत प्रभावी पैरवी का परिणाम बताया।
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