संभल हिंसा: अयान हत्याकांड में मुल्ला और गुलाम की सुनवाई:29 अक्टूबर अगली तारीख, गुलाम ने बचाव में साक्ष्य पेश करने से किया इनकार
संभल हिंसा से जुड़े अयान हत्याकांड में शनिवार को आरोपी मुल्ला अफरोज और गुलाम की जिला न्यायाधीश डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में पेशी हुई। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351 से संबंधित सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई। अदालत ने सफाई-साक्ष्य के लिए अगली तारीख 29 अक्टूबर तय की है। गुलाम ने साक्ष्य देने से किया इनकार जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने शनिवार शाम करीब 5:30 बजे बताया कि संभल कोतवाली के अपराध संख्या 339/2024 से जुड़े अयान हत्याकांड में मुल्ला अफरोज और गुलाम आरोपी हैं। गुलाम को मुरादाबाद जेल से अदालत में पेश किया गया, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) रद्द होने पर अफरोज जमानत पर है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, गुलाम ने बचाव में कोई गवाह या साक्ष्य प्रस्तुत करने से इनकार कर दिया, जबकि मुल्ला अफरोज ने 11 गवाहों की सूची दी है। पिछली पेशी पर दोनों ने आरोपों से किया था इनकार बताया गया कि 9 अक्टूबर को अदालत में पेशी के दौरान दोनों आरोपियों ने एक-दूसरे को पहचानने से इनकार किया था। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस पर झूठा फंसाने का आरोप लगाया था। अदालत ने उस समय उन्हें अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय दिया था। अभियोजन पक्ष ने यह भी बताया कि शुक्रवार को बिलाल हत्याकांड में अफरोज की ओर से उसके भाई फरोग आलम ने गवाही दी थी, जिस पर अभियोजन ने जिरह की। नवंबर 2024 में सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा 19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष ने चंदौसी स्थित सिविल सीनियर डिवीजन अदालत में शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए याचिका दाखिल की थी। अदालत के आदेश पर उसी दिन सर्वे का पहला चरण हुआ, जबकि दूसरा चरण 24 नवंबर को किया गया। दूसरे सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में लोग जुटे और हिंसा भड़क गई। पुलिस पर पथराव और फायरिंग की घटनाएं हुईं, जिनमें पांच लोगों की मौत हुई थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, एएसपी अनुज चौधरी और डिप्टी कलेक्टर समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
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