बुलंदशहर समाधान दिवस में अधिकारी रील्स देखते रहे:डीएम-एसएसपी की मौजूदगी में फरियादी परेशान होते रहे, नहीं सुनी शिकायतें
बुलंदशहर के खुर्जा तहसील प्रांगण में शनिवार को 12 बजे से 2 बजे तक जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बुलंदशहर की अध्यक्षता में आयोजित 'सम्पूर्ण समाधान दिवस' प्रशासनिक संवेदनहीनता की भेंट चढ़ गया। शासन के सख्त निर्देशों और जिले के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद, समाधान दिवस में कई विभागों के अधीनस्थ अधिकारी और कर्मचारी जनसमस्याएं सुनने के बजाय अपने मोबाइल फोन पर 'रील्स' देखने में व्यस्त रहे। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से अपनी फरियाद लेकर पहुंचे लोग घंटों कतारों में खड़े रहे, लेकिन अपनी कुर्सियों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान फरियादियों के दुख-दर्द से ज्यादा अपने फोन की स्क्रीन पर केंद्रित रहा। जनता की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए आयोजित इस सरकारी मंच पर अधिकारियों का यह रवैया देखकर आए हुए लोगों में भारी निराशा और आक्रोश देखने को मिला। प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदेश सरकार एक तरफ आम जनता की समस्याओं के पारदर्शी और पारदर्शी निस्तारण के लिए प्रतिबद्धता का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर निचले स्तर के अधिकारियों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया शासन की मंशा को पूरी तरह धूमिल कर रहा है। ड्यूटी के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों की यह हरकत न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि जनसमस्याओं को लेकर निचले स्तर के तंत्र में कितनी घोर संवेदनहीनता व्याप्त है। शीर्ष अधिकारियों के ठीक सामने हुई इस घटना के बाद अब यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या बेपरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई होगी या मामला केवल खानापूर्ति तक सिमट कर रह जाएगा।
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