भारत-अमेरिका-फ्रांस की रणनीति से घिरा ड्रैगन: हिंद महासागर में चीन की बढ़ी टेंशन
IISS की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की सबसे बड़ी समुद्री कमजोरी मलक्का जलडमरूमध्य नहीं बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। भारत, अमेरिका और फ्रांस की मजबूत मौजूदगी के बीच चीन हिंद महासागर में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में यह क्षेत्र वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 30 मई 2026
चीन की समुद्री रणनीति को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार चीन जिस मलक्का जलडमरूमध्य को अपनी सबसे बड़ी कमजोरी मानता था, असल खतरा उससे पहले स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से शुरू होता है। यही कारण है कि हिंद महासागर में भारत, अमेरिका और फ्रांस की बढ़ती मौजूदगी चीन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) की ताजा रिपोर्ट ने चीन की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
होर्मुज बना चीन की सबसे बड़ी चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों से आने वाले तेल पर काफी हद तक निर्भर है। यह तेल सबसे पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरकर हिंद महासागर और फिर मलक्का जलडमरूमध्य के रास्ते चीन पहुंचता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज में किसी प्रकार का संकट पैदा होता है तो चीन की तेल आपूर्ति शुरुआत में ही प्रभावित हो सकती है। ऐसे में मलक्का तक पहुंचने का सवाल ही नहीं उठेगा।
चीन, रूस और ईरान का संयुक्त अभ्यास
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वर्ष चीन, रूस और ईरान ने मिलकर "समुद्री सुरक्षा बेल्ट 2026" नामक नौसैनिक अभ्यास किया था। इसके कुछ समय बाद क्षेत्र में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ गया, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत और बढ़कर सामने आई।
हिंद महासागर में चार बड़ी ताकतें
रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान समय में हिंद महासागर में चार प्रमुख शक्तियां प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। भारत इस क्षेत्र को अपनी रणनीतिक प्राथमिकता मानता है और लगातार नौसैनिक गतिविधियां बढ़ा रहा है। फ्रांस के पास रियूनियन द्वीप और अफ्रीकी क्षेत्र में मजबूत सैन्य मौजूदगी है। अमेरिका डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे के जरिए पूरे क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है। वहीं चीन अपनी नौसैनिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी भी वह अन्य तीन देशों से पीछे माना जा रहा है।
चीन कैसे बढ़ा रहा प्रभाव
चीन हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने, बंदरगाह विकसित करने और आधारभूत ढांचा तैयार करने पर तेजी से काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन क्षेत्रीय देशों के साथ संबंध मजबूत कर अपनी दीर्घकालिक रणनीतिक मौजूदगी सुनिश्चित करना चाहता है।
अमेरिका के सामने दोहरी चुनौती
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका एक तरफ प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी एशिया में ईरान से भी तनाव बना हुआ है। ऐसे में यदि चीन हिंद महासागर में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत करता है तो अमेरिका की रणनीतिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। हिंद महासागर आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। चीन अपनी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाना चाहता है, जबकि भारत, अमेरिका और फ्रांस पहले से मजबूत स्थिति में मौजूद हैं। ऐसे में समुद्री मार्गों और रणनीतिक ठिकानों को लेकर प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।