ट्रंप का 17 देशों पर टैरिफ बम, भारत भी निशाने पर!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत, पाकिस्तान सहित 17 देशों से आने वाले उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का फैसला किया है। अमेरिका का कहना है कि यह कदम जबरन मजदूरी से जुड़े उत्पादों पर रोक और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | वाशिंगटन | 24 जुलाई 2026
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए भारत, पाकिस्तान समेत 17 देशों से आने वाले उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन देशों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है, जहां जबरन मजदूरी से तैयार उत्पादों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। यह नया प्रावधान 24 जुलाई से प्रभावी हो गया है। इस फैसले से वैश्विक व्यापार और निर्यात बाजार पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
अमेरिका ने 17 देशों पर लगाया अतिरिक्त आयात शुल्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा व्यापारिक निर्णय लेते हुए भारत सहित 17 देशों से अमेरिका आने वाले उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय लंबे समय से चल रही समीक्षा और व्यापारिक जांच के बाद लिया गया है। इस कदम का उद्देश्य उन देशों को सख्त संदेश देना है, जो जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहे हैं।अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने बताया कि यह कार्रवाई व्यापार कानून के अंतर्गत की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जिन देशों में श्रमिकों के अधिकारों का पर्याप्त संरक्षण नहीं किया जाता और जबरन मजदूरी से तैयार वस्तुएं अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचती हैं, उनके खिलाफ कठोर आर्थिक कदम उठाना आवश्यक हो गया था। इसी नीति के तहत यह अतिरिक्त आयात शुल्क लागू किया गया है।
भारत और पाकिस्तान सहित किन देशों पर लागू हुआ नया शुल्क
अमेरिका ने भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, कनाडा, ब्रिटेन, मलेशिया, इंडोनेशिया, मेक्सिको, अर्जेंटीना, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, जॉर्डन तथा त्रिनिदाद और टोबैगो सहित कुल 17 देशों को इस नई सूची में शामिल किया है। इन सभी देशों से अमेरिका आने वाले निर्धारित उत्पादों पर अब 10 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क देना होगा।हालांकि अमेरिका ने कुछ अन्य देशों के लिए इससे भी अधिक 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क निर्धारित किया है। भारत को उस श्रेणी में शामिल नहीं किया गया, जिससे भारतीय निर्यातकों को कुछ हद तक राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को कम शुल्क वाली श्रेणी में रखने का फैसला दोनों देशों के बीच जारी आर्थिक सहयोग और श्रम सुधारों पर आधारित है।
भारत पर 12.5 प्रतिशत की जगह 10 प्रतिशत शुल्क क्यों लगाया गया
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक समीक्षा के दौरान भारत पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन बाद में श्रमिक अधिकारों और श्रम व्यवस्था को लेकर भारत और अमेरिका के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद इस प्रस्ताव में बदलाव किया गया। इसके बाद भारत के लिए शुल्क दर घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई।अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि भारत ने श्रम सुधारों और श्रमिक अधिकारों से जुड़े कई मुद्दों पर सहयोगात्मक रुख अपनाया है। इसी कारण अंतिम निर्णय में भारत को अपेक्षाकृत कम शुल्क वाली श्रेणी में रखा गया। अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में यदि सुधारों की गति बनी रहती है तो दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं।
ट्रंप ने फैसले के पीछे क्या वजह बताई
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह फैसला अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की सिफारिश के आधार पर लिया गया है। उनका कहना है कि दुनिया के कई देशों में अब भी जबरन मजदूरी से तैयार उत्पादों का उत्पादन और व्यापार जारी है, जिससे निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था प्रभावित होती है। ऐसे में अमेरिका उन देशों पर आर्थिक दबाव बनाकर सुधार लाना चाहता है।अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने भी कहा कि यह निर्णय केवल आर्थिक नहीं बल्कि मानवाधिकारों से जुड़ा कदम है। उनका कहना है कि जब तक संबंधित देश श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और जबरन मजदूरी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाएंगे, तब तक इस प्रकार की व्यापारिक कार्रवाई जारी रह सकती है।
भारत के निर्यात और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त आयात शुल्क का प्रभाव भारत के उन उद्योगों पर पड़ सकता है जो बड़ी मात्रा में अपने उत्पाद अमेरिका भेजते हैं। विशेष रूप से वस्त्र, चमड़ा, हस्तशिल्प और कुछ विनिर्माण क्षेत्रों को अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि भारत पर अपेक्षाकृत कम शुल्क लगाए जाने के कारण व्यापक स्तर पर बड़ा नुकसान होने की आशंका फिलहाल कम मानी जा रही है। भारत और अमेरिका के बीच आगे होने वाली व्यापारिक वार्ताएं काफी महत्वपूर्ण होंगी। यदि दोनों देशों के बीच सहमति बनती है तो भविष्य में इस अतिरिक्त शुल्क में संशोधन या राहत की संभावना भी बन सकती है। फिलहाल उद्योग जगत और निर्यातक अमेरिकी प्रशासन के अगले कदमों पर नजर बनाए हुए हैं।
क्या वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस फैसले का असर केवल 17 देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापारिक वातावरण पर भी इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है। कई देश अब अपनी श्रम नीतियों और व्यापारिक नियमों की समीक्षा कर सकते हैं ताकि भविष्य में इस प्रकार की आर्थिक कार्रवाई से बचा जा सके।अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत का मानना है कि यदि आने वाले समय में अन्य देश भी इसी तरह के कदम उठाते हैं तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और निर्यात व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में सभी प्रभावित देशों की नजर अब अमेरिका के साथ होने वाली आगामी व्यापारिक बातचीत पर टिकी हुई है।
मुख्य बिंदु
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अमेरिका ने भारत समेत 17 देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया।
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यह निर्णय जबरन मजदूरी से जुड़े उत्पादों के विरुद्ध कार्रवाई के तहत लिया गया।
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भारत पर पहले 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव था, जिसे घटाकर 10 प्रतिशत किया गया।
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अमेरिकी प्रशासन ने मानवाधिकार और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को फैसले की प्रमुख वजह बताया।
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विशेषज्ञों के अनुसार इसका असर भारत के कुछ निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है, हालांकि भारत को कम शुल्क वाली श्रेणी में रखे जाने से राहत मिलने की संभावना है।