चंद्रिका देवी मंदिर में नवरात्रि पर उमड़ी भक्तों की भीड़:आल्हा-ऊदल की आराध्य 18 भुजाओं वाली प्रतिमा के दर्शन को पहुंचे श्रद्धालु
महोबा के ऐतिहासिक चंदेलकालीन शक्तिपीठ मां बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। 12वीं सदी के वीर योद्धा आल्हा-ऊदल की आराध्य और 18 भुजाओं वाली इस दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन के लिए महोबा समेत मध्य प्रदेश और दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। शांति और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच मां के जयकारों से पूरा बुंदेलखंड भक्तिमय हो गया है। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक नगरी महोबा इन दिनों माता रानी के जयकारों से गूंज रही है।शारदीय नवरात्रि के पहले दिन से ही शक्तिपीठों में शामिल मां बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर में भक्तों की अपार भीड़ देखने को मिल रही है। महोबा के साथ-साथ आसपास के जिलों और मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के शौर्य और वीर आल्हा-ऊदल की परंपरा से जुड़ा है। मान्यता है कि राजा परमाल के सेनापति आल्हा-ऊदल युद्ध में जाने से पहले मां के चरणों में अपने अस्त्र-शस्त्र रखकर विजय का आशीर्वाद मांगते थे। मंदिर में स्थापित मां की यह प्रतिमा लगभग 10 फीट से अधिक ऊंची और 18 भुजाओं वाली है, जिसमें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का त्रिकोणात्मक स्वरूप समाहित है। पूरे भारतवर्ष में इतनी विशाल और प्राचीन प्रतिमा का होना इसे बेहद खास बनाता है। नवरात्र के पावन अवसर पर मंदिर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन और मिशन शक्ति की महिला टीम पूरी मुस्तैदी से तैनात है, जिससे महिलाएं और बच्चे सुरक्षित माहौल में दर्शन कर रहे हैं। मंदिर के पुजारी और दशकों से यहां आ रहे स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि मां के दरबार में जो भी सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। भक्तों का उत्साह सुबह चार बजे से ही शुरू हो जाता है, जो देर रात तक बना रहता है।साफ-सफाई, अनुष्ठान और माता के भव्य श्रृंगार के बीच यह पर्व बुंदेलखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को और अधिक प्रगाढ़ कर रहा है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)