CJP के गौरव भारती की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक:फर्रुखाबाद के सरकारी स्कूल का वीडियो बनाने पर दर्ज हुई थी FIR
सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति का वीडियो बनाने को लेकर दर्ज FIR के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कवरेज कोऑर्डिनेटर गौरव भारती को बड़ी राहत दी है।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस मामले में दर्ज FIR के संबंध में गौरव भारती को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
भारती ने यह वीडियो CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत बनाया था, जिसके जरिए सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और आधारभूत ढांचे की स्थिति को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति पदम नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने भारती की ओर से अधिवक्ता शाश्वत आनंद और सौमित्र आनंद को सुनकर आदेश दिया कि “याचिकाकर्ता को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा”। वीडियो बनाने और गलत स्थिति दिखाने का आरोप मामला 19 अगस्त 2026 को दर्ज FIR से जुड़ा है। यह FIR थाना नवाबगंज, जनपद फतेहगढ़ में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 352 और 353 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 के तहत दर्ज की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, भारती पर आरोप है कि उन्होंने “संस्थान का अवैध रूप से वीडियो तैयार किया” और उसकी स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। भारती की ओर से अदालत में दलील दी गई कि FIR में दर्ज आरोप और उसके तथ्य गलत हैं और याचिकाकर्ता के खिलाफ इन आरोपों पर अभियोजन नहीं चलाया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा- मामला विचारणीय दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि मामले पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। अदालत ने विपक्षी पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद भारती को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। मामले को निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है। ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत बनाया गया था वीडियो FIR उस वीडियो को लेकर दर्ज की गई है जिसे गौरव भारती ने फर्रुखाबाद के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की स्थिति को लेकर बनाया था। यह वीडियो CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत प्रसारित किया गया था। इस अभियान में सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं और बुनियादी व्यवस्थाओं से जुड़ी स्थितियों को वीडियो एवं अन्य सामग्री के माध्यम से सामने लाया जाता है। भारती की याचिका में FIR में लगाई गई भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 352 और 353 तथा IT Act की धारा 66 के तहत आपराधिक कार्रवाई को चुनौती दी गई है और न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने फिलहाल FIR की वैधता अथवा लगाए गए आरोपों के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अदालत ने मामले को विचारणीय मानते हुए, याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए विपक्षी पक्षों से उनका पक्ष मांगा है।
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