दादा की हत्या के मामले में दो पोतों को उम्रकैद:रेडियो बंद करने को लेकर हुआ था विवाद, लाठी-डंडों से पीटा था
फतेहपुर में अपर सत्र न्यायालय संख्या-2 की पीठासीन अधिकारी पूजा विश्वकर्मा ने शुक्रवार को वृद्ध रामसंजीवन की हत्या के मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने उनके दो सगे पोतों बलराम सिंह उर्फ चट्टू सिंह और मलखान सिंह को दोषी करार दिया। दोनों को आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। जुर्माना नहीं चुकाने पर तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। रेडियो बंद करने को लेकर हुआ था विवाद सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रमिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मामला गाजीपुर थाना क्षेत्र के बड़ेनपुर गांव का है। 20 मई 2016 की रात करीब 11 बजे 70 वर्षीय रामसंजीवन खाना खाने के बाद घर के बाहर चारपाई पर बैठकर रेडियो पर समाचार सुन रहे थे। इसी दौरान उनके पोते बलराम सिंह और मलखान सिंह लाठी-डंडे लेकर पहुंचे। दोनों ने रेडियो बंद करने को कहा। रामसंजीवन ने रेडियो बंद कर दिया, लेकिन इसके बावजूद दोनों ने उन पर लाठी-डंडों और ईंट से हमला कर दिया। सिर और मुंह पर गंभीर चोटें लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। बहू की तहरीर पर दर्ज हुआ था मुकदमा घटना के बाद मृतक की बहू रिंकी सिंह की लिखित तहरीर पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने बलराम सिंह को घटना के तुरंत बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वहीं, मलखान सिंह जमानत पर बाहर था। सात गवाहों के बयान के बाद सुनाया फैसला मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में सात गवाह पेश किए। इनमें मृतक की बहू रिंकी सिंह और पत्नी शांति देवी के बयान अहम रहे। दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्य सुनने के बाद अदालत ने बलराम सिंह और मलखान सिंह को धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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