दिल्ली में बिजली चोरी से 383 करोड़ रुपये का नुकसान, जानिए किस इलाके में कितनी हानि हुई
दिल्ली में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बिजली वितरण कंपनियों को बिजली चोरी, मीटरों से छेड़छाड़ और अन्य वितरण संबंधी नुकसान के कारण लगभग 383 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। दक्षिण और पश्चिमी दिल्ली में सबसे अधिक 211 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया। वर्ष 2002 की तुलना में बिजली वितरण के दौरान होने वाले नुकसान में बड़ी कमी आई है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 14 अक्टूबर 2026
देश की राजधानी दिल्ली में बिजली चोरी और बिजली के मीटरों से छेड़छाड़ के कारण बिजली वितरण कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान कंपनियों को लगभग 383 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। हालांकि, पिछले वर्षों की तुलना में बिजली वितरण के दौरान होने वाले नुकसान में काफी कमी आई है, लेकिन राजधानी के कई क्षेत्रों में बिजली चोरी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। कंपनियां इस समस्या पर रोक लगाने के लिए संबंधित विभागों और पुलिस की मदद से कार्रवाई कर रही हैं।
बिजली चोरी से कंपनियों को हुआ 383 करोड़ रुपये का नुकसान
दिल्ली में बिजली वितरण करने वाली कंपनियों के सामने बिजली चोरी और मीटरों से छेड़छाड़ की समस्या बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में बिजली वितरण कंपनियों को कुल मिलाकर लगभग 383 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस नुकसान के पीछे बिजली चोरी के साथ तकनीकी और व्यावसायिक कारण भी शामिल हैं। बिजली कंपनियां ऐसे मामलों पर नियंत्रण करके नुकसान कम करने का प्रयास कर रही हैं।
कंपनियों ने जारी किए नुकसान के आंकड़े
दिल्ली में बिजली वितरण का काम बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड और टाटा पावर दिल्ली वितरण लिमिटेड जैसी कंपनियां संभालती हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड में कुल तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान लगभग 6 प्रतिशत रहा। वहीं, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड में यह नुकसान 5.83 प्रतिशत और टाटा पावर दिल्ली वितरण लिमिटेड में 5.41 प्रतिशत दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि बिजली वितरण के दौरान होने वाले नुकसान को पूरी तरह समाप्त करना अब भी चुनौती है।
दक्षिण और पश्चिमी दिल्ली में सबसे अधिक नुकसान
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण और पश्चिमी दिल्ली के उन क्षेत्रों में जहां बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड बिजली वितरण करती है, लगभग 211 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह तीनों वितरण क्षेत्रों में सबसे अधिक बताया गया है। बिजली चोरी और मीटरों से छेड़छाड़ जैसी गतिविधियां इस समस्या की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। हालांकि, इस नुकसान के सभी हिस्से को केवल बिजली चोरी से जोड़ने से पहले तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान के अंतर को समझना जरूरी है।
पूर्वी और मध्य दिल्ली में 136 करोड़ रुपये का नुकसान
पूर्वी और मध्य दिल्ली में बिजली वितरण करने वाली बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड के क्षेत्रों में लगभग 136 करोड़ रुपये का नुकसान सामने आया। इन इलाकों में बिजली चोरी और वितरण से जुड़े अन्य नुकसान को कम करना कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। बिजली के मीटरों में गड़बड़ी और अवैध रूप से बिजली इस्तेमाल करने के मामलों से वितरण व्यवस्था प्रभावित होती है। इन गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए जांच और निगरानी की आवश्यकता बनी हुई है।
उत्तर और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में 36 करोड़ रुपये का नुकसान
उत्तर और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में टाटा पावर दिल्ली वितरण लिमिटेड के क्षेत्रों में लगभग 36 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया। यह आंकड़ा दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी-मध्य दिल्ली के क्षेत्रों की तुलना में कम है, लेकिन बिजली वितरण से जुड़े नुकसान को समाप्त करना अब भी जरूरी है। कंपनियां बिजली के उपयोग और मीटरों की निगरानी के माध्यम से अनियमितताओं का पता लगाने का प्रयास करती हैं। इस तरह की कार्रवाई से बिजली चोरी पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।
वर्ष 2002 के मुकाबले बिजली वितरण में बड़ा सुधार
दिल्ली में वर्ष 2002 में बिजली वितरण का काम निजी कंपनियों को सौंपा गया था। उस समय बीएसईएस के क्षेत्रों में बिजली वितरण के दौरान होने वाला कुल नुकसान लगभग 55 प्रतिशत और टाटा पावर के क्षेत्र में करीब 53 प्रतिशत बताया गया था। वित्त वर्ष 2025-26 में संबंधित कंपनियों के आंकड़े घटकर लगभग 5 से 6 प्रतिशत के बीच पहुंच गए हैं। यह लंबे समय में बिजली वितरण व्यवस्था में हुए सुधार को दर्शाता है, हालांकि मौजूदा नुकसान को और कम करने की जरूरत बनी हुई है।
बिजली चोरी रोकने के लिए तेज की जा रही कार्रवाई
दिल्ली में बिजली चोरी रोकने के लिए बिजली वितरण कंपनियां सरकार और पुलिस की सहायता से कार्रवाई कर रही हैं। बिजली के मीटरों की जांच, अवैध कनेक्शनों की पहचान और अनियमित बिजली इस्तेमाल पर निगरानी जैसे उपाय इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं। बिजली चोरी से कंपनियों को आर्थिक नुकसान होता है और इसका असर बिजली वितरण व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में नियमित जांच और नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)