दिल्ली दंगा 2020 पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सभी याचिकाएं खारिज
दिल्ली हाई कोर्ट ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे और वर्ष 2019 की जामिया हिंसा से जुड़ी सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने विशेष जांच दल गठित करने, कथित भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और कथित लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को स्वीकार नहीं किया। याचिकाओं में दिल्ली पुलिस की जांच और भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 5 अक्टूबर 2026
दिल्ली हाई कोर्ट ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे और वर्ष 2019 की जामिया हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दंगों की विशेष जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने, कथित भड़काऊ भाषणों को लेकर कुछ नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और कथित लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को खारिज कर दिया। याचिकाओं में दिल्ली पुलिस की जांच और भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे।
विशेष जांच दल गठित करने की मांग खारिज
दिल्ली हाई कोर्ट ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की स्वतंत्र या विशेष जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने की मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत के सामने दंगों की जांच के तरीके और पुलिस की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ताओं ने मौजूदा जांच से अलग विशेष जांच की मांग की थी। अदालत ने इन मांगों से संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया।
कथित भड़काऊ भाषणों को लेकर प्राथमिकी की मांग भी खारिज
याचिकाओं में कथित तौर पर भड़काऊ बयान देने वाले नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी। इनमें भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग भी शामिल थी। याचिकाकर्ताओं ने इन बयानों को वर्ष 2020 की हिंसा से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।
पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग नहीं मानी गई
याचिकाओं में उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई थी, जिन पर दंगों के दौरान कथित रूप से लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए थे। याचिकाकर्ताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली और हिंसा से निपटने के तरीके पर सवाल उठाए थे। अदालत से संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था। हाई कोर्ट ने इस मांग को भी स्वीकार नहीं किया।
2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की थी हिंसा
वर्ष 2020 की फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन और विरोध को लेकर तनाव बढ़ गया था। 23 फरवरी के आसपास जाफराबाद और मौजपुर सहित कई क्षेत्रों में स्थिति हिंसक हो गई थी। इसके बाद पथराव, आगजनी और हिंसक झड़पों की घटनाएं कई इलाकों तक फैल गई थीं। हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा था।
हिंसा में 53 लोगों की हुई थी मौत
वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों में खुफिया ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा समेत कुल 53 लोगों की मौत हुई थी। हिंसा के दौरान 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। कई घरों, दुकानों, वाहनों और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई थी। दंगों के बाद हिंसा की जांच और पुलिस की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
2019 की जामिया हिंसा का मामला भी याचिकाओं में शामिल था
याचिकाओं में वर्ष 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के आसपास हुई हिंसा की जांच का मुद्दा भी उठाया गया था। नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में प्रदर्शन के दौरान 15 दिसंबर 2019 को स्थिति बिगड़ गई थी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव के बाद पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थीं। पुलिस की कार्रवाई और परिसर में प्रवेश को लेकर भी आरोप लगाए गए थे।
जामिया परिसर में पुलिस कार्रवाई पर उठे थे सवाल
जामिया हिंसा के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के आरोप सामने आए थे। इसके बाद पुलिस के जामिया परिसर में प्रवेश और छात्रों के साथ कथित कार्रवाई को लेकर विवाद हुआ था। परिसर की पुस्तकालय समेत अन्य स्थानों पर पुलिस कार्रवाई के आरोप भी लगाए गए थे। इन्हीं घटनाओं की जांच को लेकर अदालत में अलग से मांगें रखी गई थीं।
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