गोंडा में जानकी भारती ने 400 महिलाओं को दिया रोजगार:3 वर्षों से चप्पल बनाने का काम कर रही, पैसा दिलाकर बनाया आत्मनिर्भर
दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम से कोई भी महिला अपनी किस्मत स्वयं लिख सकती है। इस बात को सच साबित कर दिखाया है गोंडा के मुजेहना विकासखंड के त्रिलोकपुर गांव की निवासी जानकी भारती ने। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली जानकी ने तीन वर्ष पूर्व जो खुद आत्मनिर्भरता का सपना देखा था, वह सपना आज एक सफल उद्योग का रूप ले चुका है। अब यह पूरी तरीके से सफल महिला उद्यमी बन चुकी है उनके इस प्रयास से न केवल उनका जीवन बदला,बल्कि 300 से 400 ग्रामीण महिलाओं को भी आजीविका का ठोस जरिया मिला है। लगभग 36 महीने पहले जानकी ने स्वजन एवं ‘जानकी स्वयं सहायता समूह’ से ₹30,000 की पूंजी जुटाकर एक साधारण मशीन के जरिए फुटवियर निर्माण प्रारंभ किया था। शुरुआती दौर में उन्हें प्रति माह 4 से 5 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा होता था। उन्होंने इस बचत को फिजूलखर्ची में गंवाने के बजाय संचित किया और बाद में आधुनिक, उच्च क्षमता वाली यूनिट स्थापित की। वर्तमान में वह हर महीने ₹20,000 से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। थोक तथा फुटकर दोनों स्तरों पर बेचे इनके द्वारा निर्मित उत्पाद गोंडा सहित पड़ोसी जनपद बलरामपुर व आसपास के बाजारों में थोक तथा फुटकर दोनों स्तरों पर बेचे जा रहे हैं। समूह सखी के रूप में दायित्व निभाते हुए जानकी ने क्षेत्र की वंचित व बेरोजगार नारियों को हुनरमंद बनाया। उन्होंने सरकारी योजनाओं के माध्यम से कई सदस्यों को ऋण उपलब्ध कराया, जिससे कोई किराना दुकान चला रही है, तो कोई ई-रिक्शा के जरिए दैनिक कमाई कर रही है। इससे जुड़ी महिलाएं अब अपने बच्चों को अच्छे विद्यालयों में शिक्षा दिला रही हैं। खुद भी अपने परिवार का पालन पोषण करने के साथ-साथ अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रही हैं आवश्यकता पड़ने पर उनके द्वारा अपने पति को पैसा भी दिया जा रहा है। जानकी का मानना है कि हर महिला को स्वावलंबी होना चाहिए ताकि वह घर की चहारदीवारी से बाहर निकलकर समाज में पहचान बना सके। सशक्त प्रतीक बनकर उभरा उनका यह लघु उद्यम आज महिला सशक्तीकरण का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। कहां महिलाएं खुद अपने पैरों पर खड़ी होकर काम करें वहीं जानकी भारती ने बताया कि मेरे समूह का नाम जानकी स्वयं सहायता समूह है हम त्रिलोकपुर से हैं। मैंने चप्पल बनाने की स्वयं मशीन लगाई है सारी महिलाओं के साथ मिलकर मैं काम कर रही हूं कई महिलाओं को हमने पैसा भी दिलाया है वह खुद का अपना किराना स्टोर का दुकान भी कर रही हैं। एक समूह की महिलाओं को मैंने पैसा दिला दिया है वह ऑटो रिक्शा निकाल कर के अपना काम कर रहे हैं हम समूह सखी भी हैं। काफी समूह की महिलाओं को हमने जोड़ा है मेरे परिवार को लेकर के आय व्यवस्था सब ठीक है मैं बीते 3 सालों से यह काम कर रही हूं। अपने पैरों पर खड़े होकर के कुछ काम करें जो बेरोजगार महिलाएं हैं उनको हमें ही कहना चाहेंगे वह भी लोग अपने पैरों पर खड़ी हो अपने पैरों पर खड़े होकर के कुछ काम करें। 300 से लेकर के 400 महिलाओं को हमने अब तक समूह में जोड़ करके उन्हें हमने रोजगार दिया है जो अलग-अलग रोजगार कर रही हैं।
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