दिल्ली में 33 लाख मतदाताओं को नोटिस, नाम आया तो क्या करें

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 33 लाख से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार नोटिस मिलने का मतलब नाम कटना नहीं है। संबंधित मतदाताओं को 29 अक्टूबर 2026 तक अपना जवाब और आवश्यक दस्तावेज जमा करने का अवसर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और मतदाताओं की सहायता को लेकर चुनाव आयोग से सवाल किए हैं।

Sep 22, 2026 - 17:14
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दिल्ली में 33 लाख मतदाताओं को नोटिस, नाम आया तो क्या करें

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 सितंबर 2026

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। 33 लाख से अधिक मतदाताओं को अलग-अलग कारणों से नोटिस भेजे गए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि नोटिस का मतलब मतदाता का नाम हटना नहीं है, बल्कि संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और मतदाताओं की सहायता को लेकर चुनाव आयोग से सवाल किए हैं।

दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण की शुरुआत कैसे हुई

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया 30 जून 2026 से शुरू हुई थी। इसके तहत बूथ स्तर के अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं से संबंधित जानकारी जुटाई और अभिलेखों का मिलान किया। इसके बाद 31 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची जारी की गई, जिसमें पहले की तुलना में बड़ी संख्या में नाम शामिल नहीं थे।प्रारूप सूची में करीब 97.54 लाख मतदाताओं के नाम शामिल किए गए, जबकि पुनरीक्षण शुरू होने के समय दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे। नामों में अंतर के पीछे स्थान बदलने, मतदाता का पता नहीं चलने, मृत्यु और एक से अधिक जगह नाम दर्ज होने जैसे कारण बताए गए हैं। इसी प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए।

33 लाख लोगों को नोटिस क्यों भेजे गए

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रारूप मतदाता सूची में शामिल करीब 33.1 लाख लोगों को नोटिस भेजे गए हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है जिनकी जानकारी वर्ष 2002 की पिछली पुनरीक्षण सूची से सीधे नहीं मिल पाई। इसे मानचित्रण नहीं होने की स्थिति के रूप में बताया गया है।इसके अलावा करीब 19.33 लाख मतदाताओं के नाम, उम्र या माता-पिता से जुड़ी जानकारी में अंतर पाए जाने की बात सामने आई है। चुनाव आयोग के अनुसार इन मामलों की जांच की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी यह सवाल उठाया है कि ऐसे नोटिस जारी करने का आधार क्या है और क्या प्रक्रिया सभी मामलों में उचित तरीके से अपनाई गई।

नोटिस मिलने का मतलब नाम कट जाना नहीं है

अगर किसी मतदाता को विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नोटिस मिला है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उसका नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटा दिया गया है। नोटिस का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति से आवश्यक जानकारी और दस्तावेज लेकर उसकी स्थिति स्पष्ट करना है।मतदाता को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज जमा करने का अवसर दिया जा रहा है। इसलिए नोटिस मिलने के बाद घबराने के बजाय संबंधित अधिकारी के सामने समय पर अपना जवाब देना जरूरी है। किसी भी दावे या आपत्ति के मामले में उपलब्ध दस्तावेजों को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है।

नोटिस मिला है तो आपको क्या करना चाहिए

यदि आपको नोटिस मिला है तो सबसे पहले उसमें दिए गए कारण को ध्यान से पढ़ें और यह देखें कि आपसे किस प्रकार की जानकारी या दस्तावेज मांगे गए हैं। इसके बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना जवाब चुनाव संबंधी आधिकारिक माध्यम से जमा करें।उपलब्ध जानकारी के अनुसार मतदाताओं को 29 अक्टूबर 2026 तक जवाब देने का अवसर दिया गया है। जवाब ऑनलाइन माध्यम से दाखिल करने के साथ-साथ संबंधित बूथ स्तर के अधिकारी या सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के समक्ष दस्तावेज जमा करने का विकल्प भी बताया गया है। जरूरत पड़ने पर समय सीमा बढ़ाए जाने की संभावना भी बताई गई है।

कचरा उठाने वाली गाड़ियों से क्यों दी जा रही जानकारी

दिल्ली में बड़ी संख्या में मतदाताओं तक पुनरीक्षण से जुड़ी जानकारी पहुंचाने के लिए चुनाव अधिकारियों ने अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया है। इसी अभियान के तहत कचरा उठाने वाली गाड़ियों के माध्यम से भी लोगों को नोटिस और जवाब देने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जा रहा है।इसके अलावा समाचार पत्रों और रेडियो संदेशों के माध्यम से भी लोगों को जानकारी देने की व्यवस्था की गई है। रविवार को विशेष शिविर लगाने की बात भी सामने आई है, जहां मतदाता अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को प्रक्रिया की जानकारी देना है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से क्या कहा

22 सितंबर 2026 को इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग से सवाल किए। रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने बड़ी संख्या में जारी नोटिसों के आधार और मतदाताओं की सहायता से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए। अदालत की ओर से यह भी सुझाव दिया गया कि बूथ स्तर के अधिकारी केवल नोटिस देने तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर मतदाताओं को प्रक्रिया समझाने और सहायता करने की भूमिका भी निभाएं। अदालत ने आम सवालों के जवाब तैयार कर उन्हें व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

चुनाव आयोग की ओर से क्या व्यवस्था की गई

चुनाव आयोग की ओर से बड़ी संख्या में बूथ स्तर के अधिकारियों और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को इस प्रक्रिया में लगाया गया है। आयोग का कहना है कि वह मामलों की जांच कर रहा है और नोटिस जारी होने के बाद मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है।मामला अभी न्यायिक निगरानी में भी है और सुप्रीम कोर्ट में इस प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर सुनवाई चल रही है। इसलिए मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अपने नोटिस को नजरअंदाज न करें और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समय पर जवाब तथा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं।

मतदाताओं के लिए जरूरी बातें

यदि आपको नोटिस मिला है तो उसके कारण को ध्यान से समझें और अपने पुराने मतदाता संबंधी दस्तावेज तैयार रखें। अपना पता, नाम, उम्र और परिवार से जुड़ी जानकारी सही होने की जांच करें। किसी भी गलती की स्थिति में संबंधित अधिकारी के सामने उसे स्पष्ट करें।सबसे जरूरी बात यह है कि नोटिस को अंतिम फैसला न समझें। यह अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर भी है। अंतिम प्रक्रिया के दौरान मतदाता द्वारा समय पर जवाब देना और उपलब्ध प्रमाण प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण रहेगा।

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