डिजिटल उत्पीड़न के खिलाफ शिक्षिका का कलक्ट्रेट में अनशन:शिकायत के दो माह बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
शामली के कांधला ब्लॉक के मखमलपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर-2 और प्राथमिक विद्यालय नंबर-2 नाला में तैनात शिक्षिका मंगलवार सुबह करीब 10 बजे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं और अनशन शुरू कर दिया। शिक्षिका का आरोप है कि डिजिटल उत्पीड़न, चरित्र-हनन और धमकियों को लेकर 29 जुलाई को पुलिस और बेसिक शिक्षा विभाग को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत के साथ व्हाट्सऐप चैट, स्क्रीनशॉट, वीडियो समेत डिजिटल साक्ष्य भी दिए गए, लेकिन दो माह से ज्यादा समय बीतने के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। शिक्षिका ने 5 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट जारी कर मामला सार्वजनिक किया था। उन्होंने प्रशासन को सोमवार तक कार्रवाई का समय दिया था। कार्रवाई नहीं होने पर मंगलवार से कलक्ट्रेट में अनशन शुरू कर दिया। शिक्षिका का कहना है कि जब तक शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। व्हाट्सऐप ग्रुप में चरित्र-हनन का आरोप शिक्षिका का आरोप है कि कुछ व्हाट्सऐप ग्रुपों में उनके खिलाफ लगातार आपत्तिजनक और अशोभनीय टिप्पणियां की गईं। उन्होंने डिजिटल माध्यम से उत्पीड़न और विरोध करने पर धमकियां देने का भी आरोप लगाया है। शिक्षिका का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों को सिर्फ मौखिक शिकायत नहीं दी, बल्कि कथित घटनाओं से जुड़े स्क्रीनशॉट, चैट और वीडियो जैसे डिजिटल साक्ष्य भी उपलब्ध कराए हैं। शिक्षिका ने कहा कि वह रोज बच्चों को अनुशासन, संस्कार, सम्मान और मर्यादा की सीख देती हैं। ऐसे में एक महिला शिक्षक को ही कार्यस्थल से जुड़े मामले में कथित अपमान और डिजिटल उत्पीड़न का सामना करना पड़े और शिकायत के बाद भी कार्रवाई के लिए धरने पर बैठना पड़े, यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इसे सिर्फ अपने सम्मान की नहीं, बल्कि हर कामकाजी महिला और शिक्षक के स्वाभिमान की लड़ाई बताया।
मुख्यमंत्री से भी कार्रवाई की मांग शिक्षिका ने 5 अक्टूबर की सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री से भी कार्रवाई की गुहार लगाई थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि किसी कामकाजी महिला को अपने सम्मान और सुरक्षा के लिए पुलिस और प्रशासन के चक्कर लगाने पड़ें तो आम महिलाओं की सुरक्षा को लेकर क्या संदेश जाएगा। उन्होंने शिकायत की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिक्षक संगठनों से जुड़े कुछ पदाधिकारियों पर भी उन्होंने सहकर्मियों के प्रति आपत्तिजनक व्यवहार के आरोप लगाए हैं। POSH, IT Act और BNS की धाराओं का हवाला शिक्षिका ने अपनी शिकायत और सोशल मीडिया पोस्ट में कथित डिजिटल उत्पीड़न के संबंध में POSH Act, IT Act की धारा 66E और 67 तथा BNS की धाराओं 74 और 78 का उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि आधिकारिक ड्यूटी से जुड़े वीडियो का इस्तेमाल कर अशोभनीय टिप्पणियां की गईं। उन्होंने एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब पुलिस और बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से शिकायत पर की गई कार्रवाई और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
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