दिल्ली जाने से रोके जाने पर भाकियू कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन:अवैरनी और गढ़सौली कैंप कार्यालयों पर की नारेबाजी, पुलिस ने समझाकर शांत कराया

Oct 10, 2026 - 16:33
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दिल्ली जाने से रोके जाने पर भाकियू कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन:अवैरनी और गढ़सौली कैंप कार्यालयों पर की नारेबाजी, पुलिस ने समझाकर शांत कराया
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन और महापंचायत में शामिल होने से रोके जाने पर मथुरा में भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को अवैरनी और गढ़सौली स्थित कैंप कार्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर नाराजगी जताई और दिल्ली कूच करने पर अड़े रहे। बाद में बलदेव के थानाध्यक्ष और पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाकर शांत कराया। भाकियू चढ़ूनी के पदाधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में युवाओं के संगठन सीजेपी के प्रस्तावित आंदोलन के समर्थन में संगठन के कार्यकर्ता शामिल होने जा रहे थे। आरोप है कि पुलिस ने नौ अक्टूबर की दोपहर से ही संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों को उनके घरों में नजरबंद कर दिया, ताकि वे दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल न हो सकें। प्रदेश प्रवक्ता एवं आगरा मंडल अध्यक्ष रामवीर सिंह तोमर, जिलाध्यक्ष संजय पाराशर और प्रदेश उपाध्यक्ष राजवीर सिंह ने कहा कि देश में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जनता और युवाओं के आंदोलन का समर्थन करना जरूरी है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार को शांतिपूर्ण आंदोलन से आखिर परेशानी क्यों है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रतन सिंह पहलवान ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज सुनने के बजाय पुलिस बल का सहारा लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे सरकार की घबराहट जाहिर होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी किसानों और युवाओं के अधिकारों की रक्षा तथा किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी। सरकार से युवाओं और किसानों के साथ संवाद कर उनकी मांगों का समाधान करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों की अनदेखी जारी रहने पर देशभर में आंदोलन और व्यापक होगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस दौरान मंडल प्रवक्ता हरिपाल सिंह परिहार, अशोक कुमार भरंगर, अंतराम शर्मा, प्रमोद रावत, रंजीत सिंह, बच्चू सिंह तोमर, अमर सिंह तोमर, दिनेश, श्याम सिंह, रामप्रकाश, कैलाश तुलसी और पिपेद सरपंच सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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