डीपीआरओ के खिलाफ 10 हजार का वारंट:हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं बना चकमार्ग, सुनवाई पर अधिकारी नहीं पहुंचे
बलरामपुर में चकमार्ग निर्माण के मामले में हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ। बुधवार शाम को सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से कोई अधिकारी अदालत में नहीं पहुंचा। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने डीपीआरओ गिरीश कुमार के खिलाफ 10 हजार रुपए का जमानती वारंट जारी किया। फरवरी में कोर्ट ने दिया था रास्ता बनाने का आदेश मामला उतरौला तहसील के परगना सादुल्लानगर के अहिरौली बुजुर्ग गांव का है। यहां के राम जियावन ने गाटा संख्या 840/0.049 पर स्थित चकमार्ग का निर्माण कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। इस रास्ते से परिषदीय विद्यालय जाने वाले बच्चे और ग्रामीण आवागमन करते हैं। बारिश में कीचड़ और जलभराव से परेशानी ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान रास्ते की स्थिति और खराब हो जाती है। कीचड़ और जलभराव के कारण बच्चों और ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी होती है। इसी समस्या को लेकर याची ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। 12 फरवरी को हुआ था याचिका का निस्तारण हाईकोर्ट ने 12 फरवरी 2026 को रिट याचिका का निस्तारण करते हुए संबंधित चकमार्ग का काम जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया था। याची के मुताबिक आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ 23 फरवरी को संबंधित अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भी दिया गया। इसके बाद भी रास्ते का निर्माण नहीं कराया गया। आदेश का पालन नहीं हुआ तो दाखिल की अवमानना याचिका चकमार्ग का निर्माण नहीं होने पर याची ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की। 21 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने नोटिस जारी किया। 23 सितंबर को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। सुनवाई में अधिकारी नहीं पहुंचे, वारंट जारी 23 सितंबर को मामले की सुनवाई हुई। पंचायत राज विभाग की ओर से कोई अधिकारी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। कोर्ट के रिकॉर्ड में नोटिस की तामीला पर्याप्त पाए जाने के बाद इसे गंभीरता से लिया गया। आदेश का अनुपालन नहीं होने और सुनवाई में अनुपस्थित रहने पर डीपीआरओ गिरीश कुमार के खिलाफ 10 हजार रुपए का जमानती वारंट जारी किया गया। दो जमानतदारों पर मिल सकेगी जमानत हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण की स्थिति में दो जमानतदार और समान राशि का व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत करने पर रिहाई की जा सकेगी। अगली सुनवाई में डीपीआरओ को स्वयं या अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होने का वचन भी देना होगा। डीपीआरओ की तैनाती को लेकर विभाग में स्थिति साफ नहीं मामले में डीपीआरओ गिरीश कुमार का नाम कोर्ट के रिकॉर्ड में सामने आया है। वहीं विभागीय स्तर पर उनकी तैनाती को लेकर पत्रावली खंगाली जा रही है। विभागीय जानकारी के मुताबिक फरवरी 2026 में श्रेया उपाध्याय बलरामपुर की डीपीआरओ थीं। अब वह हरदोई में तैनात हैं। वहीं गिरीश कुमार की बलरामपुर तैनाती का स्थानांतरण आदेश निरस्त हो चुका था और वह वर्तमान में संभल में तैनात हैं। पत्रावली खंगाल रहा विभाग अब विभाग यह पता कर रहा है कि हाईकोर्ट के आदेश के समय जिले में डीपीआरओ कौन थे। आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही 23 सितंबर को विभाग की ओर से कोई अधिकारी अदालत में क्यों उपस्थित नहीं हुआ, इसका भी पता लगाया जा रहा है। 28 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को होगी। इस तारीख पर डीपीआरओ को स्वयं या अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में उपस्थित होना होगा। कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा डीपीआरओ अशोक कुमार सचान ने बताया कि कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। मामले से संबंधित पत्रावली तलाश कर उसका अध्ययन किया जा रहा है। पूरी जानकारी के आधार पर हाईकोर्ट को स्थिति से अवगत कराया जाएगा।
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