दिव्या-मित्तल के काम की छाप लोगों के मन में है:व्यापारियों ने कहा- 2027 चुनाव में मिलेगा इसका लाभ, पूर्व IAS ने बनाई ‘जन नीति भारत’ पार्टी

Oct 15, 2026 - 20:00
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दिव्या-मित्तल के काम की छाप लोगों के मन में है:व्यापारियों ने कहा- 2027 चुनाव में मिलेगा इसका लाभ, पूर्व IAS ने बनाई ‘जन नीति भारत’ पार्टी
यूपी की पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने अपनी पार्टी बनाने का ऐलान किया है। पार्टी का नाम ‘जननीति भारत’ रखा है। गुरुवार दोपहर एक बजे वीडियो पोस्ट करके उन्होंने बताया कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में मिर्जापुर की सदर सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगी। दिव्या मित्तल ने नवरात्रि की पंचमी तिथि पर अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘जन नीति भारत’ की घोषणा कर 2027 के विधानसभा चुनाव में उतरने का ऐलान किया। सोशल मीडिया के जरिए पार्टी गठन की जानकारी सामने आने के बाद जिले में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनकी राजनीतिक पारी को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। कुछ लोग जिलाधिकारी रहते हुए उनके कामों और साफ-सुथरी छवि को उनकी ताकत मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि प्रशासनिक छवि को चुनावी समर्थन में बदलना आसान नहीं होगा। वहीं कौशल गुप्ता का मानना है कि जनसरोकार से जुड़े इस काम की छाप लोगों के मन में है और इसका लाभ उन्हें चुनाव में मिल सकता है। अब पढ़िए लोगों की प्रतिक्रियाएं… जनता का समर्थन तय करेगा राजनीतिक भविष्य श्री अग्रवाल नवयुवक समिति के अध्यक्ष नितिन अग्रवाल ने कहा कि दिव्या मित्तल नई पार्टी बनाकर राजनीतिक मैदान में उतरी हैं। अब यह जनता को तय करना है कि उन्हें कितना समर्थन मिलता है। उन्होंने कहा कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और चुनाव में जनता का फैसला ही सबसे महत्वपूर्ण होगा। लहुरियादह गांव में पेयजल पहुंचाने के काम का जिक्र कौशल गुप्ता ने कहा कि दिव्या मित्तल की साफ-सुथरी छवि का चुनाव पर असर पड़ सकता है। जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने हलिया विकासखंड के लहुरियादह गांव में पेयजल पहुंचाने का काम किया था। उनके मुताबिक, आजादी के 75 साल बाद भी गांव के लोगों को घरों तक पानी नहीं मिल पाया था। दिव्या मित्तल के प्रयासों से पहली बार लोगों को घर पर पानी उपलब्ध हुआ। कौशल गुप्ता का मानना है कि जनसरोकार से जुड़े इस काम की छाप लोगों के मन में है और इसका लाभ उन्हें चुनाव में मिल सकता है। राजेश चंद्र सर्राफ ने भी जिलाधिकारी के रूप में दिव्या मित्तल के कामकाज की सराहना की। उन्होंने कहा कि वह जनता के बीच सहजता से मिलती-जुलती थीं और उनकी छवि अच्छी रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। राजनीतिक मैदान में उनकी सफलता का आकलन अभी करना जल्दबाजी होगी। चुनावी मैदान में जनता के समर्थन पर नजर व्यापारी संतोष गुप्ता ने कहा कि आईएएस अधिकारी के रूप में दिव्या मित्तल ने जिले में अच्छा काम किया और आम जनता की समस्याओं को समझने का प्रयास किया। अब नई पार्टी बनाकर उन्होंने चुनावी मैदान में कदम रखा है। उन्होंने कहा कि जैसे कोई खिलाड़ी पहली गेंद पर छक्का जड़ देता है, तो कोई पहली ही गेंद पर क्लीन बोल्ड हो जाता है। इसी तरह राजनीति में भी नतीजा जनता के समर्थन और चुनावी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। रवि गुप्ता ने कहा कि जिलाधिकारी के रूप में दिव्या मित्तल की छवि अच्छी रही है और इसका असर चुनाव में दिखाई दे सकता है। उनके मुताबिक, वह चुनावी मैदान में अच्छी टक्कर दे सकती हैं। ‘जन नीति भारत’ के गठन के साथ दिव्या मित्तल ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है। अब 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी पूर्व प्रशासनिक छवि और जनहित से जुड़े कामों को कितना जनसमर्थन मिलता है, यह देखना होगा। 2013 बैच की IAS रहीं दिव्या ने 30 अगस्त को इस्तीफा दिया था। उस समय वह राजस्व विभाग में विशेष सचिव थीं। 14 सितंबर को उनका इस्तीफा मंजूर हो गया।‌ दिव्या ने IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बेंगलुरु से MBA करने के बाद लंदन में लाखों के पैकेज वाली नौकरी की थी। 4 दिन पहले राजनीति में एंट्री के बाद पहली बार मिर्जापुर पहुंची थीं इससे पहले, दिव्या मित्तल नवरात्रि के पहले दिन यानी रविवार को मिर्जापुर पहुंची थीं। राजनीति में आने का ऐलान करने के बाद यह उनका पहला दौरा था। समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया था। ‘दिव्या दीदी जिंदाबाद’ के नारे लगे थे। उन पर फूल बरसाए थे। लोगों ने जब पैर छूए तो दिव्या भावुक हो गई थीं। दिव्या ने लोगों से कहा था- आप लोगों ने मुझे फूल-मालाओं से तौल दिया। यह आप लोगों का प्यार है। हर बार भावुक कर देते हो। लगता है कि मिर्जापुर ने मुझे रुलाने का ठेका ले रखा है। मिर्जापुर को हमेशा हंसते रहना चाहिए। किसी को रोना नहीं है। मिर्जापुर की डीएम रहीं, लहुरियादह में पानी पहुंचाया था दिव्या सितंबर, 2022 में मिर्जापुर की डीएम बनी थीं। वहां ग्रामीण इलाकों में जन-चौपाल और पीने के पानी से जुड़े कामों को लेकर उनकी चर्चा हुई थी। लहुरियादह गांव में पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की पहल भी उनके कार्यकाल में हुई थी। मिर्जापुर से तबादले के बाद भी उनकी विदाई चर्चा में रही। स्थानीय लोगों की मौजूदगी में उन्हें विदाई दी गई थी। इसके बाद देवरिया में भी उनका कार्यकाल चर्चा में रहा। वहां जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच अधिकारों को लेकर हुई बहस ने उन्हें फिर सुर्खियों में ला दिया था।

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