डमी से दो साल पुराने घटनाक्रम का पुनर्निर्माण:हाईकोर्ट ने की सख्ती, मर्डर मिस्ट्री सुलझाने को फोरेंसिक टीम ने किया सीन रीक्रिएट
महराजगंज के घुघली क्षेत्र के पौहरिया गांव निवासी फैजुल्लाह की मौत का मामला करीब दो साल बाद फिर चर्चा में है। रेलवे ट्रैक किनारे घायल मिले फैजुल्लाह की मौत को लेकर उठे सवालों के बीच फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर डमी के जरिए घटनाक्रम का पुनर्निर्माण किया। यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हुई है। 11 अक्टूबर 2024 को फैजुल्लाह रेलवे ट्रैक के किनारे गंभीर घायल हालत में मिले थे। उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां 13 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई थी। परिजनों ने गांव के चार लोगों पर हत्या का आरोप लगाकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। पुलिस की अंतिम रिपोर्ट में मौत को रेल दुर्घटना बताया गया, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सड़क दुर्घटना को मौत की वजह बताया गया था। रेलवे ट्रैक किनारे घायल मिले थे फैजुल्लाह 11 अक्टूबर 2024 को फैजुल्लाह रेलवे ट्रैक के किनारे गंभीर हालत में मिले थे। परिजन उन्हें इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन दो दिन बाद 13 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए गांव के चार लोगों के खिलाफ जांच की मांग की थी। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट में फैजुल्लाह की मौत को रेल दुर्घटना का परिणाम बताया। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह सड़क दुर्घटना बताई गई। दोनों रिपोर्ट में अलग-अलग निष्कर्ष सामने आने से मामला और उलझ गया। परिजन पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद घटनास्थल पहुंची टीम परिजनों की याचिका पर मामले की जांच को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। निर्धारित समय में जांच पूरी नहीं होने पर अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करते हुए नोटिस जारी किया। इसके बाद करीब दो साल बाद फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची और डमी रखकर घटनाक्रम का रीक्रिएशन किया। वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट पर टिकी अगली सुनवाई फोरेंसिक विशेषज्ञों ने डमी के जरिए यह समझने का प्रयास किया कि फैजुल्लाह को चोटें किन परिस्थितियों में लगी होंगी और घटना का वास्तविक स्वरूप क्या था। टीम ने मौके पर तकनीकी और वैज्ञानिक तथ्यों की भी जांच की। परिजनों को उम्मीद है कि वैज्ञानिक जांच से सच्चाई सामने आएगी। अब 30 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और फोरेंसिक रिपोर्ट पर सभी की नजर है।
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