दो हत्याकांड में फांसी पर बोले युवा वकील- ऐतिहासिक फैसला:नीला ड्रम और सांपकांड में दोषियों को फांसी, युवा वकील बोले- प्रेम में हत्या का रास्ता चुनना गलत

Oct 16, 2026 - 18:55
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दो हत्याकांड में फांसी पर बोले युवा वकील- ऐतिहासिक फैसला:नीला ड्रम और सांपकांड में दोषियों को फांसी, युवा वकील बोले- प्रेम में हत्या का रास्ता चुनना गलत
मेरठ में दो चर्चित हत्याकांड में अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद फैसलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नीला ड्रम हत्याकांड में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाया गया। वहीं, सांपकांड में अमित कश्यप की हत्या के मामले में उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को भी फांसी की सजा सुनाई गई। इन दोनों मामलों को लेकर युवा अधिवक्ताओं ने अपनी राय रखी। उन्होंने दोनों फैसलों का समर्थन करते हुए इन्हें ऐतिहासिक बताया और कहा कि ऐसे मामलों में कड़ी सजा मिलने से समाज में अपराध के खिलाफ संदेश जाएगा। अधिवक्ता हैविन खान ने कहा कि दोनों हत्याकांड में सामने आए तथ्यों और अदालत के फैसलों से समाज को सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले समाज में नजीर बन सकते हैं। इससे ऐसी मानसिकता रखने वाले लोगों को अपराध करने से पहले उसके परिणामों के बारे में सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा। अपराध करने वाले महिला हों या पुरुष, कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। प्रेम करते हैं तो परिवार को समझाएं, किसी का घर बर्बाद न करें अधिवक्ता हैविन खान ने कहा कि अगर कोई लड़का या लड़की किसी से प्रेम करता है, तो उसे अपने परिवार को समझाने का प्रयास करना चाहिए। बालिग होने पर संविधान और कानून के तहत अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार भी है। उन्होंने कहा कि प्रेम के नाम पर किसी का घर बर्बाद करना या किसी की जान लेना सही नहीं है। उन्होंने अमित कश्यप हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले में तीन बच्चे हैं। पिता की हत्या हो गई और मां को फांसी की सजा सुनाई गई है। ऐसे में बच्चों के भविष्य पर भी असर पड़ेगा। किसी भी रिश्ते में कदम उठाने से पहले उसके परिणामों के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को उसी व्यक्ति से विवाह करना चाहिए, जिसके साथ वे जीवन बिताना चाहते हैं। हैविन खान ने कहा कि शादी के बाद पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास और पवित्रता होनी चाहिए। उन्होंने नीला ड्रम हत्याकांड का उदाहरण देते हुए कहा कि सौरभ राजपूत और मुस्कान की लव मैरिज हुई थी। इसके बावजूद भी ऐसा गंभीर अपराध हुआ। उन्होंने कहा कि शादीशुदा जीवन में किसी अन्य व्यक्ति के प्रति आकर्षण होने पर भी हत्या जैसा कदम उठाना किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया पर दिखावे वाली जिंदगी का प्रभाव भी दिखाई देता है। युवाओं को इससे बाहर निकलकर वास्तविक रिश्तों, जिम्मेदारियों और उनके परिणामों को समझना चाहिए। अधिवक्ता पुष्कर कौशिक बोले- दोनों फैसले पूरी तरह सही युवा अधिवक्ता पुष्कर कौशिक ने दोनों मामलों में फांसी की सजा का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वह दोनों फैसलों को पूरी तरह सही मानते हैं। उनके मुताबिक, समाज में जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही थीं, उन्हें देखते हुए अदालत के ये फैसले महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने दोनों फैसलों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कानून के तहत कड़ी सजा मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर शादीशुदा जीवन में किसी को भी किसी अन्य व्यक्ति से प्रेम हो जाता है तो हत्या करना समाधान नहीं हो सकता। चाहे पीड़ित पुरुष हो या महिला, किसी की जान लेने को प्रेम का परिणाम नहीं माना जा सकता। पुष्कर कौशिक ने कहा कि यदि किसी को वैवाहिक रिश्ता नहीं निभाना है, तो वह कानूनी तरीके से तलाक ले सकता है। जफर आलम बोले- ऐसे फैसलों से शादी को लेकर डर कम होगा अधिवक्ता जफर आलम ने कहा कि दोनों मामलों में अदालत के फैसलों का वह समर्थन करते हैं। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाओं के कारण कुछ लोगों के मन में शादी और रिश्तों को लेकर डर पैदा हो सकता है। ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के तहत फैसले आने से लोगों का कानून पर भरोसा मजबूत हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि अपराध के मामलों में दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलती रहे, तो समाज में यह संदेश जाएगा कि अपराध का परिणाम भुगतना पड़ता है। इससे लोग शादी और रिश्तों को लेकर पैदा होने वाले डर से बाहर निकलने का प्रयास कर सकते हैं। हालांकि, हर रिश्ते में आपसी विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी को बनाए रखना भी जरूरी है। सोशल मीडिया से घटनाओं का असर तेजी से फैलता है जफर आलम ने कहा कि आज किसी घटना की जानकारी बहुत कम समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच जाती है। इसका असर भी तेजी से दिखाई देता है। किसी घटना का प्रभाव सकारात्मक हो या नकारात्मक, सोशल मीडिया के माध्यम से उसका संदेश समाज के बड़े हिस्से तक पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सोशल मीडिया पर चर्चा के दौरान लोगों को जिम्मेदारी से अपनी बात रखनी चाहिए। घटनाओं से सबक लेते हुए रिश्तों, कानून और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझना जरूरी है। कार्तिक बोले- समाज में गिरावट रोकने के लिए जरूरी हैं ऐसे फैसले अधिवक्ता कार्तिक ने दोनों फैसलों को ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि समाज में एक-दूसरे के जीवन के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता कम होने की चिंता दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि केवल महिलाओं द्वारा अपने पतियों की हत्या के मामले सामने आते हैं, बल्कि पुरुषों द्वारा अपनी पत्नियों के खिलाफ हिंसा और हत्या के मामले भी होते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के जीवन की कीमत समझना जरूरी है। समाज में आ रही इस तरह की गिरावट को रोकने के लिए कानून के अनुसार कड़ी सजा और न्यायिक फैसलों की अहम भूमिका है। कार्तिक ने कहा कि मेरठ की अदालत द्वारा लगातार दो चर्चित मामलों में मृत्युदंड सुनाए जाने से एक बड़ा संदेश गया है। ऐसे मामलों में कानून के तहत निष्पक्ष सुनवाई और न्याय सुनिश्चित होना चाहिए। युवा अधिवक्ताओं ने कहा- रिश्तों में विवाद का समाधान कानून के रास्ते से निकालें दोनों मामलों पर चर्चा के दौरान युवा अधिवक्ताओं ने कहा कि प्रेम, विवाह या वैवाहिक जीवन में विवाद होने पर हत्या जैसा कदम उठाना किसी भी तरह उचित नहीं है। यदि पति-पत्नी साथ नहीं रहना चाहते, तो वे कानूनी विकल्प अपना सकते हैं। किसी भी व्यक्ति को अपने जीवनसाथी या किसी अन्य व्यक्ति की जान लेने का अधिकार नहीं है।

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