दरभंगा दुर्गा पंडाल में दिखी मीनाक्षी मंदिर की झलक:ध्वनि आधारित लाइटिंग बनी आकर्षण, 6 महीने में 25 लोगों ने मिलकर किया तैयार
संगम नगरी में दुर्गा पूजा के दौरान दरभंगा दुर्गा पूजा कमेटी का पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस बार पंडाल को तमिलनाडु के मदुरै स्थित प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया है। दक्षिण भारतीय मंदिरों की भव्य वास्तुकला, देवी-देवताओं की आकर्षक आकृतियां और विशेष ध्वनि आधारित लाइटिंग पंडाल की खूबसूरती में चार चांद लगा रही हैं। खास बात यह है कि ध्वनि पर आधारित लाइटिंग लोगों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन रही है। रोशनी और ध्वनि के तालमेल से पंडाल का नजारा और भी आकर्षक दिखाई देता है। इसे देखने के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। कमेटी के सचिव देवव्रत बसु ने बताया कि इस बार पंडाल की थीम तय करने के लिए मार्च-अप्रैल से ही तैयारी शुरू कर दी गई थी। अलग-अलग क्षेत्रों की वास्तुकला पर विचार करने के बाद मीनाक्षी मंदिर को आधार बनाया गया। मंदिर के बाहरी हिस्से में हिंदू पौराणिक कथाओं से जुड़े देवी-देवताओं की प्रतिमाओं से प्रेरित कलाकृतियां सजाई गई हैं। दक्षिण भारतीय मंदिरों की पहचान मानी जाने वाली भव्य संरचना और कलात्मक स्वरूप को उकेरने पर विशेष ध्यान दिया गया है। देवव्रत बसु के मुताबिक, पंडाल के बाहरी हिस्से के साथ अंदरूनी सजावट को भी मंदिर की मूल बनावट के अनुरूप तैयार करने का प्रयास किया गया है। सीमित जगह होने के बावजूद इंटीरियर को इस तरह तैयार किया गया है कि श्रद्धालुओं को मदुरै के मीनाक्षी मंदिर जैसा एहसास हो। ध्वनि आधारित लाइटिंग इस अनुभव को और खास बना रही है। कमेटी सचिव ने बताया कि पंडाल की परिकल्पना मार्च-अप्रैल में तैयार की गई थी। मौके पर पंडाल को खड़ा करने में करीब सवा महीने का समय लगा। इससे पहले इसके अलग-अलग हिस्सों को तैयार करने में लगभग 10 कारीगरों और कलाकारों ने काम किया। फाइनल फिनिशिंग और इंस्टॉलेशन के लिए 15 अन्य लोगों ने योगदान दिया। इस तरह करीब छह महीने की प्रक्रिया में लगभग 25 लोगों की मेहनत शामिल रही। मीनाक्षी मंदिर की थीम के जरिए कमेटी ने श्रद्धालुओं को दक्षिण भारत की समृद्ध मंदिर कला और संस्कृति से परिचित कराने का प्रयास किया है।
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