एबीवीपी के प्रदर्शन से कुलपति गेट से वापस लौटे:लखीमपुर में 62 डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों संग बैठक टली, कॉलेज प्रशासन ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण
लखीमपुर-खीरी में युवराज दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय (वाईडी कॉलेज) में शनिवार को प्रस्तावित शैक्षिक बैठक एबीवीपी से जुड़े छात्रों के विरोध प्रदर्शन के चलते नहीं हो सकी। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी जिले में पहली बार महाविद्यालय पहुंचे थे। उन्हें जिले के करीब 62 डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों और प्रबंध तंत्र के प्रतिनिधियों के साथ शैक्षिक समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा करनी थी। हालांकि मुख्य गेट पर प्रदर्शन के कारण कुलपति की कार परिसर में प्रवेश नहीं कर सकी और उन्हें वापस लौटना पड़ा। कॉलेज प्रशासन के मुताबिक, कुलपति के पहुंचने से पहले एबीवीपी से जुड़े छात्र मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करने लगे। कुलपति के पहुंचने पर छात्रों ने मुख्य गेट पर ही ज्ञापन लेने की मांग की।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि प्राचार्य और शिक्षकों ने छात्रों से कुलपति को परिसर में प्रवेश करने देने की अपील की और बैठक के बाद उनकी समस्याएं सुनकर ज्ञापन लेने का आश्वासन दिया, लेकिन छात्र मुख्य गेट पर ही ज्ञापन देने की मांग करते रहे। इसके बाद कुलपति की कार मुख्य गेट से वापस लौट गई। बैठक में जिले के 62 डिग्री कॉलेजों से जुड़े शैक्षिक विषयों, विद्यार्थियों की समस्याओं और उच्च शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित थी। पुलिस व्यवस्था पर कॉलेज प्रशासन ने उठाए सवाल कॉलेज प्रशासन ने घटना को लेकर पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। प्रशासन का कहना है कि कुलपति के कार्यक्रम की सूचना पुलिस को पहले ही दी गई थी, लेकिन प्रदर्शन के दौरान अपेक्षित पुलिस सहायता नहीं मिल सकी। कॉलेज प्रशासन के अनुसार पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होने पर स्थिति को नियंत्रित कर बैठक कराई जा सकती थी।
भोजन व्यवस्था को लेकर भी सामने आए अलग-अलग दावे कॉलेज प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया कि कुलपति के वापस लौटने के बाद भी प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्राचार्य और शिक्षकों के साथ अमर्यादित व्यवहार किया। प्रशासन ने बैठक में शामिल होने वाले अतिथियों और शिक्षकों के लिए की गई भोजन व्यवस्था में भी अव्यवस्था का आरोप लगाया। वहीं, एबीवीपी के विभाग संयोजक अजय पाण्डेय ने कॉलेज प्रशासन के इस दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि भोजन कॉलेज के छात्रों की फीस के पैसे से तैयार कराया गया था। उनका कहना है कि छात्रों ने खाना नहीं खाया, बल्कि उनसे प्लेटें छीन ली गई थीं। कॉलेज प्रशासन ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं और मांगें रखने का अधिकार है और जायज मांगों को विश्वविद्यालय स्तर तक पहुंचाने के लिए महाविद्यालय तैयार है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि मुख्य गेट अवरुद्ध कर कुलपति का रास्ता रोकना और शैक्षणिक बैठक बाधित करना उचित नहीं है। प्राचार्य ने देर शाम प्रेस कहा कि शैक्षणिक संस्थान में संवाद और अनुशासन के माध्यम से समस्याओं का समाधान होना चाहिए। कॉलेज प्रशासन ने घटना की जांच और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
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