ED ने फिटजी डायरेक्टर के खिलाफ प्रॉसिक्यूसन कंप्लेंट फाइल की:14411 छात्रों से करीब 86 करोड़ रुपए लेकर 32 सेंटर बंद करने का मामला
ED ने कोचिंग इन्सटीट्यूट फिटजी (FIITJEE) डायरेक्टर दिनेश गोयल व मोनिला गोयल के खिलाफ गाजियाबाद की स्पेशल कोर्ट में प्रॉसिक्यूसन कंप्लेंट फाइल की है। फिटजी पर नोएडा, ग्रेटर नोएडा व भोपाल में कुल 4 FIR हुई थीं। ED ने इनकी जांच की। इसमें पाया है कि फिटजी ने 14411 छात्रों से करीब 86 करोड़ रुपए फीस लेकर मई 2024 से फरवरी 2025 के बीच देशभर में अपने 32 सेंटर बंद कर दिए। टीचरों को सेलरी दिए बिना नौकरी से निकाल दिया। जबकि डायरेक्टर दिनेश गोयल 56 लाख और मोनिला गोयल 25 लाख रुपए महीना सेलरी हर महीना खाते से निकालते रहे। एक तरह से फिटजी ने छात्रों/टीचरों को धोखा दिया। गाजियाबाद कोर्ट में दाखिल की प्रवर्तन निदेशालय ने गाजियाबाद स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में मेसर्स एफआईआईटीजेई लिमिटेड और उसके निदेशकों, दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल के खिलाफ छात्रों से एकत्र की गई फीस के गबन से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए अभियोग दायर किया है। ED ने उनकी दोषसिद्धि और जांच के दौरान जब्त की गई तथा अस्थायी रूप से कुर्क की गई 71.88 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई की। एफआईआर में आरोप है कि एफआईआईटीजेई ने JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए दो से चार साल के कोचिंग कार्यक्रमों के लिए प्रति छात्र 2.8 लाख रुपये से 3.5 लाख रुपये तक की फीस अग्रिम रूप से इस आश्वासन पर ली कि पूरा कार्यक्रम पढ़ाया जाएगा। फीस वसूलना जारी रखा वेतन न मिलने के कारण शिक्षक चले गए और केंद्रों को बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक बंद कर दिया गया। यह भी आरोप है कि प्रबंधन ने फीस का दुरुपयोग किया और शिक्षकों के चले जाने के बाद भी नए छात्रों से झूठे आश्वासनों पर फीस वसूलना जारी रखा। नोएडा पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल को आरोपी बनाया गया है। आरोपपत्र लगभग 300 पीड़ितों, एफआईआईटीजेई कोचिंग सेंटर के संचालकों और अन्य गवाहों के बयानों के साथ-साथ जांच के दौरान एकत्र की गई फीस की रसीदों और अन्य सामग्री पर आधारित है। 32 सेंटर किए थे बंद जांच से पता चला है कि FIITJEE ने मई 2024 से फरवरी 2025 के बीच अचानक 32 केंद्र बंद कर दिए, जिससे 14,411 नामांकित छात्र अपनी फीस चुकाने के बावजूद कोचिंग से वंचित रह गए। कंपनी ने मार्च 2029 तक चलने वाले कार्यक्रमों के लिए भी छात्रों को प्रवेश देना जारी रखा। जबकि उसे पता था कि वह उन्हें पूरा नहीं कर पाएगी। इस तरह एकत्र की गई फीस कंपनी के लगातार घाटे में होने के बावजूद खर्च कर दी गई। फीस का वह हिस्सा जिसे रोककर गबन किया गया है, जिसकी राशि 85.79 करोड़ रुपये आंकी गई। वेतन का पैसा निकालते रहे डायरेक्टर आगे की जांच से पता चला है कि कंपनी को नियंत्रित करने वाले दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल ने वित्त वर्ष 2022-23 से वेतन के रूप में 24.92 करोड़ रुपये लिए। गोयल परिवार के पास 86.31% शेयर होने के कारण, निदेशकों ने बिना किसी स्वतंत्र जांच के अपने वेतन को मंजूरी दे दी। उन्होंने अन्य कर्मचारियों के वेतन में देरी या भुगतान न होने के बावजूद, पहले खुद को वेतन दिया। दिनेश कुमार गोयल को लगभग 56 लाख रुपये प्रति माह मिलते थे। मोनिला गोयल को 25 लाख रुपये प्रति माह से अधिक मिलते थे, हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि वह नियमित रूप से कार्यालय नहीं आती थीं और केवल घर से ही चेक पर हस्ताक्षर करती थीं। केंद्रों के बंद होने के बावजूद भी उन्हें भुगतान जारी रहा।
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