एटा में स्वास्थ्य कर्मियों का धरना प्रदर्शन:कैशलेस इलाज, ग्रेच्युटी और नियमित भर्तियों में 25% कोटा देने की भी मांग

Oct 09, 2026 - 17:26
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एटा में स्वास्थ्य कर्मियों का धरना प्रदर्शन:कैशलेस इलाज, ग्रेच्युटी और नियमित भर्तियों में 25% कोटा देने की भी मांग
एटा में नियमितीकरण और समान कार्य-समान वेतन समेत छह मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) संविदा कर्मचारी संगठन के सैकड़ों कर्मचारियों ने शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय के बाहर धरना दिया। जिलाध्यक्ष अरविंद सिंह चौहान के नेतृत्व में स्वास्थ्य कर्मियों ने दोपहर करीब 2 बजे प्रदर्शन शुरू किया, जो शाम 5 बजे तक चला। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांगें पूरी करने की अपील की। 18 साल से सेवा दे रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग संगठन की प्रमुख मांग है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 18 साल से अधिक समय से निरंतर सेवा दे रहे संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए। कर्मचारियों ने समान कार्य के लिए समान वेतन देने की भी मांग उठाई। उनका कहना है कि नियमितीकरण और समान वेतन की व्यवस्था होने तक अन्य जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं। 10 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिले एनएचएम कर्मचारियों ने खुद और अपने आश्रित परिवार के सदस्यों के लिए कम से कम 10 लाख रुपये की फैमिली फ्लोटर कैशलेस स्वास्थ्य बीमा सुविधा देने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में काम करने के दौरान उन्हें संक्रमित मरीजों के संपर्क में रहना पड़ता है। ऐसे में उनके और परिवार के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा जरूरी है। डीए, ईपीएफ और ग्रेच्युटी का लाभ देने की मांग कर्मचारियों ने महंगाई भत्ता (डीए), प्रभावी ईपीएफ सुविधा, नियोक्ता अंशदान, पद के अनुसार मकान किराया भत्ता (एचआरए) और ग्रेच्युटी का लाभ देने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने वाले संविदा कर्मचारियों को भी ये सुविधाएं मिलनी चाहिए। कर्मचारियों ने चिकित्सा इकाइयों में उपलब्ध राजकीय आवास का लाभ देने की मांग भी उठाई। दूसरे जिलों में स्थानांतरण नीति बहाल करने की मांग संगठन ने रिक्त पदों पर गैर जनपद स्थानांतरण की नीति बहाल करने की मांग की। इसके तहत कर्मचारियों को आपसी सहमति (म्यूचुअल ट्रांसफर) और स्वयं के अनुरोध पर दूसरे जिले में स्थानांतरण की सुविधा देने की मांग की गई। इसके अलावा सेवाकाल के दौरान किसी संविदा कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके पात्र परिजन को योग्यता के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए नीति बनाने की मांग की गई। आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन की मांग एनएचएम के तहत जिला और ब्लॉक स्तर पर सीएचसी में आउटसोर्स के माध्यम से तैनात एमसीटीएस, आईडीएसपी और एचएमआईएस डाटा ऑपरेटरों के साथ कोविड-19 कर्मचारियों को जिला स्वास्थ्य समिति में समायोजित करने की मांग की गई। संगठन ने स्वास्थ्य विभाग में होने वाली नियमित भर्तियों में एनएचएम संविदा कर्मचारियों के लिए कम से कम 25 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने की भी मांग उठाई। सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए प्रदर्शन जिलाध्यक्ष अरविंद सिंह चौहान ने बताया कि संगठन की दो प्रमुख मांगें नियमितीकरण और समान कार्य-समान वेतन हैं। इसके अलावा ईपीएफ, ग्रेच्युटी और अनुकंपा नियुक्ति समेत अन्य मांगें भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संगठन 23 तारीख को ज्ञापन सौंप चुका है और 5, 6 व 7 तारीख को सांकेतिक हड़ताल भी की गई थी। कर्मचारियों का उद्देश्य प्रदर्शन के माध्यम से सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करना है। आगे भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान अरविंद सिंह चौहान के मुताबिक, संगठन ने 8, 9 और 10 तारीख को धरना देने तथा 12 तारीख को लखनऊ के ईको गार्डन में प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। कर्मचारियों ने कहा कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन जारी रखा जाएगा। उनका कहना है कि लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने वाले संविदा कर्मचारियों को नियमितीकरण और अन्य जरूरी सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए।

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