गाजीपुर के स्कूल में करंट लगने से बच्चे की मौत:स्कूल के ग्राउंड में खेलते समय गई जान, परिजनों का आरोप- टूटा तार ठीक होता तो बच जाती जान
गाजीपुर के दानिश मेमोरियल पब्लिक स्कूल में शनिवार सुबह करंट लगने से 11 साल के छात्र उत्कर्ष गुप्ता की मौत हो गई। वह सुबह करीब 7:30 बजे परिवार के अन्य बच्चों के साथ स्कूल पहुंचा था। करीब 8 बजे ग्राउंड में खेलते समय वह बिजली के तार की चपेट में आकर बेहोश हो गया। उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उत्कर्ष दिलीप कुमार गुप्ता और किरन गुप्ता का बेटा था। उसकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बिजली का तार पहले से टूटा हुआ था। बच्चों ने घर पर इसकी जानकारी भी दी थी, लेकिन तार ठीक नहीं कराया गया। उनका कहना है कि समय रहते मरम्मत हो जाती तो हादसा टल सकता था। खेलते समय बिजली के तार की चपेट में आया उत्कर्ष परिजनों के मुताबिक, उत्कर्ष सुबह परिवार के बच्चों के साथ स्कूल पहुंचा था। ग्राउंड में खेलते समय वह बिजली के तार की चपेट में आ गया और बेहोश होकर गिर पड़ा। स्कूल में मौजूद लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप- पहले से टूटा था तार उत्कर्ष के परिवार का आरोप है कि स्कूल परिसर में बिजली का तार पहले से टूटा हुआ था। बच्चों ने घर पर इसकी जानकारी दी थी, लेकिन इसके बावजूद मरम्मत नहीं कराई गई। परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते तार ठीक करा दिया जाता तो बच्चे की जान बच सकती थी। हालांकि, तार कब टूटा और इसकी जानकारी स्कूल प्रबंधन को थी या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रबंधक बोले- बंदरों से तार टूटने की आशंका स्कूल प्रबंधक मोहम्मद शारिक कुरैशी ने बताया कि घटना के समय वह बाहर थे। उनके मुताबिक, बच्चा निर्धारित समय से पहले स्कूल पहुंच गया था। उन्होंने कहा कि स्कूल परिसर में बंदरों की समस्या रहती है। आशंका है कि बंदरों ने बिजली का तार तोड़ा होगा, जिसकी चपेट में आने से बच्चे की मौत हुई। प्रबंधक के बयान और परिजनों के आरोपों के बीच हादसे की परिस्थितियों की जांच जरूरी है। स्कूल में बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल उत्कर्ष की मौत के बाद स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में यह पता लगाना जरूरी है कि तार कब टूटा, इसकी जानकारी किसे थी और उसे समय रहते ठीक क्यों नहीं कराया गया। बिजली के तार की स्थिति और हादसे के कारणों की पड़ताल से ही लापरवाही की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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