घर-घर गईं नीलम, कटरी के बच्चों को स्कूल से जोड़ा:बच्चे फर्राटे से बोलते हैं इंग्लिश, राज्य अध्यापक पुरस्कार भी मिला

Oct 09, 2026 - 09:10
0
घर-घर गईं नीलम, कटरी के बच्चों को स्कूल से जोड़ा:बच्चे फर्राटे से बोलते हैं इंग्लिश, राज्य अध्यापक पुरस्कार भी मिला
कानपुर के इंग्लिश मीडियम प्राइमरी स्कूल कटरी शंकरपुर सराय के सरकारी स्कूल में सुबह बच्चे पहुंचते हैं तो सिर्फ हाजिरी लगाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे मन से पढ़ने के लिए। कोई अंग्रेजी में बात करता नजर आता है तो कोई क्लास में किताब लेकर बैठा होता है। इस स्कूल की बदली तस्वीर के पीछे हेडमास्टर नीलम सिंह की वह कोशिश है, जो उन्होंने कक्षा से निकलकर गांव के घरों तक पहुंचकर शुरू की थी। आज पहली से पांचवीं तक स्कूल में 112 बच्चे पंजीकृत हैं और रोजाना 90 से 95 फीसदी बच्चे स्कूल पहुंचते हैं। नीलम सिंह के काम को देखते हुए उन्हें वर्ष 2021-22 में राज्य अध्यापक पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। दैनिक भास्कर तेजस्विनी के कहते हम आपको नीलम सिंह की कहानी बताते हैं। 2018 में आईं तो स्कूल में नहीं थीं जरूरी सुविधाएं नीलम सिंह बताती हैं कि वर्ष 2018 में जब उनकी पोस्टिंग इस स्कूल में हुई, तब यहां की स्थिति बेहतर नहीं थी। हैंडपंप खराब था। कमरों के अलावा स्कूल का काफी हिस्सा कच्चा था और बाथरूम भी ठीक हालत में नहीं थे। उन्होंने स्कूल की जरूरतों को लेकर ग्राम प्रधान से संपर्क किया और सुविधाएं विकसित कराने की पहल की। अब स्कूल में साफ पीने का पानी, इंटरलॉकिंग और बच्चों के लिए झूलों जैसी सुविधाएं हैं। कटरी में शिक्षा से दूर परिवारों को समझाया स्कूल की इमारत सुधारने के साथ नीलम सिंह ने बच्चों को स्कूल से जोड़ने की चुनौती पर भी काम किया। कटरी क्षेत्र होने के कारण कई परिवार शिक्षा से दूर थे। वह घर-घर गईं और अभिभावकों से बात कर बच्चों को नियमित स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया। इसका असर स्कूल की अटेंडेंस पर दिखाई देने लगा। नीलम सिंह के मुताबिक पहले बच्चे स्कूल के बीच से ही खेती या दूसरे कामों के लिए चले जाते थे। अब बच्चे स्कूल आने के बाद छुट्टी होने पर ही घर लौटते हैं। बच्चा नहीं आया तो गांव में पहुंच जाती हैं नीलम नीलम सिंह के लिए बच्चे की गैरहाजिरी सिर्फ रजिस्टर में एक निशान नहीं है। अगर कोई बच्चा स्कूल नहीं आता तो वह खुद उसके घर पहुंचती हैं। अभिभावकों से बच्चे के स्कूल न आने की वजह पूछती हैं और उन्हें समझाकर दोबारा स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करती हैं। धीरे-धीरे यही प्रयास स्कूल में नियमित उपस्थिति की आदत में बदल गया। पढ़ाई के साथ सरकारी योजनाओं का भी लाभ नीलम सिंह स्कूल के बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने में भी मदद करती हैं। पात्र बेटियों के लिए कन्या सुमंगला योजना के फार्म भरवाती हैं। इसके अलावा अन्य पात्र बच्चों के लिए अलग-अलग सरकारी योजनाओं के आवेदन भी करवाती हैं, ताकि जानकारी या आवेदन की प्रक्रिया के अभाव में कोई बच्चा लाभ से वंचित न रह जाए। बच्चों को पढ़ाने के लिए पहले परिवार का भरोसा जीतना जरूरी इनका मानना है कि बच्चों को नियमित स्कूल लाने के लिए सिर्फ स्कूल में अच्छी पढ़ाई कराना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए अभिभावकों का भरोसा जीतना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने स्कूल की व्यवस्था सुधारने के साथ गांव के परिवारों से सीधा संवाद बनाया। आज स्कूल में बच्चों की नियमित उपस्थिति और अंग्रेजी में बातचीत इस बदलाव की तस्वीर दिखाती है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User