गोंडा में चार बेटियों के बाद पति ने दिया तलाक:यासमीन ने 10 महिलाओं से शुरू किया काम, 5000 को दे रहीं रोजगार

Oct 02, 2026 - 11:28
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गोंडा में चार बेटियों के बाद पति ने दिया तलाक:यासमीन ने 10 महिलाओं से शुरू किया काम, 5000 को दे रहीं रोजगार
गोंडा जिले के कटरा बाजार विकास खण्ड अंतर्गत सर्वांगपुर जयसिंह गांव गांव की रहने वाली महिला उद्यमी यासमीन बेगम बेगम आज एक बड़ी गोंडा देवीपाटन मंडल में आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी हुई है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आज के 9 साल पहले 2017 में उनके पति मीर मोहम्मद ने लगातार चार बेटियां पैदा होने के कारण तीन तलाक देकर के इन्हें छोड़ दिया था। इसके बाद यह परेशान होकर के कटरा बाजार ब्लॉक पहुंची इन्होंने वहां पर अधिकारियों से जानकारी लिया और एक-एक कर 10 महिलाओं को इकट्ठा कर हसनी हुसैन महिला स्वंय सहायता समूह के नाम से एक समूह बनाकर कपड़े की सिलाई का काम शुरू किया। 2017 में उनके साथ 10 महिलाएं जुड़ी थी 8000 महीने का इनका इनकम हो जा रही थी। 10000 लोग जुड़कर काम कर रहे हैं लेकिन आज 9 साल बाद अब इनके साथ लगभग 5000 महिलाओं के साथ 10000 लोग जुड़कर काम कर रहे हैं और उनकी खुद की लगभग 30000 महीने की इनकम हो रही है। सारी महिलाओं को उनकी मजदूरी और उनके काम को लेकर के पैसा देने के बाद इतनी उनकी खुद की बचत होती है जिसे अपना परिवार चला रही है। इन्होंने महिलाओं,बच्चों से जुड़े सारे कपड़ों का निर्माण करती हैं बच्चों के ड्रेस का निर्माण करती हैं मूर्तियों पर लगने वाले मोती के वाले का निर्माण करती हैं। जो भी इन्हें आर्डर मिल जाते हैं कंप्यूटर कढ़ाई, चिकनकारी करने के लिए वह भी करती है। इन्होंने महिलाओं के कपड़े बच्चों के कपड़े बनाने के लिए गोंडा, बाराबंकी और लखनऊ के गोमती नगर में भी अपने बड़े-बड़े कारखाने लगा रखे हैं। जहां 5000 महिलाएं इन कारखानों में काम करके महिलाओं और बच्चों के कपड़े तैयार करती हैं। जो यह नोएडा, लखनऊ,लखीमपुर खीरी, बनारस,कानपुर समेत प्रदेश के लगभग 30 से अधिक जिलों में यह भेजते हैं जहां पर उनके कपड़ों की बिक्री होती है। लखनऊ में कारखाना डाला है 2 साल पहले इन्होंने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से भी 500000 का लोन लिया था उसके बाद इन्होंने लखनऊ में कारखाना डाला है वर्तमान में विश्वकर्म योजना को लेकर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में ट्रेनिंग भी देती है। मेडल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित कई बड़े कार्यक्रमों में हो चुके हैं सम्मानित चारों बेटियों को पढ़ा रही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गोंडा से लेकर के प्रदेश स्तर तक आयोजित कई कार्यक्रमों में यासमीन बेगम बेगम को महिला उद्यमी और हिम्म तवाली औरत को लेकर के मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर के सम्मानित भी किया जा चुका है। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक,डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, इसके साथ ही साथ गोंडा की पूर्व मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी,गोंडा के पूर्व जिला अधिकारी उज्जवल कुमार,नितिन बंसल सहित काफी अधिकारियों और राजनेताओं के हाथ यह सम्मानित भी हो चुके हैं। जब भी स्वयं सहायता समूह की बात होती है तो पूर्वांचल में सबसे पहले उनके समूह का नाम आता है। गोंडा से लेकर के पूरे प्रदेश में नाम रोशन क्योंकि 2017 में जब लोग समूह के बारे में नहीं जानते थे तब इन्होंने समूह बनाया और आज यह गोंडा से लेकर के पूरे प्रदेश में अपना नाम रोशन कर रही है। अपने तीन बच्चों को लखनऊ में अच्छे विद्यालय में पढ़ाई करवा रही हैं इनकी चारों बेटियों का नाम सबसे बड़ी वाली बेटी 16 वर्षीय शबनम कक्षा 11वीं पढ़ रही है यह आर्मी में अफसर बनकर जाना चाहती है। दूसरी वाली बिटिया 14 वर्षीय हिना ये 10वीं में पढ़ रही है तीसरी बिटिया 12 वर्षीय गुलशन जहां और चौथी बिटिया 11 वर्षीय सानिया ये कक्षा 7 में पढ़ रही है। वहीं यासमीन बेगम ने बताया कि वर्ष 2017 में हमारे पति ने चार बेटियां होने के कारण हमें छोड़ दिया था उसे समय मेरा दिमाग नहीं काम कर रहा था कि मैं क्या करूं। अधिकारियों ने कहा कि एक समूह का डिमांड है मैं अपने ब्लॉक गई वहां से मैं बात किया तो अधिकारियों ने कहा कि एक समूह का डिमांड है आप समूह बना करके लाइए काम शुरू करिए। फिर मैं 10 महिलाओं को इकट्ठा किया मैंने काम शुरू किया पहले में दो से तीन चार कपड़े सिलकर किसी तरीके से अपना परिवार चल रही थी। धीरे-धीरे हमने 50-60 कपड़े सिलना शुरू किया इसके बाद में हमें बच्चों की ड्रेस बनाने का काम मिला इससे हमको बड़ी मदद मिली और अब हम 10 महिलाओं से जो काम शुरू किए थे। वह हमारे साथ लगभग 5000 महिलाएं और 5000 लोग जुड़े हैं हमारी जब इनकम 2017 में लगभग ₹8000 के करीब हो रही थी वह इनकम हमारी आज ₹30000 के करीब हो रही है। महिलाओं के अलग-अलग कपड़े तैयार मेरा गोंडा बाराबंकी और लखनऊ में कपड़ों का सिलाई का कारखाना है जहां पर हम महिलाओं के अलग-अलग कपड़े तैयार करते हैं चिकनकारी का काम करते हैं। कंप्यूटर कढ़ाई का काम करते हैं विश्वकर्म योजना के तहत प्रदेश की अलग-अलग जिलों में जाकर के लोगों को ट्रेनिंग दे देते हैं। मैं खुद सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर के आत्मनिर्भर बनी हूं और खुद महिलाओं को मैं आत्मनिर्भर बना भी रही हूं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हूं यही चाहती हूं कि महिलाएं ज्यादा ज्यादा जुड़े और खुद आत्मनिर्भर बने। शुरू में हमें अगर सरकार की मदद ना मिली होती तो आज मैं यहां नहीं होती बल्कि मैं दर-दर भटक रही होती। मैं इसके लिए सरकार को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं मैं यही कहूंगी कि महिलाओं को ज्यादा ज्यादा जुड़ना चाहिए मैं लगातार महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हूं उन्हें स्वरोजगार दे रही हूं।

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