गोंडा में स्कूल संचालक ने खुद तोड़ा अवैध निर्माण:30 साल से सरकारी जमीन पर था कब्जा, कोर्ट में शपथ पत्र देकर आगे पैरवी से किया इनकार
गोंडा में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन की सख्ती का असर अब नजर आने लगा है। सदर तहसील क्षेत्र के छावनी सरकारी इलाके में नगर पालिका की जमीन पर करीब 30 साल से संचालित ज्योति विद्या मंदिर स्कूल का अवैध निर्माण मंगलवार को स्कूल संचालक ने खुद तोड़ना शुरू कर दिया। दोपहर करीब 2 बजे से दयानंद मिश्रा अपने खर्चे पर मजदूर लगाकर कमरों, टीन शेड और अन्य निर्माण को हटवा रहे हैं। गोंडा नगर पालिका की गाटा संख्या 514, 515, 524 और 525 की जमीन को लेकर वर्ष 1997 से विवाद न्यायालय में लंबित था। वर्ष 2008 में दयानंद मिश्रा की ओर से मुकदमा दाखिल किया गया था, जिसमें स्थगन आदेश पारित हुआ था। इसके बाद से जमीन को खाली कराने को लेकर मामला न्यायालय में चलता रहा। दो दिन पहले दयानंद मिश्रा ने न्यायालय में शपथ पत्र देकर मामले में आगे पैरवी नहीं करने और कार्रवाई समाप्त करने की मांग की थी। इसके बाद अब उन्होंने खुद ही सरकारी जमीन से कब्जा हटाना शुरू कर दिया। मंगलवार को मजदूरों की मदद से स्कूल के कमरों को तोड़ा गया। टीन शेड, लोहे की पाइप और खिड़कियां भी हटाकर अलग-अलग वाहनों से ले जाई जा रही हैं। आयुक्त कार्यालय के लिए आरक्षित थी जमीन बताया गया कि करीब 4 हजार वर्गफीट जमीन आयुक्त कार्यालय और भवन के निर्माण के लिए आरक्षित की गई थी। करीब तीन दशक से अवैध कब्जा होने के कारण यहां निर्माण नहीं हो सका। प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब जमीन खाली होने से प्रस्तावित निर्माण का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। स्कूल की मान्यता को लेकर भी हुई थी जांच इस जमीन पर संचालित ज्योति विद्या मंदिर की मान्यता को लेकर भी जांच कमेटी गठित की गई थी। जांच के दौरान विद्यालय में विद्यार्थी और शिक्षक नहीं मिलने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद सरकारी जमीन पर विद्यालय का संचालन किए जाने को लेकर मामला प्रशासन के संज्ञान में था। कमिश्नर की सख्ती के बाद कार्रवाई तेज गोंडा की कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने जिले में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के मामलों की समीक्षा के दौरान इस प्रकरण को गंभीरता से लिया। कमिश्नर ने कहा कि प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि करीब 30 वर्षों से सरकारी नजूल की जमीन पर कब्जा था। संबंधित व्यक्ति ने न्यायालय में शपथ पत्र देकर आगे की कार्रवाई में पैरवी नहीं करने की बात कही है, जिसके बाद अब वह स्वयं जमीन खाली कर रहे हैं। कमिश्नर ने कहा कि जिले में जहां भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा मिलेगा, वहां कार्रवाई कर जमीन खाली कराई जाएगी।
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