गोरखपुर की कान्हा गोशाला का टेंडर एक साल से अटका:45 से 75 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन की दर की मांग; जल्द निकलेगा टेंडर

Oct 03, 2026 - 14:20
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गोरखपुर की कान्हा गोशाला का टेंडर एक साल से अटका:45 से 75 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन की दर की मांग; जल्द निकलेगा टेंडर
गोरखपुर के वार्ड 38 महेवा में नगर निगम की कान्हा गोशाला के संचालन को लेकर टेंडर प्रक्रिया करीब एक साल से अटकी हुई है। वर्तमान में गोशाला का संचालन कर रही आईडीएस इंटरप्राइजेज ने नगर आयुक्त अजय जैन को पत्र देकर भरण-पोषण की दर बढ़ाने की मांग की है। संस्था ने 45 रुपए प्रति गोवंश प्रतिदिन की दर को बढ़ाकर 75 रुपए करने की मांग की है। संस्था का कहना है कि हरा चारा, भूसा और चोकर समेत गोवंश के भरण-पोषण में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री की कीमतें बढ़ गई हैं। ऐसे में निर्धारित 45 रुपए की दर में गोवंशों का समुचित रख-रखाव करना मुश्किल हो रहा है। गुरुवार को कान्हा उपवन में 719 नर और 152 मादा समेत कुल 871 निराश्रित गोवंश संरक्षित थे। अक्टूबर 2025 में खत्म हो गया था टेंडर आईडीएस इंटरप्राइजेज के मुताबिक, कान्हा गोशाला के संचालन का उसका टेंडर 1 नवंबर 2024 से 31 अक्टूबर 2025 तक था। टेंडर अवधि समाप्त होने के बाद तत्कालीन नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने नई फर्म के चयन और उसके काम शुरू करने तक संस्था को गोशाला का संचालन जारी रखने के निर्देश दिए थे। इसके बाद से संस्था 45 रुपए प्रति गोवंश प्रतिदिन की दर से संचालन कर रही है। संस्था ने 22 सितंबर को नगर आयुक्त को दिए पत्र में कहा है कि टेंडर समाप्त हुए करीब 12 महीने हो चुके हैं, लेकिन नया टेंडर नहीं हुआ। चारे और अन्य सामग्री की कीमत बढ़ने से मौजूदा दर पर खर्च पूरा करना मुश्किल हो रहा है। संस्था ने दावा किया कि गोवंशों के रख-रखाव में कमी न हो, इसके लिए वह निर्धारित राशि से अधिक खर्च स्वयं वहन कर रही है। पुराने विवाद को लेकर भी संस्था पर उठ चुके हैं सवाल आईडीएस इंटरप्राइजेज वही संस्था है, जिसके संचालक के खिलाफ जनवरी में निराश्रित गोवंशों की मौत के मामले में क्रूरता की एफआईआर दर्ज हुई थी। इस मामले में संचालक समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। घटना के बाद नगर निगम और सरकार की किरकिरी हुई थी तथा संस्था को हटाने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद नई एजेंसी के चयन तक उसी संस्था से गोशाला का संचालन कराया जा रहा है। 18 जुलाई को जारी हुई थी आरएफपी नगर निगम की ओर से नई संस्था के चयन के लिए 18 जुलाई को आरएफपी जारी की गई थी। 29 जुलाई को इसे खोला गया। इसमें आईडीएस इंटरप्राइजेज और नेचर क्लाइमेट फाउंडेशन ने प्रतिभाग किया था। आरोप है कि दोनों फर्मों का संबंध फर्म आरके नायक से था। आरएफपी खुले दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी नई एजेंसी का चयन नहीं हो सका। एक-दो दिन में फिर निकलेगा टेंडर अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने बताया कि कान्हा उपवन के संचालन के लिए जारी आरएफपी की कुछ शर्तों में संशोधन किया जा रहा है। संशोधन के बाद एक-दो दिन में दोबारा टेंडर प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद जल्द ही नई फर्म का चयन कर कान्हा उपवन का संचालन उसे सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी

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