गोरखपुर में आयुषी बनीं एक दिन की महिला थाना प्रभारी:सुनीं महिलाओं की समस्याएं, समझा पुलिस का कामकाज

Oct 16, 2026 - 18:40
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गोरखपुर में आयुषी बनीं एक दिन की महिला थाना प्रभारी:सुनीं महिलाओं की समस्याएं, समझा पुलिस का कामकाज
गोरखपुर में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे मिशन शक्ति अभियान फेज-6.0 के तहत आयुषी गुप्ता को एक दिन के लिए महिला थाना प्रभारी बनाया गया। इस दौरान आयुषी ने थाना प्रभारी की जिम्मेदारी संभालते हुए पुलिस के कामकाज को करीब से समझा। उन्होंने थाने का भ्रमण किया और महिलाओं से जुड़ी शिकायतों को सुनने के साथ पुलिस की कार्यप्रणाली की जानकारी भी ली। पुष्पगुच्छ देकर किया गया स्वागत महिला थाना प्रभारी एसओ सुनीता सिंह ने आयुषी गुप्ता को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्हें थाने में होने वाले कामकाज और महिलाओं से संबंधित शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। आयुषी ने पुलिस की जिम्मेदारियों को समझा और जाना कि थाने में आने वाले लोगों की समस्याओं को किस तरह सुना जाता है। महिलाओं की समस्याएं सुनीं, कार्रवाई का दिया भरोसा एक दिन की महिला थाना प्रभारी की जिम्मेदारी निभाते हुए आयुषी गुप्ता ने महिलाओं की समस्याएं सुनीं। उन्होंने संबंधित मामलों में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस दौरान उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि महिलाओं की शिकायतों पर पुलिस किस तरह कार्रवाई करती है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है। आयुषी गुप्ता ने कहा कि एक दिन के लिए महिला थाना प्रभारी बनकर उन्हें गर्व महसूस हुआ। इस दौरान उन्होंने करीब से देखा कि पुलिस किस तरह आम लोगों की समस्याएं सुनती है और उनके समाधान के लिए काम करती है। उनके लिए यह अनुभव नया और सीखने वाला रहा। इससे उन्हें पुलिस की जिम्मेदारियों और समाज के प्रति उसकी भूमिका को समझने का मौका मिला। मिशन शक्ति से महिलाओं को जागरूक करने की पहल मिशन शक्ति अभियान फेज-6.0 का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा, सम्मान और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। इसके तहत उन्हें विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से पुलिस की कार्यप्रणाली समझने और अपनी बात रखने का अवसर दिया जा रहा है। आयुषी गुप्ता को एक दिन की महिला थाना प्रभारी बनाने की पहल भी इसी दिशा में एक कदम है। इस तरह के कार्यक्रमों से महिलाओं और बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने तथा उन्हें अपनी समस्याओं के प्रति जागरूक करने में मदद मिलती है।

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