गोरखपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन:पुतला दहन के लिए दरोगा को कैप्चर कर 4 बार धक्का मारा, पहचान कर रही पुलिस
गोरखपुर में सोमवार को कांग्रेस की ओर से धरना प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंकने से रोकने का प्रयास किया। जिसको लेकर काफी देर तक कार्यकर्ताओं से नोकझोंक और झड़प हुई। आरोप है कि इसी दौरान एक कार्यकर्ता ने आक्रोश में आकर ड्यूटी में तैनात दरोगा को बल के साथ 4 बार धक्का दिया, किनारे करके चारो ओर से उन्हें पकड़ लिया गया। फिर पुतला दहन करने जुट गए। अब पुलिस धक्का मारने वाले कार्यकर्ता की तलाश में है। वहीं कांग्रेसियों का कहना है कि वे शांति पूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे। जो उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन पुलिस का रवैया बहुत खराब था। उन्होंने आरोप लगाया कि ये कार्रवाई मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए किया गया। जानिए पूरा मामला…
देश भर में चल रहे चुनाव आयोग की गड़बड़ी के चर्चा के बाद गोरखपुर में सोमवार को कोंग्रेसियों ने जमकर विरोध- प्रदर्शन किया। दोपहर करीब 12 बजे राम प्रसाद बिस्मिल पार्क में सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता जुटे। सभी ने मिलकर सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मार्च निकालते हुए DM ऑफिस पहुंचे। उन्होंने ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन कर अपना विरोध जताने की कोशिश की। साथ ही राष्ट्रपति से उनके इस्तीफे की मांग की। हालांकि प्रदर्शन के दौरान जब- जब कार्यकर्ता पुतला फूंकने की कोशिश कर रहे थे, तब-तब पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। कार्यकर्ताओं के हाथ पुतला छीनने को लेकर उनके बीच तीखी नोकझोंक और झड़प भी हुई। इसी दौरान एक कार्यकर्ता ने दरोगा विनोद को कई बार धक्का देकर पीछे किया और उनके साथ मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं ने उन्हें पीछे से पकड़ लिया। उसके बाद पुतला फूंकने में लग गए। इस घटना के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोपी कार्यकर्ता की तलाश की जा रही है। यह पुलिस की अराजकता और तानाशाही-जिलाध्यक्ष
वहीं जिलाध्यक्ष राजेश तिवारी ने कहा कि यह पूरी तरह से पुलिस की अराजकता और तानाशाही है। सीधे तौर पर लोकतान्त्रिक प्रक्रिया को ध्वस्त करने की साजिश है। पूरे प्रदेश में हर जगह पुतला फूंका गया है। उन्होंने कहा कि हम लोगों ने कोई उदंडटा, अराजकता या कोई गुंडई नहीं नहीं की। हम लोग गांधीवादी लोग हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों को मानते हैं। शांति से प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन पुलिस का रवैया बहुत खराब था। उन्होंने आगे कहा कि हम लोग न तो प्रधानमंत्री का पुतला फूंक रहे थे और ना ही मुख्यमंत्री का, फिर पुलिस को किस बात से आपत्ति थी। चुनाव आयुक्त से इन लोगों का क्या लेना देना है। ये सब मुख्यमंत्री शहर में थे इसीलिए किया गया है। सपा वाले होते तो मार कर लिए होते।
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