गोरखपुर में खुले नालों का होगा वार्डवार सर्वे:मेयर बोले- लापरवाही पर ठेकेदारों पर FIR के साथ- साथ अफसरों पर भी कार्रवाई
गोरखपुर में खुले और निर्माणाधीन नालों के कारण हो रहे हादसों को लेकर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाया। निर्माणाधीन नाले में डूबकर युवक की मौत और रामजानकीनगर में पांच वर्षीय बच्ची के नाले में गिरने की घटना का संज्ञान लेते हुए महापौर ने नगर निगम सभागार में आपात समीक्षा बैठक बुलाई। उन्होंने नगर आयुक्त अजय जैन और मुख्य अभियंता अमित शर्मा को स्पष्ट निर्देश दिया कि नालों के निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। जांच में दोषी पाई जाने वाली फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की जाए। महापौर ने कहा कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा इंतजाम करना ठेकेदारों की जिम्मेदारी है। वहीं, काम की निगरानी करने वाले नगर निगम के अभियंता भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। किसी निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था में कमी मिलने या लापरवाही के कारण हादसा होने पर संबंधित ठेकेदार के साथ जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नालों के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं, ताकि लोगों की जान जोखिम में न पड़े। हर वार्ड में अभियंताओं की तय होगी जवाबदेही महापौर ने निर्देश दिया कि महानगर के प्रत्येक वार्ड में तैनात अवर अभियंता और सहायक अभियंता की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाए। संबंधित अभियंताओं को अपने क्षेत्र में खुले और निर्माणाधीन नालों की स्थिति पर नजर रखनी होगी। कहीं भी नाला खुला मिलने या सुरक्षा व्यवस्था में कमी पाए जाने पर तत्काल सुधार कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी क्षेत्र में खुले नाले के कारण दुर्घटना होती है तो संबंधित अधिकारी की भूमिका की जांच कराई जाएगी। लापरवाही सामने आने पर उसके खिलाफ निलंबन की संस्तुति की जाएगी। महापौर के इस निर्देश से नालों के निर्माण और उनकी निगरानी में लगे अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी। खुले नालों का वार्डवार सर्वे कराएगा नगर निगम महानगर में खुले नालों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए नगर निगम वार्डवार सर्वे कराएगा। इसके तहत अवर अभियंता अपने-अपने क्षेत्र में खुले नालों का निरीक्षण करेंगे और उनकी लंबाई-चौड़ाई समेत जरूरी विवरण दर्ज कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। सर्वे के लिए निर्धारित प्रारूप में नाले का स्थान, उसकी अनुमानित लंबाई और चौड़ाई का ब्योरा दर्ज किया जाएगा। रिपोर्ट में निरीक्षण करने वाले अधिकारी का नाम, पदनाम, जोन और वार्ड का विवरण भी शामिल होगा। इससे नगर निगम के पास यह जानकारी उपलब्ध होगी कि किस वार्ड में कितने स्थानों पर नाले खुले हैं और किन जगहों पर तत्काल सुरक्षा इंतजाम करने की जरूरत है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर खुले नालों की वार्डवार सूची तैयार की जाएगी। इससे खतरनाक स्थानों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने में मदद मिलेगी। साथ ही संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करना भी आसान होगा। हादसों के बाद सुरक्षा इंतजामों पर जोर महानगर में नालों के खुले रहने और निर्माण स्थलों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से हादसों का खतरा बना रहता है। हाल में निर्माणाधीन नाले में डूबकर युवक की मौत और रामजानकीनगर में पांच वर्षीय बच्ची के नाले में गिरने की घटना ने इस समस्या को फिर सामने ला दिया है। इन घटनाओं के बाद नगर निगम प्रशासन ने खुले नालों की पहचान करने और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी को लेकर सख्ती बढ़ाने का निर्णय लिया है। महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि मौके पर जाकर स्थिति की जांच करें। जहां नाले खुले हैं, वहां जरूरत के मुताबिक बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा इंतजाम कराए जाएं। निर्माण कार्य पूरा होने तक लोगों की आवाजाही वाले स्थानों पर विशेष सतर्कता बरती जाए। बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद आपात समीक्षा बैठक में नगर आयुक्त अजय जैन, अपर नगर आयुक्त गौरव रजन श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता अमित शर्मा, अधिशासी अभियंता अशोक भाटी और अमरनाथ, सहायक अभियंता शैलेष कुमार तथा दीपक शाह मौजूद रहे। महापौर ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि खुले नालों की पहचान, सुरक्षा इंतजाम और निर्माण कार्यों की निगरानी में किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए।
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