गोरखपुर में राप्ती का उफान बना मुसीबत:शहर से टूटा संपर्क- नाव के सहारे जी रहे लोग, बच्चों की पढ़ाई भी हुई ठप
गोरखपुर में बाढ़ ने इस बार ऐसा रूप दिखाया है, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। राप्ती नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और उसका उफान अब गांवों को निगलता हुआ नजर आ रहा है। बेह्रामपुर समेत दर्जनों गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। हालात इतने खराब हैं कि गांवों का शहर से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। घरों में घुसा पानी अब लोगों की जिंदगी को थाम चुका है। लोग अपने ही घरों में कैद हैं और बाहर सिर्फ अथाह पानी दिखाई देता है। बाढ़ ने घरों को टापू में बदल दिया है। कई मकानों का निचला हिस्सा पूरी तरह पानी में डूब चुका है, जिससे परिवार छतों पर टीन शेड डालकर रहने को मजबूर हैं। उसी छोटे से हिस्से में परिवार, राशन और पशु सभी करने की कोशिश कर रहे हैं। खाने-पीने, शौच और पीने के पानी तक के लिए जूझना पड़ रहा है। हर दिन एक लड़ाई बन चुका है, जहां जिंदगी बस किसी तरह चल रही है। स्कूल जाने के लिए बच्चे लड़ते हैं जंग बाढ़ के बीच नाव ही अब लोगों की लाइफ लाइन बन गई है। राशन लाना हो, काम पर जाना हो या अस्पताल पहुंचना हो हर चीज नाव पर निर्भर है। लेकिन ये सफर आसान नहीं है। तेज बहाव और गहराई के बीच नाव से जाना हर बार खतरे से खाली नहीं होता। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे हर सफर में डर के साये में रहते हैं। इस आपदा का सबसे दर्दनाक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। सुबह स्कूल जाने के लिए बच्चों को घंटों नाव का इंतजार करना पड़ता है। देर से पहुंचना तो आम बात है, लेकिन गीले कपड़े और पानी से भरे जूते उनकी परेशानी को और बढ़ा देते हैं। गांव के छात्र अंश बताते हैं कि कई बार नाव नहीं मिलने पर उन्हें पानी में उतरकर जाना पड़ता था। हर कदम पर डर लगता है। शाम होते ही गांव में सन्नाटा
बाढ़ के पानी के साथ खतरनाक जीवों का खतरा कई गुना बढ़ गया है। गांवों में रोज सांप निकल रहे हैं और कुछ इलाकों में घड़ियाल भी पानी में तैरते देखे गए हैं। शाम ढलते ही गांव में सन्नाटा छा जाता है लोग अपने बच्चों को घरों के अंदर कर लेते हैं। हर रात डर के साये में गुजरती है। गांव के निवासी प्रदीप कुमार कहते हैं कि अब सबसे बड़ा डर यही है कि कहीं सांप घर में न घुस जाए। पशुओं के लिए भी बढ़ी समस्या
बाढ़ ने इंसानों के साथ-साथ पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई परिवारों की गाय, भैंस और बकरियां बाढ़ के तेज बहाव में बह गई हैं। जो बची हैं, उनके लिए चारे की भारी किल्लत हो गई है। गांव की माधुरी बताती हैं कि उनका सारा भूसा पानी में बह गया और अब प्रशासन से मिल रहा चारा पर्याप्त नहीं है। हालात ऐसे हैं कि पशुओं को दूसरे के घरों में बांधकर रखना पड़ रहा है। घर में ही इलाज कराने को मजबूर
बाढ़ के बीच बीमार लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। गांवों में स्वास्थ्य कर्मी पहुंचकर दवाइयां दे रहे हैं, लेकिन किसी गंभीर बीमारी या जांच के लिए अस्पताल पहुंचना बेहद कठिन हो गया है। नाव से सफर करना भी जोखिम भरा है, जिससे लोग मजबूरी में घरों में ही रहकर इलाज करने को मजबूर हैं। नेपाल और पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश ने गोरखपुर में बाढ़ की स्थिति को और खतरनाक बना दिया है। नदियों में पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे तेज बहाव और कटान का खतरा बढ़ गया है। तटबंधों की निगरानी तेज कर दी गई है और प्रशासन हर पल हालात पर नजर बनाए हुए है। हजारों लोग हैं प्रभावित
प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। बड़ी नावें और मोटरबोट तैनात कर लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। करीब 10 हजार लोग इस बाढ़ से प्रभावित हैं और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गांव के लोगों का कहना है कि यह त्रासदी हर साल दोहराई जाती है कभी 2 महीने तो कभी 6 महीने तक पानी भरा रहता है। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। लोगों की मांग है कि गांव के निचले इलाकों को मिट्टी डालकर ऊंचा किया जाए, ताकि कम से कम एक सुरक्षित रास्ता बन सके और वे सामान्य जीवन जी सकें।
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